बिजनेस स्टैंडर्ड - चमड़ा महंगा होने से जूता कंपनियों के मार्जिन पर असर
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चमड़ा महंगा होने से जूता कंपनियों के मार्जिन पर असर

नम्रता आचार्य / कोलकाता November 20, 2018

 उत्तर प्रदेश में चमड़ा कारखाने बंद होने से चमड़े की कीमतों में बढ़ोतरी और रुपये में गिरावट से आयात की लागत बढऩे से जूते बनाने वालों के मार्जिन पर असर पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सोमवार को जाजमऊ और कानपुर में 296 चमड़ा कारखानों को बंद करने का आदेश दिया। कानपुर देश में चमड़े के सबसे बड़े केंद्रों में से एक है।

चमड़ा निर्यात परिषद के अध्यक्ष जावेद इकबाल ने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान जाजमऊ में करीब 150 चमड़ा कारखाने बंद हो चुके हैं। इस समय इस क्षेत्र में करीब 296 इकाइयां चल रही हैं, जो दो साल पहले करीब 446 थीं। हाल की कार्रवाई से जाजमऊ चमड़ा केंद्र लगभग खत्म हो जाएगा।  उद्योग के सूत्रों के मुताबिक जूते बनाने वाली कंपनियां अगले कुछ महीनों में कीमतें बढ़ाने के बारे में विचार कर रही हैं क्योंकि चमड़े की कीमतें पिछले एक साल से लगातार बढ़ रही हैं। 

बिना चमड़े के बनाए जाने वाले जूतों के लिए रबर जैसे अन्य कच्चे माल का आयात किया जाता है। ऐसे में रुपये में गिरावट से बिना चमड़े के बनने वाले जूतों की लागत भी बढ़ रही है। भारतीय चमड़ा उत्पाद संघ (आईएलपीए) के क्षेत्रीय प्रमुख रमेश कुमार जुनेजा के मुताबिक पिछले छह महीनों के दौरान चमड़े की कीमतें करीब 15 फीसदी बढ़ी हैं, जबकि पिछले एक साल में दाम करीब 30 फीसदी बढ़े हैं। भारत में चमड़े की करीब 30 से 35 फीसदी जरूरत आयात से पूरी होती है। 

चमड़ा निर्यात परिषद के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2016-17 और 2017-18 के बीच निर्यात होने वाले चमड़ा उत्पादों का घरेलू उत्पादन मूल्य के हिसाब से 50 अरब रुपये घटा है। वुडलैंड के प्रबंध निदेशक हरकीरत सिंह के मुताबिक कच्चे माल की लागत बढऩे के कारण वुडलैंड का मार्जिन पिछले एक साल में 8 से 10 फीसदी कम हो गया है।

हालांकि ग्राहकों के लिए उत्पादों की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं।  सिंह ने कहा, 'रुपये में गिरावट का सीधा असर चमड़ा उत्पादों के आयात की लागत पर दिख रहा है। चमड़े के कारखाने बंद होने से लागत और बढ़ी है। हमारा खुद का चमड़े का कारखाना पंजाब में है, जिससे हमें कुछ हद तक मांग पूरी करने में मदद मिली है।

हम आम तौर पर एक साल तक लागत में बढ़ोतरी का बोझ खुद वहन करने की कोशिश करते हैं। लेकिन उसके बाद में हमें ग्राहकों के लिए उत्पादों के दाम बढ़ाने के बारे में फैसला लेना पड़ता है। हम अपने उत्पादों में वैकिल्पक उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं, जो चमड़े के समान ही बढिय़ा हैं। हम जनवरी के अंत तक कीमतें बढ़ाने के बारे में फैसला लेंगे।'

कोलकाता में जूतों की विनिर्माता कंपनी खादिम पर भी कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पड़ा है। इससे कंपनी का मार्जिन घट गया है। आनंद राठी की हाल की एक अनुसंधान रिपोर्ट के मुताबिक कच्चे माल की ऊंची लागतों और कम खुदरा मांग से कंपनी का मार्जिन घट गया है। 

आनंठ राठी की अनुसंधान रिपोर्ट के मुताबिक, 'खादिम का राजस्व वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में करीब 31 फीसदी घटकर 226.4 करोड़ रुपये रहा, जो हमारे अनुमान से थोड़ा कम है। कच्चे माल की ऊंची कीमतों और खुदरा बिक्री में सालाना आधार पर 7 फीसदी की सुस्त वृद्धि से सकल मार्जिन सालाना आधार पर 392 आधार अंक घटा है। 

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