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नए संवत मेंबाजार में बना रहेगा उतार-चढ़ाव

समी मोडक /  November 11, 2018

पिछले दो महीनों को छोड़कर संवत 2074 का ज्यादातर समय शेयर बाजार निवेशकों के लिए अच्छा रहा। हिंदू बहीखाता वर्ष के पहले 10 महीनों में प्रमुख सूचकांकों में 15 प्रतिशत की तेजी आई और घरेलू निवेशकों द्वारा म्युचुअल फंडों में मजबूत प्रवाह की मदद से ये सूचकांक अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर पहुंच गए। वैश्विक और घरेलू चिंताओं की वजह से सितंबर और अक्टूबर में बिकवाली दर्ज की गई और बीएसई के सेंसेक्स और निफ्टी-50 सूचकांक वर्ष के दौरान दर्ज की गई बढ़त कायम नहीं रख पाए।

 
चूंकि बाजार संवत 2075 में प्रवेश कर चुके हैं और कई चिंताएं बरकरार हैं। केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक सख्ती, वैश्विक व्यापार से जुड़े तनाव और चीन के नेतृत्व में विश्व आर्थिक वृद्घि की रफ्तार पर दबाव कुछ ऐसे बाहरी कारक हैं जो बाजार की चाल प्रभावित कर सकते हैं। वहीं घरेलू मोर्चे पर, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये में कमजोरी के बीच चालू खाता और राजकोषीय घाटा, सुस्त कॉरपोरेट आय वृद्घि संबंधी चिंताओं और महंगे शेयर मूल्यांकन ने उम्मीदों को धूमिल किया है। इसके अलावा आईएलऐंडएफएस के दिवालिया होने की वजह से एनबीएफसी नकदी संकट गहराने से भी निवेशक धारणा प्रभावित हुई।
 
हाल में समाप्त संवत मजबूती के साथ शुरू हुआ था, पर इसका समापन उतार-चढ़ाव के साथ हुआ। नए वर्ष में भी उतार-चढ़ाव बना रहेगा, कम से कम 2019 के आम चुनाव की समाप्ति तक हालात अस्थिर बने रह सकते हैं। इसके अलावा बाजार की दिशा तेल कीमतों, अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड प्रतिफल तथा नकदी की स्थिति जैसे अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगी। राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों के परिणाम से भी बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी। ज्यादातर विश्लेषकों को शेयर बाजारों के वर्ष के ज्यादातर समय में सीमित दायरे में रहने का अनुमान है। उनके अनुसार पूरे वर्ष का प्रतिफल एक अंक में रह सकता है।
 
कई समस्याओं को देखते हुए, ब्रोकरों ने अपने एक वर्षीय सेंसेक्स और निफ्टी लक्ष्यों को हाल में बदला है। नोमुरा ने निफ्टी के लिए अपना 12 महीने का लक्ष्य 11,900 से घटाकर 11,270 कर दिया है। गोल्डमैन सैक्स ने भी हाल में भारतीय बाजारों के लिए अपने नजरिये को 'ओवरवेट' से घटाकर 'मार्केटवेट' किया है। गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि भारतीय बाजारों के लिए ऊंचे मूल्यांकन ने रिस्क-रिवार्ड को कम अनुकूल बना दिया है। एडलवाइस का मानना है कि भारतीय बाजार अगले 12 महीनों के दौरान सीमित दायरे में रहेंगे और अगले साल मई में आम चुनाव से पहले निफ्टी 9800 और 10,500 के बीच रहेगा। बाजार के लिए मुख्य चिंता विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा बिकवाली को लेकर है, जो पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बाजारों के लिए मुख्य वाहक रहे हैं। कमजोर नकदी हालात के दौरान उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह में सुधार के बाद अब फिर से रुझान अमेरिका की तरफ बढ़ रहा है। 10 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड पर ऊंचे प्रतिफल ने इक्विटी जैसी जोखिमपूर्ण परिसंपत्तियों का आकर्षण फीका किया है।
 
संवत 2074 के दौरान एफआईआई ने घरेलू शेयरों से 255 अरब रुपये निकाले। जहां म्युचुअल फंडों ने 1.4 लाख करोड़ रुपये की खरीदारी से समर्थन मुहैया कराया, लेकिन यह बाजारों में तेज गिरावट को थामने के लिए पर्याप्त नहीं था। हालांकि इक्विटी एमएफ योजनाओं में प्रवाह मजबूत हुआ है, लेकिन इसे लेकर चिंता बरकरार है कि ये प्रवाह नरम पड़ सकता है। यूबीएस सिक्योरिटीज इंडिया में इक्विटी शोध प्रमुख गौतम छाछरिया कहते हैं, 'हमारा यह मानना नहीं है कि ताजा नकदी संकट लंबे ऋण संकट में तब्दील होगा, हालांकि पिछले तीन-चार वर्षों का पूंजी तक आसान पहुंच का समय बीत चुका है। दो अनिश्चितताएं बरकरार हैं -  क्या 2019 में मोदी की जीत होगी और म्युचुअल फंडों में रिटेल प्रवाह कैसा रहेगा।' 
 
बाजार कारोबारियों का कहना है कि चुनाव आने वाले वर्ष में बाजार के लिए मुख्य थीम होगा। अगले महीने के राज्य चुनावों से बाजार कारोबारियों की नजर राजनीतिक हालात में होने वाले संभावित बदलाव पर लगी रहेगी।  बाजार की रेटिंग में कमी आई है क्योंकि निफ्टी अब अपने एक वर्षीय आय अनुमानों के 16 गुना पर कारोबार कर रहा है जो अगस्त के 20 प्रतिशत से कम है। हालांकि मौजूदा मूल्यांकन दीर्घावधि औसत के नजदीक है, लेकिन बाजार कारोबारी चुनाव परिणाम के आश्चर्यजनक होने की स्थिति में मूल्यांकन में गिरावट की आशंका से इनकार नहीं कर रहे हैं। 
 
इन्वेस्टेक कैपिटल में इंस्टीट्यूशनल सेल्स (इंडिया) के प्रमुख मुकुल कोछड़ का कहना है, 'यदि अगले साल के चुनाव में अस्थिर परिणाम सामने आता है तो उस स्थिति में मूल्यांकन अल्पावधि में कमजोर पड़ सकता है। बाजार के नजरिये से, स्थिर और मजबूत सरकार का गठन सकारात्मक है। मौजूदा समय में सिर्फ मजबूत सरकार की संभावना सिर्फ भाजपा के नेतृत्व में ही दिख रही है। यदि इसके अलावा अन्य मजबूत परिणाम सामने आता है तो वह भी बुरा नहीं है।' मॉर्गन स्टैनली में भारतीय शोध प्रमुख रिधम देसाई कहते हैं, 'चुनाव को लेकर बाजार शांत नहीं दिख रहे हैं।' बाजार में फिलहाल संभावित गठबंधन परिणाम का असर पूरी तरह से नहीं दिखा है। यदि ऐसा हुआ तो ज्यादा उतार-चढ़ाव दिखेगा। 
Keyword: gold,सराफा बाजार, आभूषण,
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