बिजनेस स्टैंडर्ड - नियमों में ढील से बैंकों को राहत
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नियमों में ढील से बैंकों को राहत

निकहत हेटावकर और अभिजित लेले / मुंबई 11 20, 2018

पूंजी पर्याप्तता नियम : समयसीमा एक साल तक बढ़ी

आरबीआई के निर्णय से बैंकों के पास कर्ज के लिए ज्यादा पूंजी, सरकार को भी राहत
पूंजी नियमों में नरमी से बैंक करीब 3 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त कर्ज देने में होंगे सक्षम
बैंकों में पूंजी डालने से सरकार को राहत, बचेंगे करीब 350 अरब रुपये
25 करोड़ रुपये तक के कर्ज पुनर्गठन प्रस्ताव से एमएसएमई क्षेत्र को मिलेगी राहत

बिजनेस स्टैंडर्ड नियमों में ढील से बैंकों को राहतभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से पूंजी पर्याप्तता नियमों की समयसीमा बढ़ाने से घरेलू बैंक अगले वित्त वर्ष के अंत तक 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त कर्ज देने में सक्षम होंगे। पूंजी पर्याप्तता नियम के एक प्रावधान में ढील दिए जाने से सरकार को भी अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपेक्षाकृत कम पूंजी डालने की जरूरत होगी। सूत्रों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में इससे सरकार को करीब 350 अरब रुपये की बचत होने की उम्मीद है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रम (एमएसएमई) के 25 करोड़ रुपये तक के कर्ज के प्रस्तावित पुनर्गठन पैकेज से इस क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने के आसार हैं। नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की वजह से इस क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ा है। इसके अलावा बैंकों को भी फंसे कर्ज पर प्रावधान के बोझ को कुछ कम करने में मदद मिलेगी। 

आरबीआई बोर्ड की सोमवार को नौ घंटे तक चली मैराथन बैठक में घोषणा की गई कि बैंकों के लिए पूंजी संरक्षण बफर बनाने की समयसीमा एक साल तक बढ़ाई जाएगी। अभी बैंकों को 31 मार्च, 2020 तक पूंजी बफर (सीसीबी) के अंतर्गत 0.625 फीसदी पूंजी जुटानी है।

आरबीआई बोर्ड सदस्य ने बताया कि बैंकों के पास ज्यादा कर्ज देने के लिए समुचित संसाधन (जमा) हैं लेकिन उन्हें एक दायरे में रहना होगा क्योंकि बैंकों को सीसीबी तैयार करना है। हर साल पूंजी पर्याप्तता अनुपात में इसमें थोड़ी-थोड़ी वृद्घि होती है। उन्होंने कहा, 'केंद्रीय बैंक के नियमों का उल्लंघन किए बिना पूंजी पर्याप्तता अनुपात में कुछ ढील दिया जाना संभव है।'

उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में उधारी मांग बढऩे के दौरान बैंकों के पास अब कम से कम तीन लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त कर्ज देने की सहूलियत होगी। इसके साथ ही सीसीबी को आगे बढ़ाए जाने से बैंकों में पूंजी डालने पर सरकार को राहत मिलेगी और करीब 350 अरब रुपये फिलहाल बच सकते हैं।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के वरिष्ठ निदेशक कृष्णन सीतारामन ने सरकार के लिए पूंजीगत बचत के संदर्भ में कहा कि सार्वजनिक बैंकों को 2018-19 के अंत तक 1.2 लाख करोड़ रुपये की कुल पूंजी जरूरत है। सीतारामन ने कहा, 'पूंजी अनुपात हासिल करने के लिए दिए गए अतिरिक्त समय के चलते 350 अरब रुपये कम  पूंजी की जरूरत पड़ेगी। यह पहलू कई सार्वजनिक बैंकों को राहत देता है क्योंकि फंसे कर्ज की समस्या से ग्रस्त बाजार से पूंजी जुटाना काफी मुश्किल हो सकता है।'

जहां आरबीआई और सरकार कर्ज की कमी से जूझ रहे उद्योग जगत के लिए इस कदम को काफी लाभदायक मान रहे हैं वहीं बैंकों एवं रेटिंग एजेंसियां इससे अधिक उत्साहित नहीं हैं। भारतीय बैंकों के संगठन आईबीए के मुख्य कार्यकारी वी जी कन्नन का मानना है कि शुरुआती आकलनों से थोड़ी राहत की उम्मीद बंधती है। कन्नन ने कहा, 'सरकार को इस साल सार्वजनिक बैंकों में कम पूंजी डालनी होगी लेकिन अगले वित्त वर्ष में इसके लिए प्रावधान करना होगा।'         

मुंबई स्थित एक मध्यम-स्तरीय कर्जदाता संस्थान के पूर्णकालिक निदेशक की नजर में यह कदम सकारात्मक है लेकिन कुछ बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी की कमी हो सकती है। बैंकों के पास अपेक्षित पूंजी न होने से भविष्य में ऋण गुणवत्ता प्रभावित होने पर अधिक तनाव झेल पाने की उनकी क्षमता कम हो जाएगी। 

वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने आरबीआई के फैसले पर निराशा जताते हुए कहा कि समयसीमा बढ़ाने का फैसला सार्वजनिक बैंकों के लिए कर्ज के मामले में नकारात्मक ही है।  मूडीज की भारतीय इकाई इक्रा का मानना है कि पूंजीगत मानकों में ढील देने से बैंकों को बहुत कम फायदा ही होगा। इसकी वजह यह है कि कई बैंक बुनियादी पूंजीगत अनुपात को 9 फीसदी तक सीमित रखने में ही जद्दोजहद कर रहे हैं।

ऐसे में संक्रमण अवधि को बढ़ाने का फैसला कुछ बैंकों के लिए ही फायदेमंद होगा। केयर रेटिंग्स का कहना है कि कर्ज पुनर्गठन योजना और पूंजी पर्याप्तता के कदमों से तरलता की स्थिति सुधरेगी क्योंकि बैंक एसएमई क्षेत्र में फंसे कर्ज का पुनर्गठन कर अधिक कर्ज बांट पाएंगे।

Keyword: Bank, Banking, Rating agency, Moody, ICRA, RBI, MSME, GST. Demonetization, RBI Board, CCB,
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