बिजनेस स्टैंडर्ड - अदालत के फैसले से बिनानी के पूर्व प्रवर्तकों को राहत
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अदालत के फैसले से बिनानी के पूर्व प्रवर्तकों को राहत

अभिषेक रक्षित / कोलकाता 11 21, 2018

मिली राहत

एग्जिम बैंक और एसबीआई हॉन्गकॉन्ग आदि के लिए बिनानी गारंटर थी 

अगर डालमिया भारत का प्रस्ताव मंजूर हो जाता तो दोनों बैंक बिनानी के कॉरपोरेट बैंक गारंटी को भुनाकर अपना बकाया वसूलने की कोशिश करते

दिवालिया प्रक्रिया पूरा होने और भुगतान किए जाने के बाद भी लेनदार अपने बकाए की वसूली के लिए गारंटर पर मुकदमा कर सकते हैं

बिजनेस स्टैंडर्ड अदालत के फैसले से बिनानी के पूर्व प्रवर्तकों को राहतअल्ट्राटेक सीमेंट को दबाव वाली बिनानी सीमेंट की परिसंपत्तियां अधिग्रहीत करने की अनुमति देने वाला सर्वोच्च न्यायालय का फैसला न सिर्फ आदित्य बिड़ला समूह को उत्तर भारत में श्री सीमेंट की तरह अग्रणी बनने के लिहाज से वरदान की तरह है बल्कि बिनानी सीमेंट के प्रवर्तक ब्रज बिनानी के लिए भी काफी लाभकारी है। 

एग्जिम बैंक और एसबीआई हॉन्गकॉन्ग आदि के लिए बिनानी गारंटर थी। डालमिया भारत की अगुआई वाले कंसोर्टियम के प्रस्ताव के तहत एग्जिम बैंक को 6.2 अरब रुपये के दावे का 72.59 फीसदी मिलता, वहीं एसबीआई हॉन्गकॉन्ग को 37 करोड़ रुपये के दावे का 10 फीसदी हासिल होता।

सूत्रों ने कहा कि अगर डालमिया भारत का प्रस्ताव मंजूर हो जाता तो दोनों बैंक बिनानी के कॉरपोरेट बैंक गारंटी को भुनाकर अपना बकाया वसूलने की कोशिश करते। सूत्रों ने कहा, अगर ऐसा होता तो बिनानी को इन बैंकों की बाकी रकम चुकानी होती। लेनदारों ने कहा कि दिवालिया प्रक्रिया पूरा होने और भुगतान किए जाने के बाद भी लेनदार अपने बकाए की वसूली के लिए गारंटर पर मुकदमा कर सकते हैं।

बिनानी सीमेंट के लेनदार के मुताबिक, अधिग्रहण के बाद कंपनी के प्रवर्तकों का ढांचा हालांकि बदल जाता है, लेकिन गारंटी भुनाई जा सकती है क्योंकि गारंटी किसी व्यक्ति की होती है, न कि कंपनी के पोर्टफोलियो या पोजीशन की। सूत्रों ने कहा, अल्ट्राटेक की योजना के तहत दोनों बैंकों को ब्याज समेत पूरा भुगतान किया गया, जो इन बैंकों की तरफ से बाद में बिनानी पर मुकदमा चलाने की संभावना को खत्म कर देता है।

अन्य बैंक आईडीबीआई बैंक (दुबई शाखा), बैंक ऑफ बड़ौदा की लंदन शाखा, एसबीआई व सिंडिकेट बैंक की बहरीन शाखा को डालमिया भारत व अल्ट्राटेक ने पूरा भुगतान का वादा किया था, जिसने बिनानी के खिलाफ इन बैंकों की तरफ से किसी मुददमे की संभावना खत्म कर दी।

इसके अतिरिक्त परिचालक लेनदारों को भी अल्ट्राटेक की योजना के तहत पूरा भुगतान किया गया, जिसके बाद ब्रज बिनानी से बकाया वसूली के लिए लेनदारों की तरफ से किसी तरह की गुंजाइश नहीं बचती। परिचालक लेनदारों के स्वीकार्य दावे 4.43 अरब रुपये थे और अल्ट्राटेक ने पूरा भुगतान किया। हालांकि डालमिया भारत की योजना में इन दावों का सिर्फ 35 फीसदी मिलते।

डालमिया भारत के कंसोर्टियम की योजना को सीओसी की मंजूरी के बाद बिनानी सीमेंट इस चयन और सीओसी की प्रक्रिया का इस आधार पर विरोध कर रही थी कि परिसंपत्तियों की कीमत कम लगाई गई है और सीओसी की बैठक में बिनानी सीमेंट के प्रतिनिधियों के साथ भेदभाव किया गया। इसने लेनदारों के साथ अदालत से बाहर निपटान पर भी काम किया था, जिसे अल्ट्राटेक का वित्तीय समर्थन हासिल था। 

बिनानी सीमेंट को हालांकि एनसीएलटी के कोलकाता पीठ से अनुकूल निर्देश मिल गया, जिसने इसके ज्यादातर आरोपों पर ध्यान दिया, लेकिन एनसीएलएटी ने अदालत से बाहर मामला निपटाने की अनुमति नहीं दी। पहले डालमिया भारत सबसे ऊंची बोलीदाता करार दी गई थी, लेकिन बाद में अल्ट्राटेक पहले पायदान पर पहुंची और अंतत: 20 नवंबर को अधिग्रहण पूरा कर लिया।

दूसरी ओर, अधिग्रहण के बाद अल्ट्राटेक की क्षमता उत्तर भारत में बढ़कर 2.4 करोड़ टन हो गई, जो श्री सीमेंट के करीब-करीब बराबर है। सेंट्रम ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, आदित्य बिड़ला समूह की फर्म की क्षमता हिस्सेदारी मौजूदा 17 फीसदी से बढ़कर 24 फीसदी हो जाएगी। अल्ट्राटेक व श्रीसीमेंट के पास अब उत्तर भारत में कुल स्थापित क्षमता का करीब 45 फीसदी है। 

1 करोड़ टन क्षमता के साथ अंबुजा सीमेंट इस इलाके में तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है और इसके बाद जेके  लक्ष्मी और जेके सीमेंट का स्थान है। एक बयान में अल्ट्राटेक ने कहा कि इसने अधिग्रहीत बाजारों का एकीकरण उत्तर भारत व पश्चिमी क्षेत्र के परिचालन के साथ कर दिया है। अवरपुर संयंत्र के पूर्व प्रमुख जी बालासुब्रमण्यम को बिनानी की एकीकृत सीमेंट इकाई का प्रमुख बना दिया गया है।

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