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हीरा आभूषण क्षेत्र की डगर कठिन

दिलीप कुमार झा / मुंबई November 13, 2018

विश्व बैंक की कारोबार सुगमता की सूची में भारत का 23 पायदानों का सुधार हीरा आभूषण उद्योग की बेहतरी के मामले में निरर्थक रहा है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रिफंड में देरी, बैंक से मिलने वाले ऋण की कमी और रुपये के अवमूल्यन के बाद डॉलर की उपलब्धता में गिरावट के कारण यह उद्योग कठिन दौर का सामना कर रहा है। उद्योग के लिए बैंक अपनी ऋण सुविधा रुपये के हिसाब से तय करते हैं। इस कारण भारतीय मुद्रा में गिरावट के वक्त डॉलर की उपलब्धता कम रहती है। हाल ही में विश्व बैंक ने कारोबार सुगमता की अपनी सूची जारी की है जिसमें 190 देशों की सूची में भारत 23 पायदान सुधरकर 77 वे स्थान पर आ गया है। इसका श्रेय केंद्र के शीघ्र निर्णय लेने और प्रस्तावों पर तेजी से काम करने को जाता है।
 
लेकिन इस साल की शुरुआत में 115 अरब रुपये के नीरव मोदी-पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले ने हीरा आभूषण क्षेत्र को उधार देने के प्रति बैंकों को सावधान कर दिया था। स्टॉक के बदले पैसा देने के लिए अतिरिक्त गारंटी मांगने के अलावा बैंकों ने कर्जदारों की जांच और कड़ी कर दी। उद्योग की शीर्ष संस्था रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) इस प्रक्रिया को सरल करने का प्रयास तो कर रही है लेकिन अभी कोई संतोषजनक परिणाम प्राप्त करने से वह काफी बहुत दूर है।
 
जीजेईपीसी के प्रतिनिधियों ने हीरा प्रसंस्करण करने वालों की समस्यों और भविष्य में भारत के रत्न एवं आभूषण निर्यात पर इसके संभावित परिणामों पर विचार-विमर्श के लिए हाल ही में वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु से मुलाकात की थी। भारत के व्यापारिक निर्यात में रत्नाभूषण का योगदान करीब 13 फीसदी रहता है। जीजेईपीसी के चेयरमैन प्रमोद अग्रवाल ने कहा कि सरकार इस श्रम-प्रधान क्षेत्र के प्रति काफी मददगार रही है। यह क्षेत्र प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 50 लाख लोगों को रोजगार देता है। फिलहाल इस क्षेत्र का संपूर्ण कारोबार विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है और इससे कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ा है। आयात शुल्क में बढ़ोतरी और रुपये में गिरावट ने हालात को बद से बदतर बना दिया है।
 
आयात बिल में कमी के लिए सरकार ने सितंबर में कुछ निश्चित कीमती धातुओं, आभूषणों और रत्नों पर आयात शुल्क बढ़ा दिया था। जहां एक तरफ तराशे और परिष्कृत हीरे पर आयात शुल्क को पांच फीसदी से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत कर दिया गया था वहीं दूसरी तरफ सोने के आभूषणों पर यह शुल्क 15 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया गया था। जीजेईपीसी के वाइस-चेयनमैन कोलिन शाह ने कहा कि निर्यात करने वाले जौहरियों को डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज गिरावट के अनुपात में ही डॉलर की अपनी ऋण सीमा में कमी और प्रक्रियात्मक बाधाओं की वजह से जीएसटी के्रडिट में देरी का सामना करना पड़ रहा है। इन सब कारणों से उनकी कार्यशील पूंजी का एक बड़ा हिस्सा अवरुद्ध हो गया है।
 
इसके परिणामस्वरूप सितंबर 2018 में भारत के रत्नाभूषण निर्यात में 24 प्रतिशत की भारी गिरावट आई और यह 232.1 करोड़ डॉलर हो गया जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 305.338 करोड़ डॉलर था। रुपये के अवमूल्यन की वजह से इस साल सितंबर में भारत के रत्नाभूषण निर्यात के 167.61 अरब रुपये के अनुबंध हुए। हीरा आभूषण विनिर्माताओं ने इंटरनैशनल जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट (आईजीआई) और जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका (जीआईए) जैसे वैश्विक भरोसेमंद संगठनों के परिष्कृत हीरे, रत्नों और जड़ाऊ गहनों केप्रमाणीकरण की ओर कदम बढ़ाया है। आईजीआई के प्रबंध निदेशक तेहमैस्प पिं्रटर ने कहा कि वैश्विक रूप से खनन किए गए प्रत्येक 13 रत्नों में से 11 का प्रसंस्करण भारत में किया जाता है। हमारे तराशे और परिष्कृत किए गए हीरे बेल्जियम वालों से कहीं बेहतर हैं।
Keyword: diamond, gold, jewellers, GST,,
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