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एनबीएफसी के लिए नकदी सहजता के शुरुआती संकेत

जश कृपलानी और अभिजित लेले / मुंबई November 09, 2018

अगर वाणिज्यिक प्रतिभूतियों के बाजार से जुटाई गई रकम पर नजर डालें तो गैर-बैंकिंग फाइनैंस व हाउसिंग फाइनैंंस कंपनियों के बुरे दिन शायद पीछे छूट गए हैं। सितंबर में आईएलऐंडएफएस समूह की तरफ से भुगतान में चूक से पैदा हुए नकदी संकट के बाद वाणिज्यिक प्रतिभूतियों के बाजार में सुधार के शुररुआती संकेत मिले हैं और गैर-बैंक लेनदारों (एनबीएफसी व एचएफसी) ने अक्टूबर में 300 अरब रुपये जुटाए। इसका आधा यानी 150 अरब रुपये अक्टूबर के पिछले हफ्ते में जुटाए गए, हालांकि उच्च लागत पर ये जुटाए गए। बाजार सूत्रों ने यह जानकारी दी।
 
कंपनियों व वित्तीय कंपनियों की तरफ से वाणिज्यिक प्रतिभूतियों के जरिए जुटाई रकम के आरबीआई के आंकड़े भी धारणा में बदलाव का संकेत देते हैं। सितंबर में वाणिज्यिक प्रतिभूतियों में तेजी से कमी आने और अक्टूबर के पहले पखवाड़े में छह महीने के निचले स्तर पर आने के बाद कुछ सुधार दिखे। वाणिज्यिक प्रतिभूतियों के जरिए 31 अक्टूबर को समाप्त पखवाड़े में 949 अरब रुपये जुटाए गए, जो इससे पिछले पखवाड़े के मुकाबले 19 फीसदी ज्यादा है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने एक बयान में कहा कि पिछले दो हफ्ते में बाजार की धारणा में बदलाव आया है और गैर-बैंकों के लिए रकम की सहजता में धीरे-धीरे सुधार हुआ है। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक कृष्णन सीतारमन ने कहा कि अक्टूबर 2018 के पिछले हफ्ते में ज्यादा वाणिज्यिक प्रतिभूतियां जारी हुईं और अगर यह प्रवृत्ति जारी रही तो रोलओवर दरें नवंबर में ज्यादा हो सकती हैं। 
 
कोटक म्युचुअल फंड की मुख्य निवेश अधिकारी (डेट) लक्ष्मी अय्यर ने भी यही राय सामने रखी। उन्होंंने कहा, अभी तीन महीने में परिपक्व होने वाली वाणिज्यिक प्रतिभूतियों की मांग है। हालांकि धारणा में निश्चित तौर पर सुधार हुआ है। वाणिज्यिक प्रतिभूतियों का बाजार नवंबर में 1 लाख करोड़ रुपये के पार निकल सकता है। 50 बड़े क्रिसिल रेटिंग वाले गैर-बैंक को नवंबर में 950 अरब रुपये के कर्ज का पुनर्भुगतान करना है। इसमें से 700 अरब रुपये वाणिज्यिक प्रतिभूतियों से जुड़ी है, जो परिपक्व हो रही है। क्रिसिल ने कहा, हालांकि कुछ गैर-बैंक कर्ज भुगतान करने के लिए बैंक की मदद के बिना तैयार हैं, वहीं अन्य को कम से कम आंशिक तौर पर बैंक की मदद से ऐसा करना पड़ सकता है।
 
मिरे एएमसी के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) महेंद्र जाजू ने कहा, एनबीएफसी के लिए नकदी की सहज है। मौजूदा पुनर्भुगतान चक्र के लिए इनके पास कवर है, लेकिन नई फंडिंग चुनौती बनी हुई है। ऐसे में उनके कारोबार के विस्तार की दर सुस्त हो सकती है। इस संबंध में आरबीआई और नैशनल हाउसिंग बैंक के हालिया कदम और एसबीआई के कदम हालांकि गैर-बैंंकों के लिए लाभकारी रहे हैं। एसबीआई ने अक्टूबर में एनबीएफसी और एचएफसी के 52.50 अरब रुपये के कर्ज की खरीद कर उन्हें नकदी मुहैया कराया है और 159.4 अरब रुपये का सौदा होना अभी बाकी है। एसबीआई ने मार्च 2019 तक गैर-बैंंक लेनदारों से 450 अरब रुपये की परिसंपत्तियां खरीदने का लक्ष्य तय किया है। यह जानकारी बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने दी।
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