बिजनेस स्टैंडर्ड - भारतीय शेयर बाजारों के लिए मूल्यांकन अनुकूल
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भारतीय शेयर बाजारों के लिए मूल्यांकन अनुकूल

पुनीत वाधवा /  November 18, 2018

वैश्विक रूप से लगभग 393 अरब डॉलर की प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) वाली मैन्युलाइफ ऐसेट मैनेजमेंट के प्रबंध निदेशक (भारतीय इक्विटी) राणा बी गुप्ता ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में कहा कि चुनावी मौसम नजदीक होने के बावजूद भारतीय बाजार विधानसभा चुनावों के परिणामों के अलावा वैश्विक और स्थानीय कारकों पर अधिक ध्यान केंद्रित करेंगे। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

 
2018-19 के शेष समय के लिए बाजार पर आपका क्या नजरिया है?
 
अत्यधिक तनाव का समय पीछे छूट चुका है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें नीचे आई हैं, व्यापार घाटा कम हुआ है, और जीएसटी राजस्व बढ़ा है। ऐसा लगता है कि थोक पूंजी बाजार में दबाव बना हुआ है। वित्त वर्ष 2019 के शेष समय के लिए परिदृश्य 'सतर्कतापूर्वक आशावादी' है।
 
बाजार सतर्कतापूर्वक आशावादी क्यों है?
 
आशावादी इसलिए, क्योंकि हम कुछ खास क्षेत्रों को अप्रत्यक्ष कराधान में सुधार, मजबूत वित्तीय स्थिति और राजकोषीय मजबूती की वजह से लाभान्वित होते देख रहे हैं। सतर्कतापूर्वक, अल्पावधि समस्याओं की वजह से। वैश्विक रूप से, केंद्रीय बैंकों के समक्ष अपनी बैलेंस शीट पर दबाव की वजह से तरलता के कमजोर परिदृश्य और ऊंची अमेेरिकी दरें अभी भी उतार-चढ़ाव के मुख्य कारण हैं। स्थानीय तौर पर, हम ऋण वृद्घि में मंदी पर ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि एनबीएफसी को अपनी बैलेंस शीट में सुधार की राह पर चुनौतियों का सामना करना होगा। निवेशकों को भी राज्य चुनाव परिणामों तक अस्थिरता से जूझना होगा। आय वृद्घि को लेकर तस्वीर मिश्रित है, क्योंकि मार्जिन पर दबाव दिखा है। 
 
क्या आप भारत को 'गिरावट पर खरीदें' रेटिंग देना चाहेंगे?
 
अनिश्चितता से भरे समय में भारतीय बाजार पर ध्यान देना समझदारी है जब मूल्यांकन आपके पक्ष में हैं। पिछले 10 वर्षों के दौरान, भारतीय बाजार के लिए औसत कीमत-आय अनुपात 15 गुना पर रहा। जब बाजार अपने औसत मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे हैं तो हम कहना चाहेंगे कि मूल्यांकन हमारे पक्ष में आना शुरू हो गया है। यह बदलाव क्षेत्रों और कंपनियों के लिए भी लागू हो सकता है। इसके अलावा, ऐसे परिवेश में अच्छे नकदी प्रवाह और कम वित्तीय जोखिम वाली कंपनियों पर विचार करना उपयुक्त होगा।
 
विदेशी निवेशक के तौर पर आप ताजा घटनाक्रम को किस तरह से देख रहे हैं?
 
ताजा गिरावट ने मूल्यांकन को उचित बना दिया है। हम अच्छे रुझान वाले क्षेत्रों को उचित मूल्यांकन पर पसंद करेंगे। हम बड़ी बड़े रिटेल जमा-पोषित निजी बैंकों में अवसर देख रहे हैं। कम पैठ और ऊंची दर के माहौल की वजह से हम गैर-जीवन बीमा को भी पसंद कर रहे हैं। 
 
एनबीएफसी के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
 
अल्पावधि कंज्यूमर फाइनैंस को छोड़कर हम एनबीएफसी पर सतर्क हैं। हमारा मानना है कि ऋण को लेकर मजबूत स्थिति वाली एनबीएफसी को भी कमजोर वृद्घि और मार्जिन दबाव का सामना करना पड़ेगा। अपेक्षाकृत थोक परिसंपत्तियों से निवेश से जुड़ी नई एनबीएफसी को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। 
 
क्या आप मौजूदा गिरावट का इस्तेमाल खरीदारी के लिए कर रहे हैं?
 
हम ताजा गिरावट को खास सेगमेंट में अवसर के तौर पर देख रहे हैं। हम इलेक्ट्रिकल कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को पसंद कर रहे हैं। मौजूदा विद्युतीकरण के परिणाम की वजह से यह सेगमेंट लगातार मजबूत बना रहेगा। इसके अलावा मिड-कैप हेल्थकेयर में भी अवसर मौजूद हैं जहां कंपनियां का भारत और अन्य उभरते बाजारों में ब्रांडेड  जेनेरिक बाजारों में अधिक निवेश है। पर्सनल केयर स्पेस में उपभोक्ता कंपनियों पर भी विचार किया जा सकता है।
 
क्या आप विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) प्रवाह में तेजी देख रहे हैं?
 
एफआईआई प्रवाह सभी उभरते बाजारों में घटा है। एशिया में उभरते बाजारों के मामले में, एफआईआई की बिक्री बाजार पूंजीकरण के प्रतिशत के तौर पर पिछले 12 महीनों में उन स्तरों के समान रही है जो हमने 2016 के शुरू में, 2011 के अंत में और 2012 के शुरू में दर्ज किए। इसके आधार पर, हम मान सकते हैं कि बिकवाली का दबाव समाप्त हो गया है। पूंजी प्रवाह की रफ्तार अब अमेरिकी दरों पर निर्भर करेगी। यदि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दो-तीन बार और दरें बढ़ाता है और फिर इससे परहेज करने का संकेत देता है तो यह पूंजी प्रवाह के लिहाज से लाभदायक होगा। वहीं स्थानीय कारकों में अब रुपया स्थिर हो गया है और हमने वृहद आंकड़े में कुछ सुधार देखा है। यदि ऐसे सुधार टिकाऊ साबित होते हैं तो इस सुधार की वापसी देखी जा सकती है। 
 
क्या आप मानते हैं कि बिकवाली का अगला दौर विपरीत राज्य चुनाव परिणामों के बाद देखा जा सकता है?
 
आगामी राज्य चुनावों का परिणाम बेहद क्षणिक है और इसका प्रभाव कुछ ज्यादा ही महसूस किया जा रहा है। यह कहना आसान नहीं है कि चुनाव परिणाम विपरीत रहने की स्थिति में बाजार नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं करेगा। लेकिन हम ऐसी नकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देख सकते हैं जिसका असर कई दिनों या सप्ताहों के बाद भी बना रहे। राज्य चुनाव परिणामों से परे, बाजार वैश्विक और स्थानीय कारकों पर ध्यान देगा जिससे अस्थिरता बढ़ेगी, लेकिन बाजार की चाल बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं होगी। बड़ी चुनौती नीति और कॉरपोरेट निर्णय लेने की प्रक्रिया में संभावित सुस्ती और राजनीतिक अनिश्चितता से निपटने की होगी क्योंकि देश अप्रैल-मई 2019 में आम चुनाव की ओर बढ़ रहा है। आम चुनाव के परिणाम को लेकर भी चिंताएं हैं। 
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