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बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की संख्या बढ़ी, देरी से लागत का बोझ

अमृता पिल्लई / मुंबई November 22, 2018

केंद्र सरकार की ओर से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर जोर देने के कारण देश में कार्यान्वयन के तहत बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की संख्या बढ़ गई है। केयर रेटिंग की रिपोर्ट से पता चलता है कि परियोजनाओं में देरी और लागत में बढ़ोतरी से बचने की कवायदों का सीमित असर है।  गुरुवार को जारी केयर की रिपोर्ट के मुताबिक कार्यान्वयन के तहत परियोजनाओंं की कुल संख्या अगस्त 2018 के आखिर तक 1,361 रहीं, जो अप्रैल 2017 में 1,247 थीं। इन परियोजनाओं को पूरा करने की अनुमानित लागत फिलहाल मूल आवंटन 16.78 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 20.16 लाख करोड़ रुपये हो गई है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'लागत में बढ़ोतरी 3.38 लाख करोड़ रुपये हो सकती है, जो अनुमानित मूल लागत का 20 प्रतिशत है।' 
 
केयर की रिपोर्ट में केंद्र की 1,361 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का संक्षिप्त ब्योरा दिया गया है, जिनकी लागत 1.50 अरब रुपये या उससे ज्यादा है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि 1,361 परियोजनाओं में से 296 देरी से चल रही हैं, 358 परियोजनाओं की लागत बढ़ी है। 66 परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनकी लागत और समय दोनों में बढ़ोतरी हुई है। केयर रेटिंग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, 'देरी से चल रहीं, या निश्चित समयावधि के हिसाब से नहीं चल रही परियोजनाओं की कुल संख्या करीब 71 प्रतिशत है।' 
 
समय और लागत में बढ़ोतरी पर नजर डालें तो पता चलता है कि मार्च 2011 में 18.08 प्रतिशत परियोजनाओं की लागत बढ़ी थी, जो अगस्त 2018 में 20.1 प्रतिशत हो गया। यह मार्च 2011 से अप्रैल 2018 के बीच अधिकतम है। केयर ने यह भी कहा है कि परियोजनाएं पूरा होने में देरी की वजह से इनकी लागत बढ़ी है। रिपोर्ट में कहा गया है, 'अगस्त 2018 में बढ़ी लागत वाली परियोजनाओंं की संख्या 20.1 प्रतिशत हो गई, जो पिछले 2 साल का उच्चतम स्तर है, जब लागत में बढ़ोतरी घटी थी।  यह इस बात का संकेत है कि ज्यादा संख्या में परियोजनाएं अभी चल रही हैं और पूरी होने की स्थिति में हैं।' 
 
अगर देरी के हिसाब से देखेंं तो पिछले 7 साल में देरी से चल रही परियोजनाओं की संख्या कम हुई है। मार्च 2011 में 47.33 प्रतिशत परियोजनाएं देरी से चल रही थीं, जिनकी संख्या अगस्त 2018 में घटकर 21.7 प्रतिशत रह गई है।  केयर ने कहा कि परियोजनाओं में देरी की वजह भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी में देरी, बुनियादी सुविधाओं का अभाव और लिंकेज, वित्तपोषण में देरी, इंजीनियरिंग संबंधी देरी, ठेका मसला, पर्यावरण संबंधी सुरक्षा के मानक सख्त होने सहित अन्य कारण हैं। 
 
देश की बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं धन की उपलब्धता की वजह से भी अटकी हैं। केयर ने पाया है कि परियोजनाएं पूरी करने के लिए दो तिहाई लागत को खर्च किया जाना अभी बाकी है, जिससे सरकार की ओर से वित्तपोषण की जरूरतों का पता चलता है, जिससे कि ये परियोजनाएं पूरी की जा सकें।  सड़क क्षेत्र पर क्रिसिल की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की 2018-19 में 3,600-3,800 किलोमीटर परियोजनाएं पूरी होने की संभावना है, जबकि पहले 4,300 किलोमीटर का अनुमान लगाया गया था। क्रिसिल की रिपोर्ट में कहा गया है, 'हमारा अनुमान है कि 800 किलोमीटर परियोजनाएं पूरी करने को लेकर जोखिम है क्योंकि कई हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) परियोजनाएं आवंटन के 7 महीने बाद अभी भी शुरू नहीं हुई हैं।'  केयर रेटिंग के मुताबिक महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 9.2 प्रतिशत परियोजनाएं क्रियान्वयन के अधीन हैं। केयर ने कहा है, 'राज्य में 129 परियोजनाएं लागू की जा रही हैं, जिनकी मूल लागत 1.72 लाख करोड़ रुपये है।'
Keyword: infra, projects, care rating,,
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