बिजनेस स्टैंडर्ड - आईपीओ को एलआईसी का सहारा
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, May 24, 2019 10:48 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

आईपीओ को एलआईसी का सहारा

सुंदर सेतुरामन / मुंबई November 16, 2018

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) केंद्र सरकार के विनिवेश अभियान को सहारा देने के लिए सबसे मजबूत स्तंभ बना हुआ है। शेयरधारिता प्रारूप के विश्लेषण से पता चलता है कि 2018 में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के आए आईपीओ में करीब दो-तिहाई निवेश किया है।  गार्डन रीच शिपबिल्डर्स आईपीओ के तहत पेश कुल शेयरों का 28 फीसदी हिस्सा एलआईसी ने खरीदा है। एलआईसी ने करीब 1 अरब रुपये के निवेश से इस शिपबिल्डिंग कंपनी में 7.3 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। कंपनी 3.4 अरब रुपये का आईपीओ लाई थी। इसी तरह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के आईपीओ में पेश कुल शेयरों में 70 फीसदी एलआईसी ने खरीदी। एलआईसी ने आईपीओ के दौरान रक्षा कंपनी की 7 फीसदी हिस्सेदारी 28.4 अरब रुपये में खरीदी।
 
मिश्र धातु और भारत डायनामिक्स हाल के कुछ अन्य पीएसयू आईपीओ हैं जहां एलआईसी की खासी भागीदारी देखी गई। राइट्स और इरकॉन दो ऐसे आईपीओ रहे जिसका बेड़ा पार एलआईसी की सहभागिता के बिना हो गया। दिलचस्प रूप से न सिर्फ एलआईसी बल्कि अन्य सरकारी संस्थानों मसलन न्यू इंडिया एश्योरेंस, भारतीय स्टेट बैंक और यहां तक कि पंजाब नैशनल बैंक भी आईपीओ के दौरान पीएसयू शेयरों की खरीद करती पाई गई। हो सकता है कि इनमें से कुछ इन संस्थानों की तरफ से अपने शेयर बाजार पोर्टफोलियो के लिए लगातार हो रही खरीदारी का हिस्सा हो। पीएसयू आईपीओ का बेड़ा पार करने में सहयोग करना एलआईसी के लिए नया नहीं है, लेकिन बाजार के भागीदारों ने  कहा कि आईपीओ को कामयाब बनाने के लिए एलआईसी के इस्तेमाल से भविष्य में इसका असर देखने को मिल सकता है।
 
इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज के संस्थापक और प्रबंध निदेशक श्रीराम सुब्रमण्यन ने कहा, ऐसे आईपीओ में भारी निवेश कर एलआईसी अपने पॉलिसीधारकों व पूंजी बाजार का नुकसान कर रही है। एलआईसी ऐसा साधन नहीं है जिसका इस्तेमाल सरकार अपने विनिवेश लक्ष्य पूरा करने में करे। सरकार को अपने विनिवेश कार्यक्रम में निवेशकों के विस्तृत आधार की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। इस साल के ज्यादा पीएसयू आईपीओ अपने-अपने इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार कर रहे हैं।  बाजार के प्रतिभागियों ने कहा कि सूचीबद्धता के बाद प्रदर्शन में कमजोरी द्वितीयक बाजार में सुस्ती के चलते है। इसके अतिरिक्त पीएसयू शेयरों को लेकर निवेशकों की धारणा कमजोर है और इस साल बीएसई पीएसयू इंडेक्स 21 फीसदी टूटा है। साथ ही कई शेयर कई साल के निचले मूल्यांकन पर कारोबार कर रहे हैं। इस कमजोरी से एलआईसी को बड़ा झटका लगा होगा क्योंकि कई पीएसयू में इसकी बड़ी हिस्सेदारी है।
 
बाजार के प्रतिभागियों को डर है कि बीमा दिग्गज को सरकार की तरफ से भविष्य की शेयर बिक्री में शामिल होने के लिए कहा जा सकता है। अगले कुछ महीने में पीएसयू या अन्य कंपनियों के काफी शेयर जारी हो सकते हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी है। बाजार के कुछ प्रतिभागियों ने तर्क दिया कि एलआईसी के निवेश फैसले की आलोचना करना अभी जल्दबाजी होगी। एसईएस के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक जे एन गुप्ता ने कहा, समय ही बताएगा कि ये निवेश फैसले सही हैं या नहीं। ऐतिहासिक तौर पर एलआईसी ने लंबी अवधि में अच्छी कमाई की है। बीमा कंपनियों के निवेश का नजरिया लंबी अवधि का होता है।
Keyword: LIC, insurance, policy, health, share,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या हिंदुजा संग जेट एयरवेज की बनेगी बात?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.