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अग्रिम कर आदेश से कंपनियां चिंतित

देवाशिष महापात्र / बेंगलूरु November 20, 2018

कर अधिकारियों के एक हालिया अग्रिम आदेश के तहत किसी कंपनी द्वारा वैश्विक कंपनियों को दी जाने वाली बैक-ऑफिस सेवाओं को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में ला दिया है। इससे सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एवं बिजनेस प्रॉसेस आउटसोर्सिंग उद्योग को जबरदस्त झटका लगा है। हालांकि नैशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) ने इसका जबरदस्त विरोध करते हुए स्पष्टीकरण की मांग की है लेकिन कर विशेषज्ञों का कहना है कि इससे आने वाले दिनों में मुकदमेबाजी को बढ़ावा मिलेगा।

हालांकि अग्रिम आदेश केवल आवेदक पक्ष पर लागू होता है और उसे भविष्य के नियमों का मिसाल नहीं माना जा सकता है। लेकिन आईटी/आईटी समर्थ सेवाएं (आईटीईएस) उद्योग इस बात से चिंतित है कि इस आदेश की व्याख्या से आईटी क्षेत्र को मौजूदा कर लाभ का नुकसान हो सकता है क्योंकि उसकी सेवाओं को निर्यात की श्रेणी में रखा गया है।

नैसकॉम ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा, 'अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग्स (एएआर) के हालिया आदेश- एम/एस वीसर्वग्लोबल मामले में- से उद्योग अचंभित है क्योंकि इसके तहत खुद के ग्राहकों को मुहैया कराई जाने वाली सेवाओं को मध्यस्थ सेवा की श्रेणी में रखा गया है।' उद्योग संगठन ने कहा, 'इससे बेवजह विवाद पैदा होगा और निर्यात के मामले में अनिश्चितता पैदा होगी क्योंकि जीएसटी के तहत जब किसी सेवा को मध्यस्थ करार दिया जाता है तो उसे निर्यात की श्रेणी में नहीं रखा जाता।'

एएआर के आदेश के अनुसार, बैक-ऑफिस सेवाओं को मध्यस्थ सेवाओं की श्रेणी में रखा जा सकता है न कि निर्यात की श्रेणी में। इसका मतलब साफ है कि सभी आईटी सेवा कंपनियां एवं बिजनेस प्रॉसेस मैनेजमेंट फर्म और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के वैश्विक इन-हाउस केंद्रों (जीआईसी) को अब उनकी सेवाओं पर 18 फीसदी जीएसटी का भुगतान करना पड़ेगा।

नैसकॉम ने कहा, 'यदि इस आदेश की जटिलताओं को उपयुक्त तरीके से स्पष्ट नहीं किया गया तो यह वैश्विक बाजार में कंपनियों को गैर प्रतिस्पर्धी बना देगा जिससे राजस्व, रोजगार और ग्राहकों का नुकसान हो सकता है।' कानून विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि यह आदेश एक अग्रिम फैसला है लेकिन सेवाओं के वर्गीकरण में स्पष्टïता का अभाव होने से आईटी उद्योग में भ्रम पैदा होगा।

वैश्विक ऑडिट फर्म ईवाई के पार्टनर (कर एवं नियामकीय सेवाएं) ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने कहा, 'मध्यस्थ सेवा अनुबंध के मामले में आमतौर पर तीन पक्ष शामिल होते हैं। अब यदि आईटी सेवा क्षेत्र में काम करने वाली कोई कंपनी त्रिपक्षीय अनुबंध करती है तो उसकी सेवा को मध्यस्थ सेवाओं की श्रेणी में रखा जा सकता है और वह कराधान के दायरे में होगी।' हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस आदेश के खिलाफ कानूनी उपचार का विकल्प खुला है।

Keyword: GST, IT, Outsourcing, nasscom, IT, Information Technology,
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