बिजनेस स्टैंडर्ड - गतिरोध हुआ खत्म..बन गई बात!
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, December 12, 2018 06:02 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

गतिरोध हुआ खत्म..बन गई बात!

बीएस संवाददाता और एजेंसियां / मुंबई 11 19, 2018

'सौहार्दपूर्ण' माहौल में नौ घंटे तक चली मैराथन बैठक

तरलता सुधारने, पीसीए में ढील और अधिशेष हस्तांतरण की समीक्षा पर बनी सहमति
पीसीए पर कुछ सार्वजनिक बैंकों को मिल सकती है राहत
तरलता की स्थिति सुधारने के होंगे उपाय
एमएसएमई के कर्ज पुनर्गठन की इजाजत पर बनी सहमति

बिजनेस स्टैंडर्ड गतिरोध हुआ खत्म..बन गई बात!भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सरकार के बीच कई दिनों से जारी खींचतान के बीच सोमवार को हुई आरबीआई बोर्ड की मैराथन बैठक में कई विवादित मुद्दों पर सहमति बनी जिससे तरलता सुधारने और सार्वजनिक बैंकों पर लगी पाबंदियां शिथिल करने का रास्ता साफ हो सकता है।  आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड ने त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई (पीसीए) संबंधी प्रावधान को लेकर कुछ सार्वजनिक बैंकों को ढील देने का फैसला किया है। इसके अलावा आरबीआई के पास रखे अधिशेष के सरकार को स्थानांतरण की समीक्षा करने पर भी बोर्ड ने सहमति जताई है। इसके लिए आरबीआई एक पैनल का गठन करेगा। आरबीआई सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम इकाइयों (एमएसएमई) के लिए कर्ज के पुनर्गठन की भी इजाजत देने पर तैयार हो गया है।

एक सूत्र ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच कई दिनों से चल रही खींचतान के बावजूद यह बैठक सौहार्दपूर्ण अंदाज में संपन्न हुई। बोर्ड की 23 अक्टूबर को हुई पिछली बैठक में कोई नतीजा नहीं निकल पाया था।  करीब नौ घंटे तक चली इस बैठक को इस रूप में देखा जा रहा था कि मौद्रिक एवं बैंकिंग नीतियों से संबंधित मामलों में आरबीआई या सरकार में से किसकी चलती है? सरकार हमेशा ही नीतिगत मसलों पर अपनी बात को तवज्जो दिए जाने की मांग करती रही है लेकिन आरबीआई इसे नजरअंदाज करता रहा है। लेकिन इस बार यह गतिरोध उस समय बढ़ गया जब आरबीआई ने बिजली क्षेत्र की कर्जदार कंपनियों के बारे में गठित मंत्रिमंडलीय समिति को नजरअंदाज कर दिया। यहां तक कि उस बैठक में आरबीआई ने अपना कोई प्रतिनिधि भी नहीं भेजा था।

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य की सरकार के बारे में की गई आलोचनात्मक टिप्पणी ने भी स्थिति बिगाडऩे का काम किया। वहीं सरकार की तरफ से भी आरबीआई अधिनियम की धारा 7 का आंशिक तौर पर इस्तेमाल करते हुए गवर्नर ऊर्जित पटेल को चर्चा के लिए करीब दर्जन भर मुद्दे भेजे गए।

केंद्रीय बैंक वर्षों से अपने पास संचित किए गए आरक्षित कोष को भी बचाना चाहता है। लेकिन सरकार इसे अपने इस्तेमाल के लिए मुक्त कराना चाहती है। चुनावी साल में सरकार द्वारा आरबीआई के अधिशेष को हासिल करने के प्रयास को कई विश्लेषकों ने आलोचना की है। लेकिन सरकार का कहना है कि आरबीआई को इतनी आरक्षित रकम की जरूरत नहीं है।  ऐसा माना जा रहा था कि आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग, वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार और गैर-आधिकारिक निदेशक एस गुरुमूर्ति सरकार की ओर से लामबंदी कर सकते हैं। सरकार के रुख पर कुछ स्वतंत्र निदेशकों से भी समर्थन मिलने की उम्मीद थी।

बोर्ड में आरबीआई के प्रतिनिधियों में गवर्नर ऊर्जित पटेल और चार डिप्टी गनर्वर शामिल हैं।  दोनों पक्षों के बीच पीसीए प्रारूप को लेकर मुख्य विवाद है। पीसीए में पहले से ही 11 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शामिल हैं, जिनके कर्ज देने पर बंदिशें लगी हुई हैं। सरकार चाहती है कि आरबीआई पीसीए नियमों में ढील दे और उसे अंतरराष्ट्रीय मानदंड के अनुरूप बनाए।

Keyword: RBI, viral acharya, urjit patel, fund, bank,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या विधानसभा चुनावों में हार हैं मोदी लहर के थमने के संकेत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.