बिजनेस स्टैंडर्ड - आरसीईपी के लिए 2019 पर नजर
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आरसीईपी के लिए 2019 पर नजर

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली November 14, 2018

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को क्षेत्रीय समग्र आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) समझौते पर बातचीत कर रहे अन्य नेताओं के साथ शामिल हुए और 2019 तक इस समझौते का आह्वान किया। सिंगापुर में आरसीईपी देशों के नेताओं के सम्मेलन में मोदी ने फिर से दोहराया कि भारत आधुनिक, समग्र, बेहतर गुणवत्ता और परस्पर लाभदायक आर्थिक साझेदारी समझौते के लिए प्रतिबद्ध है।  बहरहाल शुल्क कम किए जाने, बाजार तक पहुंच और सेवा कारोबार के मानकों जैसे अन्य देशों प्रशिक्षित पेशेवरों की मुक्त आवाजाही को लेकर भारत की आपत्तियां हैं। एक वरिष्ठ कारोबार राजनयिक ने कहा, 'मोदी ने भारत की मौजूदा स्थिति पर जोर दिया और 2019 में आगामी चुनाव के मद्देनजर शुल्क दरों पर निर्णय लेने के लिए और समय दिए जाने का अनुरोध किया।' 
 
यह महत्त्वाकांक्षी समझौता 10 आसियान देशों (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, म्यांमार, सिंगापुर, थाइलैंड, फिलिपीन, लाओस और वियतनाम) के अलावा न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच प्रस्तावित है। अब तक छह मंत्री-स्तरीय बैठकों के अलावा 24 दौर की बैठकें हो चुकी हैं।  हालांकि, भारत ने अपना ध्यान सेवा कारोबार पर गड़ाए रखा है।  मोदी ने आरसीईपी बैठक में कहा, 'हमें सेवा क्षेत्र में वार्ताओं की प्रगति के लिए भी इसी तरह के प्रयास करने होंगे, क्योंकि ज्यादातर आरसीईपी देशों के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसका हिस्सा 50 प्रतिशत से अधिक है। भविष्य में सेवाएं महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।'
 
हालांकि देशों ने उम्मीद जताई कि 2019 तक समझौता हो जाएगा क्योंकि बातचीत अपने अंतिम चरण में है। बुधवार को नेताओं के संयुक्त वक्तव्य में कहा गया, 'हमने अब तक के 7 अध्याओं का स्वागत किया है। इसमें आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग, लघु एवं मझोले उद्यम, सीमा शुल्क प्रक्रियाएं एवं व्यापार सुविधा, सरकारी खरीद, संस्थागत प्रावधान, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपायों तथा मानक, तकनीकी नियमन एवं सहमति मूल्यांकन प्रक्रियाएं शामिल हैं जिनमें से 5 इसी साल पूरे हुए थे।'  
 
दो दिन पहले सिंगापुर में हुए आरसीईपी के व्यापार मंत्रियों की बैठक में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने हिस्सा लिया था। इसमें राष्ट्रों के बीच 'वर्ष के अंत में आपूर्तियों के पैकेज' के आधार पर बातचीत को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इस मसौदे को 2018 के अंत तक वृहत्-क्षेत्रीय समझौते के व्यापक दायरे पर निर्णय के लिए दो महीने पहले स्वीकार किया गया था।  उपरोक्त उल्लिखित राजनयिक ने बताया, 'आसियान समूह की ओर से इसके लिए काफी दबाव था और इसे चीन का भी समर्थन प्राप्त है जो कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका के साथ कारोबार की संभावना को लेकर भारी चिंता में है।'  
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