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जहाजरानी मंत्रालय की बजट बढ़ाने की मांग

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली November 20, 2018

इस समय बड़े पैमाने पर खर्च की जरूरतों को देखते हुए केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से बजट आवंटन बढ़ाकर 2,350 करोड़ रुपये करने की मांग की है, जो पिछले साल के बजट से 25 प्रतिशत ज्यादा है। प्राथमिक रूप से इसका इस्तेमाल अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाओं की जरूरतों के लिए होगा, जिसके लिए बड़े पैमाने पर वित्त पोषण की जरूरत है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'आवंटन का बड़ा हिस्सा अंतर्देशीय जलमार्ग कार्यक्रम पर खर्च किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य जलमार्ग परियोजना को स्वच्छ और प्रभावी परिवहन व्यवस्था के रूप में पेश करना है।' शेष राशि महत्त्वाकांक्षी सागरमाला कार्यक्रम के तहज बंदरगाह आधारित प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष विकास और सामान की आवाजाही के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने पर खर्च की जाएगी, जिससे कि तेज, प्रभावी और कम लागत पर परिवहन सुविधा मिल सके।

2018-19 में जहाजरानी मंत्रालय के लिए बजट आवंटन 1,881 करोड़ रुपये था, जिसमें से करीब एक चौथाई 504 करोड़ रुपये अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन परियोजना को लागू करने के लिए रखा गया था। 

2017-18 में जहाजरानी मंत्रालय के लिए बजट आवंटन 1,773 करोड़ रुपये था और इसमें से जलमार्ग के लिे 351 करोड़ रुपये दिया गया था। 2017-18 के पुनरीक्षित अनुमान में मंत्रालय का आवंटन घटाकर 1,568 करोड़ रुपये कर दिया गया, जबकि जलमार्ग परियोजना के लिए धन बढ़ाकर 477 करोड़ रुपये कर दिया गया था।

इसके अलावा संसद ने केंद्रीय सड़क कोष अधिनियम में संशोधन दिसंबर 2017 में पारित किया था, जिसमें राष्ट्रीय जलमार्गों के फंड की हिस्सेदारी 2.5 प्रतिशत बढ़ा दी गई थी।  हाई स्पीड पेट्रोल और डीजल पर संग्रह किए जाने वाले उपकर से केंद्रीय सड़क निधि बनाई गई थी, जो राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों को विकसित करने के लिए था।

संशोधन के बाद कोष से राष्ट्रीय राजमार्गों की हिस्सेदारी 41.5 प्रतिशत से घटकर 39 प्रतिशत रह गई। दिसंबर 2015 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्रीय कानून को मंजूरी दी थी और इसके माध्यम से 111 अंतर्देशीय जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया गया था, जिसमें 5 मौजूदा जलमार्ग शामिल हैं।

इन राष्ट्रीय जलमार्गों की घोषणा के बाद भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण शिपिंग और नेविगेशन के लिए व्यावहारिक खंडों को विकसित करेगा। जल के इस्तेमाल, नदी के किनारों और इससे जुड़ी जमीन पर राज्य सरकार का अधिकार बना रहेगा। उद्योग के अनुमान के मुताबिक जलमार्ग परिवहन को सबसे ज्यादा लागत प्रभावी और ईंधन के इस्तेमाल के हिसाब से परिवहन का सस्ता साधन माना जाता है।

विश्व बैंक के एक अध्ययन के मुताबिक एक लीटर ईंधन से जलमार्ग से 105 टन माल एक किलोमीटर तक ले जाया जा सकता है। वहीं इतने ईंधन से रेलमार्ग से सिर्फ 85 टन और सड़क मार्ग से 24 टन माल ले जाना संभव है। 

Keyword: Finance ministry, Waterways, High speed petrol, Diesel,
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