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सरकार संग तकरार में बोर्ड पर रहेगा दारोमदार

अद्वैत राव पालेपू /  November 18, 2018

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बोर्ड की 19 नवंबर होने वाली बैठक केंद्रीय बैंक की हाल के वर्षों की सबसे रोचक बैठक है। यह बैठक सरकार और आरबीआई के बीच पिछले एक महीने से चल रहे विवाद के बाद हो रही है। इसमें दोनों ही पक्ष विवादित मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे।  विवाद की जड़ कुछ अहम मुद्दे हैं। पहला मुद्दा यह है कि 11 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (पीएसबी) आरबीआई की त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई में शामिल हैं। इससे इन बैंकों की ऋण देने की क्षमता कम हो गई है। वित्त मंत्रालय चाहता है कि आरबीआई कुछ बंदिशों में ढील दे। सरकार नकदी की स्थिति को लेकर भी चिंतित है। सरकार चाहती है कि आरबीआई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और म्युचुअल फंडों को पुनर्वित्त की विशेष सुविधा दी जाए। आरबीआई के लाभांश भुगतान को लेकर भी विवाद है। 

 
हालांकि आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने साफ किया है कि सरकार आरबीआई को 3.6 लाख करोड़ रुपये या 1 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित करने के लिए नहीं कह रही है। सरकार ने इस मुद्दे पर बातचीत करने, एक उपयुक्त आर्थिक पूंजी रूपरेखा बनाने और केंद्रीय बैंक की जरूरत से अधिक आरक्षित कोष को सरकारी खजाने में हस्तांतरित करने का प्रस्ताव रखा है।  केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता की सुरक्षा को लेकर अपने भाषण में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने 26 अक्टूबर को कहा कि इस बैंकिंग नियामक का सम्मान न करने वाली सरकारों को वित्तीय बाजारों का कोप भाजक बननाा पड़ेगा। सरकार को उनका भाषण पसंद नहीं आया। एक सप्ताह बाद गर्ग ने तंज कसते हुए कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत हुआ है, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, शेयर बाजार 4 फीसदी चढ़े हैं और बॉन्ड प्रतिफल 7.7 फीसदी से नीचे आ गया है। उन्होंने सवाल किया, 'यही बाजारों का कोप है?' 
 
गर्ग सरकार के मुद्दों को आरबीआई के बोर्ड की बैठक में पेश कर सकते हैं। अगर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनी तो कुछ मुद्दों पर मतदान हो सकता है। ऐसा संभवतया केंद्रीय बैंक के इतिहास में पहली बार होगा। ऐसे में बोर्ड की संरचना बहुत अहम हो जाती है। आरबीआई के बोर्ड में 18 सदस्य हैं, जिनमें से आरबीआई के चार डिप्टी गवर्नर और दो सरकार के नामित अधिकारी गर्ग और वित्तीय सेवा विभाग के सचिव राजीव कुमार मत नहीं दे सकते हैं। केवल 11 स्वतंत्र निदेशक मत देने के लिए पात्र हैं। अगर किसी मुद्दे पर मत बराबर रहे तो आरबीआई गवर्नर को निर्णायक मत देने का अधिकार है। बोर्ड में ये सदस्य शामिल हैं। 
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