बिजनेस स्टैंडर्ड - आधार प्रभाव का दबदबा
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आधार प्रभाव का दबदबा

संपादकीय /  November 19, 2018

जुलाई-सितंबर 2018 तिमाही के दौरान देश के कारोबारी जगत का प्रदर्शन पहली नजर में  अच्छा नजर आता है। 1,889 कंपनियों का समेकित शुद्घ लाभ सालाना आधार पर 16 फीसदी बढ़ा। इसी आधार पर इनका समेकित राजस्व 19.6 फीसदी बढ़ा। यह पिछले तीन वर्ष का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। परंतु अगर आधार प्रभाव पर विचार किया जाए तो ये आंकड़े कम प्रभावी नजर आते हैं। कुछ बड़े कारोबारी घरानों के मजबूत प्रदर्शन ने भी कुल नतीजों पर असर डाला है। आधार प्रभाव एकदम स्पष्ट थे। एक वर्ष पूर्व इसी अवधि में शुद्घ लाभ 11 फीसदी कम था क्योंकि वस्तु एवं सेवा कर की शुरुआत की वजह से उनको कुछ शुरुआती समस्याएं हुईं। इस दौरान सालाना आधार पर समेकित राजस्व भी 14.9 फीसदी कम था। 

 
वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में समेकित राजस्व वृद्घि का करीब 60 फीसदी हिस्सा तेल एवं गैस क्षेत्र तथा धातु एवं खनन क्षेत्र से आया। रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत ऊर्जा क्षेत्र की कंपनियों की समेकित बिक्री सालाना  आधार पर 48 फीसदी अधिक रही जबकि धातु और खनन कंपनियों की शुद्घ बिक्री 23 फीसदी अधिक थी। यह प्रदर्शन ऊर्जा और धातु क्षेत्र की वैश्विक जिंस कीमतों में उछाल की वजह से रहा। धातु और खनन क्षेत्र 151 फीसदी की आय वृद्घि के साथ इस क्षेत्र के शुद्घ लाभ में शीर्ष पर रहे। कोल इंडिया के मुनाफे में 700 फीसदी से अधिक की वृद्घि देखने को मिली। टाटा स्टील ने परिचालन लाभ में 90 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दिखाई। इसके विपरीत सीमेंट, वाहन, वाहन-कलपुर्जे, टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं, विमानन कंपनियां और मीडिया तथा मनोरंजन क्षेत्र में अनुमान से कम वृद्घि रही। घरेलू विनिर्माण क्षेत्र की आय में नकारात्मकता देखने को मिली क्योंकि उस पर कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत का दबाव था। घरेलू विनिर्माण क्षेत्र के लिए परिचालन मार्जिन सालाना आधार पर 150 आधार अंक था क्योंकि कच्चे माल और ईंधन की लागत बढ़ी हुई थी। यह बात थोक मूल्य सूचकांक में भी देखने को मिली जो दूसरी तिमाही में लगातार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से ऊपर बना रहा। इससे यह संकेत मिलता है कि विनिर्माता बढ़ती लागत के कारण कीमतों के मामले में कुछ खास नहीं कर सके। 
 
जहां तक बात है बड़ी कंपनियों की तो बीएसई 100 (बीएसई में सूचीबद्घ शीर्ष 100 कंपनियां) की बिक्री दूसरी तिमाही में साल दर साल आधार पर 21 फीसदी बढ़ी। परंतु अगर धातु और ऊर्जा क्षेत्र को निकाल दिया जाए तो बिक्री में केवल 10 फीसदी का इजाफा हुआ। इसे भी आधार प्रभाव के रूप में समझा जा सकता है।  इन कंपनियों का परिचालन लाभ सालाना आधार पर 15 फीसदी बढ़ा लेकिन ऊर्जा और धातु क्षेत्र को निकाल दें तो यह महज 13 फीसदी रहा। करीब 37 सूचीबद्घ कंपनियों ने परिचालन लाभ में कमी प्रदर्शित की। ये परिणाम व्यापक नमूनों को ही दर्शाते हैं। यहां तक कि जिन क्षेत्रों में उच्च वृद्घि देखने को नहीं मिली मसलन गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां और उपभोक्ता कंपनियां, वहां गिरावट देखने को मिल सकती है। पूरे वित्त वर्ष के लिए बीएसई 100 कंपनियों का अनुमान 4 फीसदी कम किया गया। अनुमानों में इस कमी के साथ ही टाटा मोटर्स और मारुति जैसी दिग्गज वाहन कंपनियों के अनुमान भी कम हुए। रिफाइनरी के भी कमजोर प्रदर्शन का ही अनुमान है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कमजोर रुपये से सुधार देखने को मिल सकता है। आधार प्रभाव के बरकरार रहने की उम्मीद है क्योंकि वर्ष 2017-18 की दूसरी छमाही भी कमजोर रही थी।  ऐसे में आम सहमति यही है कि सालाना वृद्घि दूसरी छमाही में भी मजबूत बनी रहेगी। परंतु वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2019-20 में मंदी देखने को मिलेगी क्योंकि तब तक आधार प्रभाव समाप्त हो जाएगा।
Keyword: company, mining, revenue,,
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