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क्रेडिट कार्ड बिना भी खरीदारी करें, जब पैसा मिले तो अदा करें

प्रियदर्शिनी माजी /  November 11, 2018

जब आप कार या घर खरीद जैसा कोई बड़ा खर्च करने जाते हैं तो अक्सर आपको पे-लैटर यानी बाद में भुगतान करने की सुविधा या क्रेडिट का विकल्प मिल जाता है। इस सुविधा में आप फौरन कुछ भी खरीद सकते हैं और उसकी कीमत बाद में चुका सकते हैं। लेकिन अब यह सुविधा बड़ी खरीद तक सीमित नहीं रही है। आज की तारीख में आप 'पे लैटर' की सुविधा का इस्तेमाल कुछ भी खरीदने में कर सकते हैं। इसमें कपड़े, गैजेट, फिल्मों के टिकट या खाने की थाली जैसी मामूली खरीद तक शामिल है। 

 
एसोचैम के इसी वर्ष जारी एक अनुमान के मुताबिक देश भर में तकरीबन 12 करोड़ ऑनलाइन खरीदारों के लिए बिल चुकाना, खाना मंगाना, सफर करना और फिल्मों के टिकट बुक कराना आज जितना आसान है, उतना पहले कभी नहीं था। उनके लिए जिंदगी आसान बनाने वाली हैं लेजीपे, जेस्टमनी, सिंपल और ईपेलैटर जैसी स्टार्टअप, जो मोबाइल फोन पर अधिक समय गुजारने वाली पीढ़ी को निशाना बना रही हैं। इन कंपनियों के मुताबिक उनके अधिकतर उपभोक्ता देश के 19 सबसे बड़े शहरों से हैं और उनकी उम्र 21 से 35 साल के बीच है। 
 
पे लैटर या बाद में भुगतान करने की सेवा में आपको साइन-अप करते ही छोटी सी राशि बतौर कर्ज या क्रेडिट दे दी जाती है, जिसका इस्तेमाल आप किसी भी वक्त कर सकते हैं। सिंपल की सह संस्थापक चैत्रा चिदानंद बताती हैं, 'इन सेवाओं के इस्तेमाल का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि हर बार खरीद करने पर आपको भुगतान की थकाऊ प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता। न तो भुगतान असफल होने की बात आपको परेशान करती है और न ही आपको बार-बार सत्यापन यानी वेरिफिकेशन की खीझ से और खरीदारी का मजा किरकिरा करने वाले दूसरे झंझटों से जूझना पड़ता है।' इनमें से अधिकतर स्टार्ट-अप कंपनियों ने एमेजॉन, फ्लिपकार्ट, श्याओमी, मिंत्रा, मेकमाईट्रिप अैर यात्रा जैसे बड़े डिजिटल ब्रांडों के साथ साझेदारी कर ली है और उनके प्लेटफॉर्म से झटपट कर्ज (इंस्टेंट क्रेडिट) मुहैया कराती हैं। जेस्टमनी की मुख्य कार्य अधिकारी और सह-संस्थापक लिजी चैपमैन कहती हैं कि आम छोटे कर्जों की तुलना में पे-लैटर सेवाएं अधिक तेज और आसान होती हैं। अगर कोई पुराने तरीके से कर्ज लेने जाता है तो उसे कई तरह की जानकारी देनी पड़ती है। उसे बताना पड़ता है कि उसे कितना कर्ज चाहिए, उसका क्रेडिट स्कोर क्या है और उस रकम का इस्तेमाल वह किस काम में करेगा। मगर पे-लैटर ऐप्स केवल आपकी निजी जानकारी और बैंक संबंधी जानकारी देखकर ही क्रेडिट लिमिट यानी उधारी सीमा तय कर देते हैं।
 
क्रेडिट लिमिट इस बात से तय होती है कि अधिक से अधिक कितना उधार वापस चुकाने की क्षमता उपभोक्ता के भीतर है। यह क्षमता पंजीकरण के समय दिए गए विवरण के आधार पर जांची जाती है। चैपमैन बताती हैं, 'यूजर के बैंक खातों से जानकारी इक_ा की जाती है और उसके आधार पर क्रेडिट लिमिटेड खुद ही बढ़ या घट जाती है। हो सकता है कि किसी यूजर को केवल 5,000 रुपये की क्रेडिट लिमिट दी जाए क्योंकि यह बदलती रहती है और कर्ज चुकने के साथ ही बढ़ती या घटती रहती है।' यही वजह है कि जो लोग क्रेडिट के मामले में एकदम नए होते हैं, उन्हें शुरुआत की कुछ खरीद में बहुत कम क्रेडिट राशि मिलती है। लेकिन वक्त पर मासिक किस्तें चुका देंगे तो आपकी क्रेडिट लिमिट बढ़ जाएगी और बाद में आप बड़ी खरीद के लिए भी उसका इस्तेमाल कर पाएंगे।
 
पे-लैटर ऐप्स से आपको अपनी सभी खरीद या लेनदेन एक साथ लाने और उनका एकमुश्त भुगतान करने की सहूलियत भी मिल जाती है। उदाहरण के लिए लेजीपे हर महीने की 1 तारीख और 16 तारीख को समूचे खर्चों का एकमुश्त बिल मुहैया कराती है। आप खरीद या लेनदेन के बाद से बिल की अगली तारीख तक किसी भी समय भुगतान कर सकते हैं और विलंब शुल्क से बच सकते हैं। ऐसी ज्यादातर स्टार्ट-अप कर्ज चुकाने के लिए 15-20 दिन का ब्याज मुक्त समय देती हैं। लेकिन आप आखिरी तारीख तक भुगतान से चूक गए तो आप पर अच्छा-खासा विलंब शुल्क चढ़ सकता है। ईपेलैटर भुगतान के लिए 14 दिन का ब्याजरहित समय देता है। तब तक रकम नहीं चुकाई गई तो 3 फीसदी मासिक की दर से विलंब शुल्क वसूला जाता है। लेजीपे के ग्राहक अगर तय मियाद में कर्ज नहीं चुका पाए तो उन्हें तीन दिन और दिए जाते हैं, लेकिन हर दिन के एवज में 10 रुपये बतौर जुर्माना वसूले जाते हैं। चैत्रा कहती हैं, 'यह सुविधा उस वक्त अच्छी रहती है, जब कम कीमत वाले सौदे बार-बार किए जाते हैं, जैसे खाना ऑर्डर करना, राशन मंगाना और खरीदारी करना।' पे-लैटर कंपनियां कई बार तो 300 रुपये जितना छोटा कर्ज भी दे देती हैं। इन स्टार्ट-अप की कमाई विलंब शुल्क के तौर पर लगने वाले जुर्माने, देर में उधारी चुकाने वालों से मिलने वाले ब्याज (करीब 3 फीसदी) और व्यापारियों से मिलने वाले कमीशन से होती है। लेकिन इनमें खरीदारी करने या उधार चुकाने के लिए क्रेडिट कार्ड जितना वक्त नहीं मिलता। क्रेडिट कार्ड में मासिक चक्र होता है यानी महीने में एक बार बिल आता है, जिससे बिल चक्र की शुरुआत में ही खरीदारी करने पर चुकाने के लिए पूरा 1 महीना मिल जाता है। लेकिन पे-लैटर स्टार्ट-अप में बिल चक्र 15 दिन का ही होता है।
 
बहरहाल इनके विकास की अच्छी खासी संभावनाएं नजर आ रही हैं। विशेषज्ञों का लगता है कि क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए बाकायदा क्रेडिट स्कोर और क्रेडिट रेटिंग की जरूरत होने के कारण भारत में उसके आवेदन बड़ी तादाद में ठुकराए जाते हैं। ठुकराए गए लोगों की जरूरतों को पे-लैटर स्टार्ट-अप पूरा कर सकते हैं। इसीलिए वे ऐसे लोगों के लिए उधारी का और छोटी रकम के औपचारिक कर्ज का बाजार लपकने की कोशिश कर रही हैं। जेस्टमनी की चैपमैन पे-लैटर ऐप्स और मोबाइल वॉलटे के बीच फर्क को समझाती हैं। वह कहती हैं कि मोबाइल वॉलेट से भुगतान तभी किया जा सकता है, जब उसमें पैसे पड़े हों। जितनी रकम पड़ी है, उससे ज्यादा का भुगतान किया भी नहीं जा सकता। लेकिन पे-लैटर ऐप्स आपको फौरन कर्ज मुहैया कराती हैं, चाहे आपकी जेब या खाते में पैसा हो या नहीं हो। 
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