बिजनेस स्टैंडर्ड - बिजली क्षेत्र के संकट पर समिति की रिपोर्ट
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बिजली क्षेत्र के संकट पर समिति की रिपोर्ट

श्रेया जय / नई दिल्ली November 21, 2018

बिजली क्षेत्र की दबाव वाली संपत्तियों के लिए दीर्घावधि समाधान निकालने के लिए कैबिनेट सचिव पीके सिन्हा की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति (एचएलईसी) ने तात्कालिक मसलों के समाधान के लिए पिट-स्टॉप तरीके का सुझाव दिया है। बहरहाल समिति ने ज्यादातर समस्याओं का बोझ सरकारी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर डाल दिया है, उन्हें सुधार के दिशानिर्देश नहीं दिए हैं। 

समिति ने कोयले की आपूर्ति को एक अहम मसला माना है। समिति ने सरकारी कंपनी एनटीपीसी से उन इकाइयों की मदद करने की बात कही है, जो कोयले की कमी की वजह से दबाव में हैं। 

रिपोर्ट में कहा गया है, 'एनटीपीसी बिजली क्षेत्र में सुविधा प्रदाता के रूप में काम कर सकती है और वह दबाव वाली बिजली कंपनियों से पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से बिजली खरीदकर एनटीपीसी के बिजली खरीद समझौते के मुताबिक वितरण कंपनियों को तब तक बिजली की आपूर्ति कर सकती है, जब तक कि एनटीपीसी के वे संबंधित संयंत्र चालू नहीं हो जाते, जिनके लिए बिजली खरीद समझौता किया गया है।' इसमें आगे यह भी कहा गया है कि ऐसे संयंत्रों की ईंधन की आपूर्ति करने के लिए एनटीपीसी अपने लिंकेज/कोल बॉस्केट का इस्तेमाल कर सकती है। 

समिति ने कोयला एवं बिजली मंत्रालयों से कोयले की आपूर्ति के मसले पर मिल जुलकर काम करने को कहा है और कुछ न्यूनतम अवधि (जैसे 3 महीने के लिए) कम अवधि के कोल लिंकेज कर कोयले की कमी का समाधान करने को कहा है। इसमें कहा गया है कि इससे इकाइयों को बिजली राज्यों को बेचने में मदद मिलेगी, जो 25 साल के बजाय 4-5 साल के लिए बिजली खरीद समझौता करना चाहते हैं। 

एसोसिएशन आफ पावर प्रोड्यूसर्स (एएपी) के महानिदेशक एके खुराना ने कहा कि कोल इंडिया के साथ हुए कोयला खरीद समझौते से कोयला उपलब्ध न होने की स्थिति में ई नीलामी से कोयला खरीद पर आने वाली अतिरिक्त लागत का बोझ हटाने के मसले पर हमारी मांग को लेकर समिति ने कुछ भी नहीं कहा है। यह मांग 20 महीने से लंबित है। उन्होंने कहा, 'कोयले की बढ़ती कमी को पूरा करने के लिए यह जरूरी है। इसमें देरी होन से तय लागत पर घाटा बढ़ेगा और कर्ज भुगतान बाध्यता को पूरा करने की क्षमता प्रभावित होगी।' 

बिजली की बिक्री में सुधार के सिलसिले में रिपोर्ट में पुराने और अप्रभावी ताप बिजली संयंत्रोंं, की बिक्री, संयंत्र लगाने में देरी की स्थिति में पीपीए रद्द न किए जाने जैसे सुझाव दिए गए हैं। बहरहाल इसमें वितरण कंपनियों की कार्ययोजना को लेकर कोई संकेत नहीं दिए गए हैं। 

भुगतान सुरक्षा सुनिश्चित करने के  लिए समिति ने सलाह दी है कि पीएफसी और आरईसी जैसे वित्तीय संस्थानों (एफआई) को बिल डिस्काउंटिंग सुविधा देनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि डिस्कॉम की तरफ से चूक के मामलों में रिजर्व बैंक राज्यों के खाते से बकाये की वसूली कर सकता है और एफआई को भुगतान कर सकता है। इस समय यह सुविधा सरकारी कंपनियों जैसे एनटीपीसी के लिए उपलब्ध है।

समिति ने बिजली मंत्रालय से कहा है कि त्रिपक्षीय समझौते (टीपीए) की रूपरेखा तैयार की जानी चाहिए। भारतीय स्टेट बैंक जैसे बैंक भी मौजूदा एफआरएसी व्यवस्था के तहत डिस्काउंटिंग समझौते की जांच कर सकेंगे। 

बिजली मंत्रालय को यह भी कहा गया है कि वह नियामकों के साथ काम करे, जिसे यह सुनिश्चित हो सके कि देर से भुगतान पर लगने वाले अधिभार का भुगतान अनिवार्य है। खुराना ने कहा कि इन सिफारिशों से दबाव कम करने में मदद मिलेगी, हालांकि इसके लिए कोई समय सीमा नहीं तय की गई है। उन्होंने कहा, 'समय से सिफारिशें लागू हों, यह सुनिश्चित करने के लिए इन सिफारिशों को लागू करने की एक समयावधि तय की जानी चाहिए। इससे सिफारिशों को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी।' 
Keyword: Power, HLEC, Discom, NTPC, Power Ministry, AAP, Coal India, Reserve Bank, TPA,
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