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यात्रा करें तो जोखिम का भी बीमा करा लें

प्रियदर्शिनी माजी /  November 11, 2018

सैर-सपाटे के लिए गए मुंबई के नगीन पारेख को उस समय तगड़ी चोट लग गई, जब उनका गर्म हवा का गुब्बारा दुर्घटनाग्रस्त हो गया। लेकिन चोट से ज्यादा तकलीफ पारेख को उस समय हुई, जब इलाज के बदले बीमा का उनका दावा जिला उपभोक्ता विवाद समाधान फोरम ने ठुकरा दिया। फोरम का कहना था कि गुब्बारे में उडऩा 'हानिकारक हरकत' थी, इसलिए इसमें बीमा का दावा नहीं बनता। देश-विदेश में तफरीह के लिए जाने वाले अधिकतर लोग आजकल यात्रा बीमा खरीदते हैं। लेकिन उनमें से अधिकतर केवल प्रीमियम पर नजर डालते हैं और पॉलिसी दस्तावेज में दी गई बारीक बातों को बिल्कुल अनदेखा कर देते हैं। पारेख को भी नहीं पता था कि गर्म हवा के गुब्बारे में सैर करते समय लगी चोट बीमा के तहत नहीं आती है। इसलिए एडवेंचर भरी छुट्टियों पर जानो से पहले जांच लीजिए कि आपके यात्रा बीमा में क्या आता है और क्या उसके दायरे से बाहर है।

 
यात्रा बीमा पॉलिसियों में आम तौर पर एडवेंचर यानी जोखिम भरी या खेलकूद की गतिविधियां जैसे बंजी जंपिंग, पैराग्लाइडिंग, पर्वतारोहण या राफ्टिंग को कवर नहीं किया जाता क्योंकि उन्हें हानिकारक गतिविधि माना जाता है। लेकिन अचानक तबियत खराब होने को इन पॉलिसियों में शामिल किया जाता है। टाटा एआईजी जनरल इंश्योरेंस में कार्यकारी उपाध्यक्ष एवं हेड - कंज्यूमर लाइंस पराग वेद कहते हैं, 'यात्रा बीमा पॉलिसियों का ध्यान यात्रा के दौरान अचानक बीमार होने या चोट लगने की सूरत में होने वाले चिकित्सा खर्च पर होता है।'
 
अगर देश में सैर के दौरान आप दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं तो अस्पताल में भर्ती होने के दौरान हुआ खर्च आपको स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी के जरिये वापस मिल जाएगा। पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के मुख्य व्यापार अधिकारी, सामान्य बीमा तरुण माथुर कहते हैं, 'यात्रा बीमा असल में इन्हीं फायदों वाली विदेश स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी होती है। अंतर यही है कि दुर्घटना होने की सूरत में अस्पताल में भर्ती होने का खर्च तभी मिलता है, जब यह सब विदेश में हुआ हो।' साथ ही अधिकतर बीमा कंपनियां पहले से मौजूद बीमारी की सूरत में दावा ठुकरा देती हैं। लेकिन कुछ कंपनियां प्राणघातक स्थितियों में कवर मुहैया कराती हैं। उदाहरण के लिए टाटा एआईजी की यात्रा बीमा पॉलिसी में पहले से मौजूद बीमारी के लिए 1,500 डॉलर तक का कवर मिलता है बशर्ते जीने-मरने की स्थिति बन गई हो।
 
यात्रा बीमा पॉलिसियां चिकित्सा से इतर मामलों के लिए भी कवर मुहैया कराती हैं। इनमें यात्रा रदद होना, उड़ान में विलंब होना, सामान खोना, पासपोर्ट खोना, अपहरण होना शामिल है। लेकिन इन सभी में कुछ शर्तें और सीमाएं शामिल हैं। लोगों को अक्सर पॉलिसी आरंभ होने की तारीख और अपनी छुट्टी के पहले दिन में भ्रम रहता है। उदाहरण के लिए अगर कोई यात्रा शुरू होने से पहले ही रद्द कर दी गई है तो यात्रा बीमा कंपनी यह कहकर आपको मुआवजा देने से इनकार कर सकती है कि अभी तो पॉलिसी कवर शुरू ही नहीं हुआ था।
 
यदि आपका सामान या पासपोर्ट चोरी हो जाए या गुम जाए तो इसका पता चलते ही पुलिस से रिपोर्ट की प्रति लें और बीमा कंपनी को बताएं। अगर आप एक निश्चित अवधि में ऐसा नहीं करते तो आपका बीमा दावा खारिज हो सकता है। तय अवधि में सब कुछ करने के बाद भी अगर बीमा कंपनी को लगता है कि यह सब आपकी लापरवाही से हुआ तो वह दावा खारिज कर सकती है। कुछ बीमा कंपनियों के पॉलिसी दस्तावेज में 'योर एक्सेस' नाम का कॉलम भी होता है। यह दरअसल वह राशि होती है, जो आपको बीमा वाली छुट्टियों के दौरान दावा करने पर चुकानी पड़ती है। मिसाल के लिए अगर आपने 10,000 रुपये का दावा किया और 'योर एक्सेस' राशि 4,000 रुपये है तो बीमा कपंनी केवल 6,000 रुपये देगी। बाकी 4,000 रुपये आपको अपनी जेब से भरने होंगे।
 
अलग-अलग कंपनियां बीमा पॉलिसी में अलग-अलग घटकों को रखती और बाहर करती हैं। कहीं-कहीं रियायत भी दे दी जाती है। आईसीआईसीआई लोंबार्ड में प्रमुख - अंडरराइटिंग, दावे, पुनर्बीमा एवं एक्चुअरी संजय दत्ता कहते हैं, 'जरूरत लगे तो अंडरराइटर की मंजूरी लेनी चाहिए और पॉलिसी से बाहर रखे गए घटकों को अतिरिक्त प्रीमियम चुकाकर शामिल करा लेना चाहिए।' लेकिन समूचा सामान गुम हो जाने जैसी कुछ ऐसी घटनाएं भी होती हैं, जिन्हें अतिरिक्त प्रीमियम लेकर भी पॉलिसी में शामिल नहीं किया जाता।
Keyword: insurance, travel, tourism,,
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