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नकदी संकट से निपटने में जुटा एमएफआईएन

नम्रता आचार्य / कोलकाता November 09, 2018

माइक्रोफाइनैंस क्षेत्र के नकदी संकट से निपटने के लिए एमएफआई का प्रतिनिधि संगठन माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क (एमएफआईएन) करीब 5 अरब रुपये के बंडल्ड सिक्योरिटाइजेशन पोर्टफोलियो की सुविधा पर विचार कर रहा है, जिसे बैंकों को बेचा जा सके। बीते कुछ समय में यह पहला मौका है जब एमएफआई नकदी बढ़ाने के लिए बैंकों को बंडल्ड पोर्टफोलियो बेचने के लिए एक साथ आ रहे हैं। प्रस्ताव के मुताबिक एमएफआई के कर्ज खाते को, जो ज्यादातर छोटे व मझोले आकार के हैं, एक पूल में समेकित किया जाएगा और इसे बैंकों को बेचने की पेशकश की जाएगी। बैंक इसके बदले एमएफआई पोर्टफोलियो खरीदेंगे। सामान्यतया बैंक इस तरह के पूल द्विपक्षीय या किसी संबंधित एमएफआई से सौदे कर खरीदते हैं, जिससे उनका प्राथमिक क्षेत्र के कर्ज का लक्ष्य पूरा हो सके। 

 
एमएफआईएन के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक प्रस्तावित पूल का करीब 70 प्रतिशत छोटे और मझोले एमएफआई के कर्ज हैं। अधिकारी ने कहा कि बड़े और मजबूत एमएफआई की हिस्सेदारी से पूल को समर्थन मिलेगा, जिससे बेहतर रेटिंग सुविधा और खरीदार मिल सकेंगे।  सूत्रों ने कहा कि एमएफआईएन इस प्रक्रिया को अगले 10 से 15 दिन में पूरा करना चाहता है।  एमएफआईएन की ओर से कर्जदाताओं, रेटिंग एजेंसियों, एनबीएफसी, निजी बैंकों और सरकारी बैंकों के साथ बुलाई गई बैठक में नकदी की स्थिति पर चर्चा के बाद 1 नवंबर को पूल बनाने का फैसला किया गया था। 
 
एमएफ आई क्षेत्र में ज्यादातर प्रतिभूतिकरण सौदे पिछली तिमाही में हुए थे क्योंकि बैंकों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को 40 प्रतिशत समायोजित शुद्ध बैंक कर्ज (एएनबीसी) का सालाना लक्ष्य पूरा करना था। एमएफआई को दिया जाने वाला कर्ज प्राथमिकता वाले क्षेत्र को दिए जाने वाला कर्ज है। सौदे के तहत जहां कर्ज को एमएफआई के बुक से बैंकोंं के बुक मेंं स्थानांतरित किया गया, वहीं कर्ज की निगरानी एमएफआई करेंगे।  छोटे और मझोले आकार की माइक्रोफाइनैंस फर्में इस समय नकदी के संकट से जूझ रही हैं। कुछ फर्मों को नए कर्ज देना बंद करना पड़ा है। मोटे अनुमान के मुताबिक करीब 29 छोटे व मझोले माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्यूशंस (एमएफआई) को अगली तिमाही में कम से कम 5 अरब रुपये की जरूरत है। 
 
पिछले महीने में एमएफआई के धन जुटाने की लागत 25 से 100 आधार अंक बढ़ी है। एमएफआईएन के आंकड़ों के मुताबिक भारत के करीब 449 अरब रुपये के माइक्रोलेंडिंग बाजार में एनबीएफसी और एमएफआई की हिस्सेदारी मोटे तौर पर 33 प्रतिशत है। माइक्रोफाइनैंस उद्योग का आकार करीब 1,481 अरब रुपये है।  पिछले कुछ महीनों के दौरान एमएफआई क्षेत्र की सालाना वृद्धि दर 40 प्रतिशत रही है। बहरहाल इस समय वे आईएलऐंडएफएस संकट के कारण नकदी के भीषण संकट से गुजर रहे हैं। 
Keyword: micro finance, MFIN,,
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