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कर्ज का पुनर्गठन कर सकती है जेट

देव चटर्जी / मुंबई November 19, 2018

अगर निकट भविष्य में जेट एयरवेज को निवेश नहीं मिलता और कंपनी परिसंपत्ति बेचने में नाकाम रहती है तो सालाना 9 अरब रुपये ब्याज चुकाने वाली जेट एयरवेज को लेनदारों के साथ कर्ज का पुनर्गठन करना होगा। मार्च 2018 के आखिर में कंपनी का एकीकृत कर्ज 84 अरब रुपये था और विश्लेषकों का कहना है कि अगले साल मार्च तक उसे 20 अरब रुपये के कर्ज का पुनर्भुगतान करना है। एक सूत्र ने कहा, बैंकों को चिंता हो रही है कि अगर टाटा फैसला लेने में देर करती है तो जेट को अपनी परिसंपत्ति तेजी से बेचनी होगी या फिर कर्ज का पुनर्गठन करना होगा। लेकिन कर्ज पुनर्गठन को कई अवरोध का सामना करना होगा। पहला, कर्ज पुनर्गठन की योजना को जेट के बैंकों की 100 फीसदी वोटिंग की जरूरत पड़ेगी क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक के 12 फरवरी के परिपत्र ने कर्ज पुनर्गठन की किसी योजना के लिए लेनदारों की 100 फीसदी वोटिंग को अनिवार्य बना दिया है।
 
दूसरा, पुनर्गठन योजना की जांच दो क्रेडिट रेटिंग एजेंसी से जरूरी होगी और इस योजना को प्रवर्तकों की व्यक्तिगत गारंटी की भी दरकार होगी। इसके अलावा विमानन कंपनी को कर्ज पुनर्गठन की मंजूरी के लिए फॉरेंसिक ऑडिट से गुजरना होगा। 12 फरवरी से कुल मिलाकर कर्ज पुनर्गठन पर विराम लगा हुआ है। एक बैंकर ने कहा, कर्ज पुनर्गठन पैकेज की मंजूरी और दिवालिया संहिता के तहत कर्ज समाधान के लिए एनसीएलटी भेजे जाने का मामला काफी करीब का हो सकता है। कर्ज के भुगतान में कंपनी ने अभी तक चूक नहीं की है, लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया का बकाया इसने नहीं चुकाया है।
 
मुंबई के लेनदार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जेट एयरवेज के अस्तित्व की खातिर लेनदारों के लिए कर्ज को बट्टे खाते में डालने का मामला अहम होगा। लेकिन यह सिर्फ बैंकों से ही एकल पैकेज नहीं हो सकता। यह पूछे जाने पर कि क्या यह पैकेज एनसीएलटी के तहत हो सकता है, बैंकर ने कहा कि इस तरह के फैसले के लिहाज से अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। विश्लेषकों ने कहा कि विमानन कंपनी को र्ईंधन की बढ़ती कीमतें और कमजोर रुपये से चोट पहुंची है। 84 अरब रुपये के कर्ज का 60 फीसदी डॉलर वाला कर्ज है, जो चीजों को और खराब कर रहा है।
 
एडलवाइस सिक्योरिटीज के विश्लेषक जे. इरानी ने कहा, हमारा मानना है कि कर्ज पुनर्भुगतान समेत जेट को विमानों के परिचालन के लिए अगली कुछ तिमाहियों में कम से कम 50 अरब रुपये की दरकार होगी, लेकिन विमान बिक्री व लीजबैक/लॉयल्टी प्रोग्राम की हिस्सा बिक्री से अधिकतम 36 अरब रुपये की व्यवस्था हो सकती है। ऐसे में कारोबार के संचालन के लिए निवेश की दरकार होगी। जेट ने कहा है कि वह लॉयल्टी प्रोग्राम की हिस्सेदारी बेचकर और छह विमान बेचकर रकम जुटा सकती है। साल 2013 में एतिहाद को 50.1 फीसदी लॉयल्टी प्रोग्राम की हिस्सेदारी बिक्री के मुकाबले अभी इसकी हिस्सेदारी बेचकर इसे ज्यादा रकम मिल सकती है क्योंंकि सदस्यों की संख्या तीन गुना बढ़कर 85 लाख हो गई है। इरानी ने कहा, अगर हम 75 करोड़ डॉलर के मूल्यांकन पर विचार करें तो जेट को मौजूदा विनिमय दर पर 27 अरब रुपये मिल सकते हैं।
 
हालांकि विश्लेषकों ने यह भी कहा कि जिन छह विमानों की बिक्री होनी है उसकी कीमत कंपनी ने 17 अरब रुपये रखी है, लेकिन बोइंग नई 777 एक्स विमान उतार रही है, ऐसे में पुरानी बोइंग की मांग कम रहेगी। इस तरह से विमानन कंपनी को करीब 8.6 अरब रुपये मिल सकते हैं क्योंकि इसके विमान नौ साल पुराने हैं। इरानी ने चेतावनी देते हुए कहा, कर्ज भुगतान पर किसी तरह के डिफॉल्ट से लेनदार कंपनी को एनसीएलटी में घसीट लेंगे, जिससे परिचालन बंद होने का खतरा है। 
 
(साथ में अभिजित लेले)
Keyword: aviation, flight, airport, jet airways,,
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