बिजनेस स्टैंडर्ड - कपड़ा-वस्त्र निर्यात में इजाफा
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कपड़ा-वस्त्र निर्यात में इजाफा

दिलीप कुमार झा / मुंबई 11 18, 2018

विदेशों की मांग बढ़ी, अक्टूबर में 33 प्रतिशत बढ़ोतरी

रुपये के अवमूल्यन की वजह से कपड़ा और वस्त्र निर्यातकों की आमदनी को मिला प्रोत्साहन
अक्टूबर में 1,986 अरब रुपये रहा देश का कपड़ा-वस्त्र निर्यात
पिछले साल इसी माह में यह था 1,489 अरब रुपये
कुल कपड़ा निर्यात में 28 प्रतिशत की उछाल दर्ज हुई
देश से भेजी जाने वाली वस्त्रों की खेपों में हुआ 54 प्रतिशत तक का इजाफा
वस्तु एवं सेवा कर लागू होने के बाद भारत का कपड़ा उद्योग था काफी दबाव में

बिजनेस स्टैंडर्ड कपड़ा-वस्त्र निर्यात में इजाफाविदेशों की अधिक मांग की वजह से अक्टूबर में भारत के कपड़ा और वस्त्र निर्यात में आश्चर्यजनक रूप से 33 प्रतिशत की उछाल आई है। भारत के सबसे बड़े वस्त्र आयातक अमेरिका के नेतृत्व में वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार शुरू हो गया है। कमजोर होते रुपये से कपड़ा और वस्त्र निर्यातकों की आमदनी में इजाफे को मदद मिली है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा एकत्रित आंकड़ों के अनुसार अक्टूबर में देश का कपड़ा और वस्त्र निर्यात 1,986 अरब रुपये रहा जबकि पिछले साल समान महीने में यह 1,489 अरब रुपये था। जहां एक ओर कुल कपड़ा निर्यात में 28 प्रतिशत की उछाल दर्ज हुई है वहीं दूसरी ओर समीक्षाधीन महीने के दौरान देश से भेजी जाने वाली वस्त्रों की खेपों में 54 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन से करीब से जुड़ी यह निर्यात वृद्धि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत देती है। पिछले साल खेपों में गिरावट के बाद निर्यात के आंकड़े फिर से पटरी पर आ गए हैं।

भारतीय कपड़ा उद्योग परिसंघ (सिटी) के चेयरमैन संजय के जैन ने कहा कि सरकार के साथ-साथ परिसंघ के प्रोत्साहन और मंत्रालयों द्वारा अपनाए गए व्यावहारिक रवैये के परिणामस्वरूप पूरे कपड़ा क्षेत्र की मूल्य शृंखला के निर्यात में सकारात्मक रुख रहा है। समय पर किए गए नीतिगत हस्तक्षेप ने इस निर्यात में इजाफे को प्रोत्साहन दिया है। विशेष रूप से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद कपड़ा उद्योग उद्योग बहुत दबाव में था। मुश्किल दौर के बाद सकारात्मक रुख सुधार के संकेतों को दर्शाता है। उद्योग के विशेषज्ञों को उम्मीद है कि केंद्र निर्यात को बढ़ाने और आयात को सीमित करने के लिए प्रगतिशील उपाय जारी रखेगा। निर्यात और औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों में निरंतर वृद्धि के परिणामस्वरूप रोजगार में इजाफा, उत्पादन में बढ़ावा और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह कि इस क्षेत्र के लिए मेक इन इंडिया के उपाय सही मायने में कारगर होंगे।

क्लोदिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा कि शुल्क वापसी के पुराने तरीके का लाभ उठाने के लिए भारतीय निर्यातकों द्वारा ऑर्डर बुक करने के कारण सितंबर 2017 में वस्त्र निर्यात में असामान्य वृद्धि देखी गई। इस महीने के दौरान निर्यातकों ने अग्रिम भुगतान स्वीकार करते हुए भी ऑर्डर बुक किए। इसलिए सितंबर 2017 में कुल निर्यात के आंकड़ों में तेज वृद्धि नजर आई। हालांकि इसकी तुलना में सितंबर 2018 में वस्त्र निर्यात में लगभग 27 प्रतिशत की नकारात्मक वृद्धि हुई। इसलिए अक्टूबर में कपड़ा और वस्त्र निर्यात के आंकड़े वास्तविक वृद्धि के सटीक संकेतक नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि रुपये के अवमूल्यन ने वास्तव में इस खंड में भारत की निर्यात वृद्धि में मदद की। लेकिन यह देखा जाना बाकी है कि मौजूदा विकास जारी रहेगा या नहीं। ऐसा केवल तभी संभव है कि जब डॉलर के मुकाबले रुपये का अवमूल्यन जारी रहे लेकिन चीन, बांग्लादेश और श्रीलंका समेत अन्य प्रतिस्पर्धी देशों की मुद्रा में मजबूती बनी रहे परंतु ऐसा होने के आसार बहुत कम हैं। केंद्र ने निर्यात वृद्धि के लिए कई उपाय पेश किए हैं जिनमें पिछले साल 60 अरब रुपये के कार्यक्रम वाली भारत से वस्तु निर्यात योजना (एमईआईएस) भी शामिल है। 2019 तक घरेलू वस्त्र उद्योग 250 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है जबकि नवंबर 2017 में यह अनुमानित रूप से 150 अरब डॉलर था। वित्त वर्ष 2018 में भारत का कपड़ा और वस्त्र निर्यात 39.2 अरब डॉलर रहा और 2021 तक यह बढ़कर 82 अरब डॉलर होने की उम्मीद है।
Keyword: textiles, export, कपड़ा परिधान,
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