बिजनेस स्टैंडर्ड - प्रतिस्पद्र्धात्मक खामी से जूझते भारत की संभावनाएं अपार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, December 11, 2018 11:51 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

प्रतिस्पद्र्धात्मक खामी से जूझते भारत की संभावनाएं अपार

जिंदगीनामा
कनिका दत्ता /  November 18, 2018

कारोबारी सुगमता रैंकिंग में शीर्ष 100 देशों के क्लब में पहले ही शामिल हो चुका भारत वर्ष 2019 की सूची में 77वें स्थान पर पहुंच चुका है। इस तरह भारत ने महज दो वर्षों में ही अंतरराष्ट्रीय कारोबार की इस सौंदर्य प्रतिस्पद्र्धा में 53 स्थानों की लंबी छलांग लगाई है। अगर आप पूरी कवायद की सच्चाई को लेकर संदेहास्पद रवैया रखते हैं तो भी यह प्रगति रायसीना हिल की केंद्रित तवज्जो के एक अचंभे को बयां करता है। मीडिया के एक तबके ने इस प्रगति को एक उपलब्धि के तौर पर पेश किया है। इसका एक वैकल्पिक वास्तविकता परीक्षण करते हैं।

 
तमाम कारोबारों के बीच पर्यटन ऐसा क्षेत्र है जो यह दर्शाता है कि कोई भी देश एक कारोबारी निवेश स्थल के तौर पर कितनी अच्छी हालत में है? अपनी इस प्रकृति के चलते पर्यटन उन सभी मानदंडों को समेटता है जो कारोबारी सुगमता सूचकांक के आकलन में भी शामिल होते हैं। अगर आप होटल खोलने की मंशा रखने वाले कारोबारी से यह पूछें कि उसे अपना कारोबार खड़ा करने के लिए क्या-क्या करना होगा तो इसका जवाब मिल जाएगा। पर्यटन व्यवसाय में संस्कृति, साफ-सफाई, सुरक्षा, सार्वजनिक ढांचा जैसे सार्वभौम अवयव भी समाहित होते हैं। ये तमाम पहलू किसी भी देश में कारोबार के परिचालन संबंधी परिवेश का निर्माण करते हैं।
 
अगर इस नजरिये से देखें तो भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है? जब आप विश्व बैंक की कारोबारी सुगमता रैंकिंग को विश्व पर्यटन संगठन के आंकड़ों के साथ मिलाकर देखते हैं तो सामने आने वाला जवाब निराशाजनक होने के साथ ही उम्मीद भी जगाता है। विश्व पर्यटन संगठन के मुताबिक पर्यटकों की सर्वाधिक पसंदीदा दस जगहें यूरोप, अमेरिका और एशिया में हैं। लेकिन अपनी असीम एवं विलक्षण विविधताओं के बावजूद भारत इस सूची में शामिल नहीं है। यहां तक कि भारत एशिया के भी पांच शीर्ष पर्यटक स्थलों में मौजूद नहीं है। उसे चीन, थाईलैंड, जापान, हॉन्ग कॉन्ग, मलेशिया और जुएबाजी के अड्डे के तौर पर मशहूर मकाऊ के भी बाद सातवां स्थान मिला है।
 
दिलचस्प पहलू यह है कि पर्यटकों को आकर्षित करने के मामले में शीर्ष 10 स्थानों पर मौजूद देश कारोबारी सुगमता की रैंकिंग में भी अगली कतार में शामिल हैं। इटली (51वें) और मलेशिया (54वें) को छोड़कर शीर्ष पर्यटन गतिविधियों वाले बाकी देश कारोबारी सुगमता रैंकिंग में शीर्ष 50 के भीतर ही हैं। पर्यटन गंतव्य स्थलों के मामले में एशिया के दस शीर्ष देशों में से भारत की कारोबारी सुगमता रैंकिंग सबसे कम है। केवल 73वें स्थान पर मौजूद इंडोनेशिया ही भारत की रैंकिंग के थोड़ा आसपास है। एशिया के शीर्ष 10 पर्यटन स्थलों में से दो देश- सिंगापुर और दक्षिण कोरिया कारोबारी सुगमता रैंकिंग में भी पहले पांच देशों में शामिल हैं। सिंगापुर को कारोबारी सुगमता रैंकिंग में दूसरा और दक्षिण कोरिया को पांचवां स्थान मिला हुआ है। 
 
चीन के साथ बेतुकी तुलना के अभ्यस्त भारतीयों को यह अच्छा नहीं लगेगा कि चीन एशिया का अव्वल दर्जे का और पूरी दुनिया का चौथे नंबर का पर्यटन स्थल है। चीन कारोबारी सुगमता रैंकिंग में भी 46वें स्थान पर मौजूद है। पिछले साल करीब 6.1 करोड़ पर्यटक चीन घूमने के लिए गए जबकि भारत आने वाले सैलानियों की तादाद करीब 1.55 करोड़ ही थी। हालांकि चीन और भारत दोनों के प्रवासियों की बड़ी संख्या को देखते हुए पर्यटकों की इस गिनती में संशोधन की दरकार है। चीन और भारत दोनों की ही राजधानी अपनी प्रदूषित हवा को लेकर दुनिया भर में बदनाम हैं फिर भी पेइचिंग जाने वाले पर्यटकों की संख्या दिल्ली आने वाले सैलानियों से काफी अधिक रहती है। 
 
निराश करने वाली बात यह है कि भारत विदेशी मुद्रा जुटाने के प्रमुख स्रोत पर्यटन एवं कारोबारी सुगमता दोनों ही मामले में अगली कतार में शामिल हो सकता है। पर्यटकों की आमद के मामले में फ्रांस, इटली और स्पेन की गिनती दुनिया के कुछ बेहद अशिष्ट एवं निकम्मे वेटिंग स्टाफ वाले देशों में होती है। चीन, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया अब भी वैश्विक संचार की अग्रणी भाषा अंग्रेजी के को आत्मसात करने में पीछे हैं। ब्रेक्सिट के प्रतिकूल असर के चलते अधिकतर यूरोपवासी अंग्रेजी बोलने से परहेज ही करते हैं। इसके उलट विदेश में रहने वाले भारतीयों को घरेलू आतिथ्य सेवा की गुणवत्ता हरेक स्तर पर नजर आती है। 
 
इन देशों और भारत के बीच अहम फर्क सार्वजनिक सुरक्षा और सार्वजनिक ढांचे का है। भाषायी अडचनों के बावजूद पश्चिमी यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया में किसी तरह की छेड़छाड़ की आशंका और संक्रमण के जोखिम के बगैर सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हुए सफर करना काफी हद तक संभव है। इन देशों में पर्यटन स्थलों की सैर पर अकेली महिला सैलानी के लिए भी जाना संभव है और इस दौरान उन्हें लगातार घूरे जाने, छेडख़ानी या इससे भी बुरी स्थिति का सामना करने का डर नहीं होता है। ये कुछ ऐसे मानदंड हैं जिन्हें हल्के में लिया जाता है। भारत में तो इन्हें विशेषाधिकार माना जाता है और इसी वजह से हम अपने विश्वस्तरीय हवाईअड्डों की बात करते हुए थकते भी नहीं हैं। यही पहलू उस समय भी मायने रखते हैं जब विदेशी कारोबारी निवेश करने के बारे में कोई फैसला करता है। 
 
यह सच है कि भारत विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित करने के मामले में दसवें स्थान पर है। यह तथ्य कारोबार के विस्तार खासकर बड़े पैमाने पर रोजगार दे पाने में सक्षम पर्यटन उद्योग के लिए काफी संभावनाएं समेटे हुए है। चीन (दूसरे) और सिंगापुर (आठवें) को छोड़कर भारत ही इस रैंकिंग में शामिल तीसरा एशियाई देश ही है। व्यस्त पर्यटन सीजन की शुरुआत में यह तथ्य भारत की लंबे समय से चली आ रही प्रतिस्पद्र्धात्मक खामी को उजागर करता है। यह खामी निजी क्षेत्र की अपेक्षाओं एवं क्षमताओं और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति के बीच असंतुलन की है।
Keyword: business ranking, india, china,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या विधानसभा चुनावों में हार हैं मोदी लहर के थमने के संकेत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.