बिजनेस स्टैंडर्ड - आरबीआई से नहीं मांगा पैसा
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आरबीआई से नहीं मांगा पैसा

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली November 09, 2018

सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ जारी गतिरोध के बीच अपना रुख नरम करने का संकेत देते हुए आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने आज कहा कि केंद्रीय बैंक से कोई निर्दिष्ट राशि हस्तांतरित कराने का सरकार का कोई प्रस्ताव नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के साथ समुचित आर्थिक पूंजी ढांचा तय करने पर चर्चा की जा रही है। वित्त मंत्रालय द्वारा आरबीआई अधिनियम की धारा 7 के संदर्भ में मीडिया में लगातार आ रही खबरों के बीच गर्ग का ट्विटर पर यह बयान आया है। हालांकि बिज़नेस स्टैंडर्ड को सूत्रों से पता चला है कि आर्थिक पूंजी ढांचे पर चर्चा के तहत सरकार ने अपनी गणना के आधार पर आरबीआई से कहा है कि अगर वह अपने फॉर्मूले में बदलाव करता है तो 3.6 लाख रुपये मुक्त किए जा सकते हैं। कितनी रकम का भुगतान किया जा सकता है, इसका निर्णय केंद्रीय बैंक को ही करना है।
 
शीर्षस्थ सूत्रों ने बताया कि गर्ग के ट्वीट के बावजूद यह रुख नहीं बदला है। सरकार आरबीआई से अतिरिक्त पूंजी की मांग पर समझौता नहीं करेगी, लेकिन भुगतान की राशि को लेकर लचीला रुख अपना सकती है। गर्ग ने ट्वीट किया, 'मीडिया में अटकलें चल रही हैं। सरकार का राजकोषीय हिसाब-किताब बिल्कुल सही दिशा में है। आरबीआई से 3.6 या एक लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित कराने का कोई प्रस्ताव नहीं है। आर्थिक पूंजी के बारे में एक उपयुक्त व्यवस्था तय करने के बारे में आरबीआई से बात हो रही है।' गर्ग ने ट्वीट किया, 'वर्ष 2013-14 में सरकार का राजकोषीय घाटा जीडीपी के 5.1 फीसदी के बराबर था। 2014-15 से सरकार इसमें लगातार कमी करती आ रही है। हम वित्त वर्ष 2018-19 के अंत में राजकोषीय घाटे को 3.3 फ ीसदी तक सीमित कर देंगे। सच तो यह है कि सरकार ने इस साल बाजार से 70 हजार करोड़ रुपये जुटाने की योजना को भी छोड़ दिया है।'
 
अधिकारियों ने कहा कि सरकार लंबे समय में नई आर्थिक पूंजी ढांचा लाने को कह रही है, जिसके आधार पर यह तय होगा कि प्रणालीगत जोखिमों से निपटने और सरकार को लाभांश का भुगतान के लिए आरबीआई के पास कितनी अतिरिक्त पूंजी रहनी चाहिए। सरकार चाहती है कि आरबीआई अपनी पूंजी जरूरतों की गणना का फॉर्मूला बदले। सरकार 19 नवंबर को होने वाली आरबीआई की बोर्ड बैठक में केंद्रीय बैंक पर नया मॉडल नई लाभांश नीति अपनाने पर जोर दे रही है। मौजूदा नियमों के अनुसार आरबीआई अपनी अतिरिक्त पूंजी हर साल लाभांश के तौर पर सरकार को देता है। जुलाई 2016 से जून 2017 के दौरान उसने 306 अरब रुपये केंद्र सरकार को हस्तांतरित किए हैं। जुलाई 2017-जून 2018 में कुल 500 अरब रुपये दिए गए हैं। सरकार की ओर से अतिरिक्त अधिशेष की मांग लंबे समय की जा रही है। 2016-17 की आर्थिक समीक्षा में तत्कालीन मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणयन ने कहा था, 'आरबीआई के पास अतिरिक्त पूंजी क्यों रहनी चाहिए इसकी कोई खास वजह नहीं है। मौजूदा स्तर पर आरबीआई के पास पहले से ही काफी ज्यादा पूंजी है।'
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