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खर्च में कटौती कर सकता है केंद्र

अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली November 22, 2018

भारतीय स्टेट बैंक की शोध शाखा ने कहा है कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह लक्ष्य से कम रहने के कारण सरकार की इस वित्त वर्ष में खर्च करने की क्षमता पर असर पड़ सकता है। सरकार के खर्च में 700 अरब रुपये के आसपास की कमी हो सकती है, जो वित्त वर्ष 2018-19 के कुल पूंजीगत व्यय का एक चौथाई है।  यह कटौती सरकार द्वारा 2017-18 में पूंजीगत व्यय में 363 अरब रुपये कटौती की तुलना में दोगुना होगी, जिसे कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.5 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखा जा सके। 
 
रिपोर्ट के लेखक और स्टेट बैंक में समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष ने कहा कि वैश्विक वृद्धि में अनपेक्षित मंदी की वजह से भारत के सकल घरेलू उत्पाद पर असर पड़ा है। उन्होंने कहा, '2018-19 की चौथी तिमाही में वृद्धि दर 7 प्रतिशत से कम रह सकती है।' उन्होंने कहा कि वृद्धि दर वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही के 7.5 प्रतिशत से कम होकर तीसरी तिमाही मेंं 7 प्रतिशत के करीब रह सकती है। बहरहाल अगर तेल के दाम 65 डॉलर प्रति बैरल पर स्थिर हो जाते हैं तो भारत का चालू खाता घाटा (सीएडी) जीडीपी के 2.6 प्रतिशत पर आ सकता है, जो पहले 2.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। 
 
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अप्रत्यक्ष कर संग्रह में कमी 900 अरब रुपये रह सकती है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा जीएसटी से 700 अरब रुपये कम संग्रह का होगा। पेट्रोल एवं डीजल पर उत्पाद शुल्क में कटौती से 105 अरब रुपये कम आएंगे। इसके अलावा स्टॉक मार्केट के खराब प्रदर्शन से 200 अरब रुपये दीर्घावधि पूंजीगत लाभ के संग्रह में मुश्किल होगी। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि जीएसटी से संग्रह में कमी करीब 500 अरब रुपये हो सकती है। वहीं कोटक और येस बैंंक के शोध विभाग के विश्लेषकों का जीएसटी से कर संग्रह में कमी का अनुमान सरकार के अनुमान के आसपास है, लेकिन प्रमुख वैश्विक ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने इस संभावना से इनकार नहीं किया है कि जीएसटी से कर संग्रह में कमी 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो सकती है। 
 
इसे संतुलित करने मेंं प्रत्यक्ष कर, सीमा शुल्क और चोरी रोकने के लिए उठाए गए कदम सरकार के मददगार हो सकते हैं। प्रत्यक्ष कर संग्रह जहां बजट अनुमान की तुलना में 200 अरब रुपये ज्यादारहने की संभावना है, वहीं सीमा शुल्क से 140 अरब रुपये ज्यादा आ सकते हैं। इसके अलावा कर चोरी रोकने के 200 अरब रुपये अधिक आने की संभावना है।  वहींं रिपोर्ट के मुताबिक 120 अरब रुपये का अतिरिक्त सब्सिडी बोझ दबाव की एक और वजह है।  पूंजीगत व्यय में कमी किए जाने का सबसे नकारात्मक असर सड़क और बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर पड़ेगा। घोष ने कहा है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को बजट के अलावा अन्य साधनों से धन जुटाने पड़ सकते हैं। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि राजस्व में कमी की स्थिति में ग्रामीण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए  राजकोषीय विस्तार दिया जा सकता है। इसमें कहा गया है कि हम इस बात पर केंद्रित नहीं है कि सरकार राजकोषीय नीति पर पूरी तरह स्थिर रहेगी, खासकर ऐसी स्थिति में, जबकि ग्रामीण क्षेत्र को समर्थन की सख्त जरूरत है। 
Keyword: SBI, GST, GDP, CAD,,
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