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राइट्स इश्यू के जरिये कोष उगाही 10 साल की ऊंचाई पर

सुंदर सेतुरामन / मुंबई November 15, 2018

राइट्स इश्यू के जरिये कोष उगाही इस साल 10 वर्ष के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। अब तक 9 कंपनियों ने 178.6 अरब रुपये जुटाए हैं जो पिछले साल राइट इश्यू के जरिये जुटाई गई रकम का लगभग तीन गुना है।  निवेश बैंकरों का कहना है कि प्रमुख सूचकांक में कमजोरी और अस्थिरता बढऩे से कंपनियां पसंदीदा पात्र संस्थागत नियोजन (क्यूआईपी) के मुकाबले राइट इश्यू पर विचार करने के लिए बाध्य हुई हैं। क्यूआईपी पूंजी जुटाने का एक अन्य विकल्प है जिसमें कुछ निवेशकों को निजी तौर पर शेयर दिए जाते हैं।
 
प्राइम डेटाबेस द्वारा मुहैया कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल 161 अरब रुपये क्यूआईपी के जरिये जुटाए गए जो पिछले साल की तुलना में 70 प्रतिशत कम है। पिछले साल इस विकल्प के जरिये 561 अरब रुपये जुटाए गए थे।  जब तक बाजार के हालात में सुधार नहीं आता, तब तक क्यूआईपी निर्गमों की रफ्तार सुस्त बनी रहेगी। बैंकों का कहना है कि पूंजी की सख्त जरूरत वाली कंपनियों को राइट इश्यू का विकल्प तलाशना होगा।  2018 में सबसे बड़ा राइट इश्यू टाटा स्टील द्वारा पेश किया गया। कंपनी ने 127 अरब रुपये जुटाने के लिए इस निर्गम की पेशकश की। निर्गम के जरिये प्राप्त रकम का इस्तेमाल कंपनी ने कर्ज पुनर्भुगतान के लिए किया। इंडियाबुल्स वेंचर्स और पीरामल एंटरप्राइजेज ने अपने राइट इश्यू से लगभग 20-20 अरब रुपये जुटाए हैं।
 
यह सही है कि वर्ष में कुल राइट इश्यू की संख्या में तेजी आई है और इस साल कई बड़े निर्गम भी आए हैं। उद्योग दिग्गजों का कहना है कि अब रणनीति में बदलाव आया है जिसके तहत बड़ी कंपनियां राइट इश्यू पर विचार कर रही हैं। राइट इश्यू पूंजी जुटाने का एक ऐसा माध्यम है जिसकी लोकप्रियता 2016 और 2017 में काफी कम हो गई थी।  2016 और 2017 में राइट इश्यू के जरिये सिर्फ 19 अरब और 35 अरब रुपये जुटाए गए। दूसरी तरफ, 2016 में आए क्यूआईपी निर्गमों के जरिये 47 अरब रुपये जुटाए गए और 2017 में यह आंकड़ा तेजी से बढ़कर 561 अरब रुपये पर पहुंच गया।
 
विश्लेषकों का कहना है कि बाजार हालात मजबूत हैं, सूचीबद्घ कंपनियां क्यूआईपी के जरिये पूंजी जुटाना अधिक सस्ता और सक्षम विकल्प मान रही हैं। अक्सर, कंपनियां उस स्थिति में राइट इश्यू को पसंद करती हैं जब प्रवर्तक अपनी हिस्सेदारी घटाना नहीं चाहते हैं। राइट इश्यू के जरिये प्रवर्तक शेयरधारिता भी बढ़ाई जा सकती है, बशर्ते कि वे निर्गम का गैर-अभिदान वाला हिस्सा खरीदें। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के कार्यकारी निदेशक अजय सराफ ने कहा, 'इक्विटी बाजार में गिरावट की वजह से कई शेयर 2018 में भारी गिरावट का शिकार हुए हैं। प्रवर्तक उस स्थिति में राइट इश्यू के जरिये कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर विचार कर सकते हैं जब कुछ अल्पांश शेयरधारक निर्गम में खरीदारी न करें।' 
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