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ब्रांड वैल्यू के खेल में तेल कंपनियां

अमृता पिल्लै /  November 14, 2018

पिछले कुछ महीनों से भारतीय तेल कारोबार की प्रमुख कंपनियां ब्रांडिंग की किताब में लिखे लगभग सभी तरह के पैंतरे आजमा रही हैं। उन्होंने अपने मुख्य कारोबार से अलग क्षेत्रों भी कई उत्पाद जारी किए हैं। जैसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) ने ब्रांडेड बोतलबंद पानी बाजार में उतारा है। वे हरित ऊर्जा का समर्थन कर रही हैं और अपने उत्पादों के प्रत्यक्ष खिलाफ कार्यक्रमों में भी कारोबारी सहायता उपलब्ध करा रही हैं। सितंबर में आयोजित राष्ट्रीय साइकिलिंग प्रतियोगिता में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल), इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी), ऑयल ऐंड नैचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) और एचपीसीएल मुख्य प्रायोजक थीं। इन कंपनियों की ट्विटर टाइमलाइन ऊर्जा बचाओ और कम तेल खर्च करो जैसे संदेशों से भरी हुई थीं। 

 
आखिर तेल कंपनियां ऐसे कार्यक्रम से क्यों जुड़ीं, जो एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जिसमें तेल पर निर्भरता कम हो। साथ ही, ये कंपनियां ऐसे उत्पाद लेकर क्यों आ रही हैं जो उनके मुख्य कारोबार में शायद ही कोई मदद करे। इसका कारण है लाखों लोगों के दिलों को जीतना। ब्रांड्ज के शीर्ष 100 मूल्यवान ब्रांड में शामिल कैंटार मिलवर्ड ब्राउन की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि नीचे जा रहे ब्रांड ग्राहकों के सम्मान को वापस पाना चाहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस तरह का कारोबार करने वालों के लिए यह ऐसा समय है जब वे अधिक प्रभावी और कुशल संचार नीतियों को कार्यान्वित कर सकते हैं जिससे ब्रांड वैल्यू प्रभावित करने वालों तक पहुंच बने और ब्रांड की प्रतिष्ठा बनाए रखे। 
 
आईओसी, एचपीसीएल, बीपीसीएल और ओएनजीसी द्वारा हरित प्रयासों और साइकिलिंग को समर्थन देने के पीछे यह एक बड़ा कारण नजर आता है। आईओसी के ट्विटर खाते पर तेल का कम उपयोग करने जैसे संदेश का भी यही कारण है। यह अलग-अलग जगहों पर और मीडिया में इस उम्मीद के साथ नए ग्राहकों से जुडऩे का प्रयास है कि इससे उनके उत्पाद पर्यावरण के लिए संवेदनशील नई पीढ़ी के लिए भी प्रासंगिक बने रहेंगे। यह कंपनियों में आगे बने रहने की होड़ है।  ब्रांड और कम्युनिकेशंस कंसल्टेंसी क्लोरोफिल के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक किरन खलप कहते हैं, 'साइक्लाथन कार्यक्रम को पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए) ने तेल रिटेलरों के साथ मिलकर कराया था। एक स्तर पर देखें तो ये कंपनियां तेल बेचती हैं, लेकिन बड़े स्तर पर ये ऊर्जा दक्षता में योगदान करना चाहती हैं।'
 
क्या यह कंपनियों को मदद करेगा, जबकि ब्रांडिंग का यह प्रयास कंपनियों के मुख्य कारोबार के विपरीत दिखाई देता है? खलप कहते हैं कि यह काम करेगा क्योंकि इससे ब्रांड को ऊर्जा सुरक्षा जैसे बड़े राष्ट्रीय विषय के साथ जोड़कर देखा जाएगा।  पिछले कुछ सालों में, खाना बनाने में उपयोग होने वाले तेल ब्रांडों ने भी इसी तरह का प्रयास किया जब वे स्वस्थ, कम तेल या तेल-मुक्त खाना बनाने की अपील करते हैं। विज्ञापन देखने के बाद ग्राहक उत्पाद खरीदें या ना खरीदें, विचार यह है कि ब्रांड को उत्पाद के स्थान पर एक बड़े उद्देश्य से जोड़ा जाए। 
 
हरीश बिजूर कंसल्ट्स के संस्थापक हरीश बिजूर का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से एक बहु-स्तरीय संदेश भेजा जाता है। वह कहते हैं, 'पहला संदेश है कि तेल का कम उपयोग किया जाए। दूसरा एक तथ्य है कि देश के विदेशी विनिमय में तेल आयात का बड़ा हिस्सा है। पीएसयू होने के नाते इसे कम करने का प्रयास किया जाता है। और तीसरा, कम हाइड्रोकार्बन और कार्बन फुटप्रिंट के साथ स्वच्छ जीवन जिया जाए।' अलग श्रेणी के उत्पादों के अलावा तेल पीएसयू कंपनियां कला के क्षेत्र के साथ ही डिजिटल मीडिया पर भी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। देश में कला क्षेत्र के कार्यक्रम आयोजित कराने वाले मंच, द कैनवस कोड के लिए आईओसी प्रायोजक की भूमिका निभा रही है। बिजूर मानते हैं कि कंपनियां खुद को एक बड़ी तेल कंपनी की छवि से बाहर निकालने के लिए यह कदम उठा रही हैं। वह कहते हैं, 'इसके तहत चौथा संदेश यह तहना है कि हम साइकिलिंग, कला आदि के साथ अच्छा जीवन जीने में विश्वास करते हैं। हम लापरवाह नहीं हैं, जैसा शायह आप हमें सोचते हों।' इस तरह, भारतीय तेल कंपनियां अपने क्षेत्र की बहुराष्ट्रीय कंपनियों का ही अनुसरण कर रही हैं। 
 
शेवरॉन, शैल जैसी बहुत सी कंपनियां कला क्षेत्र में स्कॉलरशिप, क्षमता प्रोत्साहन, संगीत या खेल आदि के क्षेत्र में विभिन्न देशों में समुदाय के साथ मिलकर काम कर रही हैं। खलप कोला कोला और कोक स्टूडियो का उदाहरण दोहराते हैं, जो कई कलाकारों को एक मंच पर लाने का प्रसिद्ध वैश्विक मंच बन गया है। वह कहते हैं, 'अपने मुख्य कारोबार से अलग लेकिन कंपनी के मूल्यों से जुड़ी किसी गतिविधि को शुरू करना ग्राहक, डीलर और सहयोगियों जैसे नए हितधारकों को जोडऩे का सही तरीका है।' हालांकि, एचपीसीएल के बोतलबंद पानी को इस पैमाने पर कैसे समझाया जा सकता है? कंपनी ने रैमिनरो नाम से बोतलबंद पानी ब्रांड को हैदराबाद और सिकंदराबाद में एक प्रायोगिक परियोजना के तौर पर लॉन्च किया है। 
Keyword: oil, gas, brand, HPCL, BPCL, ONGC,,
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