बिजनेस स्टैंडर्ड - बढ़ रहा घरेलू पेमेंट सिस्टम का दबदबा
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बढ़ रहा घरेलू पेमेंट सिस्टम का दबदबा

अद्वैत राव पालेपू / मुंबई 11 11, 2018

बदलाव की ओर

पीछे छूट रहे हैं वीजा, मास्टरकॉर्ड और अमेरिकन एक्सप्रेस

खुदरा दुकान में यूपीआई और रुपे से भुगतान 65.2 प्रतिशत हुआ

बिजनेस स्टैंडर्ड बढ़ रहा घरेलू पेमेंट सिस्टम का दबदबाखुदरा कारोबार के लेन देन में घरेलू पेमेंट सिस्टम तेजी से जगह बना रहे हैं। अब वैश्विक प्रतिस्पर्धियों जैसे मास्टरकार्ड, वीजा और अमेरिकन एक्सप्रेस को देसी दिग्गजों से कड़ी टक्कर मिल रही है। खुदरा दुकानों पर डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड से होने वाले भुगतान में रुपे और यूपीआई (यूनीफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) के माध्यम से भुगतान की हिस्सेदारी अगस्त 2018 के आखिर तक 65.2 प्रतिशत पहुंच गई है।  

यूपीआई का इस्तेमाल बी2सी, बी2बी और सी2सी लेनदेन में होता है और बैंक से सीधे हस्तांतरण होता है, वहींं रुपे कार्ड योजना भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) द्वारा वैश्विक दिग्गजों से प्रतिस्पर्धा के लिए पेश की गई है। 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी के दो साल पूरे होने के मौके पर ब्लॉग में लिखा था, 'आज वीजा और मास्टरकार्ड की भारत के बाजार में हिस्सेदारी कम हो रही है और यूपीआई और रुपे कार्ड की हिस्सेदारी डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से होने वाले भुगतान में 65 प्रतिशत पहुंच गई है।'

नोटबंदी के कुछ महीने पहले अगस्त 2016 में यूपीआई पेश किया गया था और इसके माध्यम से लेन-देन जनवरी 2017 में 1.66 अरब रुपये और अक्टूबर 2018 के आखिर तक 750 अरब रुपये पहुंच गया। 

भारत का भुगतान बाजार 200 अरब डॉलर से कुछ कम है, जबकि चीन में यह 72 लाख करोड़ डॉलर का है। नकदी के दबदबे के बीच, जिसकी हिस्सेदारी कुल लेन देन के मूल्य मेंं करीब 70 प्रतिशत है, सरकार इलेक्ट्रॉनिक भुगतान तकनीकों को बढ़ावा देने की कवायद कर रही है, जिसे ग्राहकों का समर्थन भी मिल रहा है।  

बिजनेस स्टैंडर्ड के एक विश्लेषण के मुताबिक कैलेंडर वर्ष 2018 में अगस्त के आखिर तक खुदरा दुकानों में डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए गए सभी भुगतानों में रुपे और यूपीआई से लेन देन की हिस्सेदारी मूल्य के हिसाब से 65.2 प्रतिशत है। अगर लेन देन की संख्या के हिसाब से देखें तो यूपीआई और रुपे से लेन देन की हिस्सेदारी 78.3 प्रतिशत रही है। 

यूपीआई और रुपे से लेन देन बढऩे की एक बड़ी वजह यह है कि लेन-देन शुल्क कम होने की वजह से उद्योग जगत इसे अपना रहा है। यूपीआई के मामले मेंं हर लेन देन के लिए कोई शुल्क तय नहीं किया गया है, सिर्फ मासिक बैंक शुल्क लगते हैं, जिसका भुगतान सभी ग्राहक विभिन्न सेवाओं के लिए करते हैं। विश्लेषकों के मुताबिक कार्ड जारी करने वाले बैंक अधिकतम 3 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन शुल्क लेते हैं, जबकि रुपे उनसे सिर्फ 9 पैसे प्रति ट्रांजैक्शन लेता है। तीन महत्त्वपूर्ण विंदुओं पर ध्यान रखने की जरूरत है।

पहला, 26 अक्टूबर के आंकड़ों के मुताबिक प्रचलन में मुद्रा 19.6 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है, जबकि 4 नवंबर 2016 को यह 17.9 लाख करोड़ रुपये थी। इसका आशय यह है कि इस समय दो साल पहले की तुलना में चलन में ज्यादा मुद्रा है। दूसरी बात यह है कि उपरोक्त लेन देन के आंकड़े सिर्फ डेबिट और क्रेडिट कार्ड के हैं, जो पाइंट आफ सेल पर होते हैं।

कार्डों, खासकर डेबिट कार्डों का इस्तेमाल ऑटोमेटेड टेलर मशीनों (एटीएम) में भी होता है।  तीसरा अहम पहलू यह है कि यूपीआई से लेन देन के अक्टूबर 2018 तक के आंकड़े उपलब्ध हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के रिजïर्व बैंक के आंकड़े अगस्त के आखिर तक के हैं।   

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