बिजनेस स्टैंडर्ड - उद्योग जगत की शीर्ष कंपनियों में भर्तियों की धीमी रफ्तार
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उद्योग जगत की शीर्ष कंपनियों में भर्तियों की धीमी रफ्तार

कृष्ण कांत / मुंबई 11 08, 2018

पिछले चार वर्षों में सबसे कम वृद्धि दर

बिजनेस स्टैंडर्ड उद्योग जगत की शीर्ष कंपनियों में भर्तियों की धीमी रफ्तारअनुमान से कम रफ्तार से हुई आर्थिक रिकवरी ने देश के कॉर्पोरेट जगत में नई भर्तियों को भी प्रभावित किया है। नई भर्तियों में वृद्धि की दर पिछले चार वर्षों में सबसे कम रही है। वित्त वर्ष 2017-18 में देश की शीर्ष कंपनियों की कुल कर्मचारी संख्या में महज 1.9 फीसदी की वृद्धि ही दर्ज की गई है। वहीं 2016-17 में वार्षिक वृद्धि दर 3.5 फीसदी रही थी जबकि उसके एक साल पहले यह 4.6 फीसदी की दर से बढ़ी थी। मार्च 2018 के आखिर में करीब 35 लाख कर्मचारी देश की शीर्ष 171 सूचीबद्धï कंपनियों में नियुक्त थे। बीएसई 200 की सूची में शामिल केवल उन्हीं कंपनियों के आंकड़े इस सैंपल में शामिल किए गए हैं जिनके छह वर्षों के ब्योरे उपलब्ध हैं।

कैपिटालाइन के पास उपलब्ध आंकड़े और इन कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट में दी गई सूचनाओं के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। खास बात यह है कि इनमें मोटे तौर पर स्थायी कर्मचारियों की ही गिनती की गई है क्योंकि वे अपने अनुबंधित कर्मचारियों और सब-कॉन्ट्रेक्टर के बारे में जानकारी नहीं देती हैं। अधिकांश मामलों में कर्मचारियों के आंकड़े सूचीबद्ध समूहों की मूल फर्मों एवं परिचालन कंपनियों के ही हैं और उनमें घरेलू या विदेशी अनुषंगी इकाइयों को शामिल नहीं किया गया है।

पिछले वित्त वर्ष में इन कंपनियों में कुल मिलाकर 64,380 कर्मचारी शामिल हुए जो एक साल पहले के 1.16 लाख और 2015-16 के 1.46 लाख भर्तियों की तुलना में काफी कम है। हालांकि वित्त वर्ष 2013-14 रोजगार बाजार के लिए काफी अच्छा रहा था। उस वित्त वर्ष में इन 171 सूचीबद्ध कंपनियों के साथ 1.83 लाख नए कर्मचारी जुड़े थे जो 2012-13 की तुलना में 6.2 फीसदी अधिक था। विशेषज्ञों का मानना है कि नई भर्तियों में आई कमी की वजह औद्योगिक एवं ढांचागत क्षेत्रों में आई सुस्ती है। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग के विस्तार की धीमी रफ्तार ने भी नई भर्तियों को कम किया है।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम कहते हैं, 'कुछ साल पहले तक ढांचागत क्षेत्र खास तौर पर निर्माण गतिविधियां निचले स्तर पर रोजगार सृजन के मामले में सबसे आगे होती थीं। वहीं आईटी सेवाओं की निर्यातक कंपनियों में ऊंचे वेतन के स्तर पर सर्वाधिक नए अवसर पैदा होते थे। लेकिन अब ये दोनों ही क्षेत्र वृद्धि के मामले में नीचे की ओर हैं।'

ऐसी स्थिति में वित्त वर्ष 2017-18 में नई भर्तियों के मामले में सर्वाधिक अवसर बजाज फाइनैंस, एडलवाइस फाइनैंशियल सर्विसेज, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस और दीवान हाउसिंग फाइनैंस जैसी गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों वाले खुदरा ऋणदाताओं ने दिए। उनके बाद एचडीएफसी स्टैंडर्ड लाइफ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस जैसी बीमा कंपनियों का स्थान रहा। वित्तीय सेवा क्षेत्र में कुल रोजगार अवसर वर्ष 2016-17 की तुलना में 5.6 फीसदी बढ़कर  9.22 लाख रहा। इस उद्योग में सक्रिय कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष में 49,212 नए लोगों को रोजगार दिया लेकिन संख्या के लिहाज से यह एक साल पहले के 52,561 भर्तियों से कम ही रहा। नए रोजगार अवसरों के सृजन के मामले में वित्तीय सेवा क्षेत्र ने आईटी सेवा क्षेत्र को भी पीछे छोड़ दिया। गौरतलब है कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस और विप्रो जैसी आईटी कंपनियों का नए रोजगार पैदा करने के मामले में दबदबा रहा है। लेकिन वित्त वर्ष 2017-18 में पैदा हुए कुल नए रोजगार अवसरों में से तीन-चौथाई अकेले वित्तीय सेवा क्षेत्र से थे।

इसकी तुलना में शीर्ष आईटी सेवा निर्यातक कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष में महज 6,776 नई भर्तियां ही कीं जो कुल भर्तियों का महज 10 फीसदी ही है। पिछले वर्षों के प्रदर्शन को देखें तो आईटी सेवा उद्योग हरेक 10 में से छह नए रोजगार अवसर पैदा करता था।घरेलू विनिर्माता कंपनियों में नियुक्त कुल कर्मचारियों की संख्या में 0.5 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी देखी गई जबकि वर्ष 2016-17 में यह दर 0.3 फीसदी रही थी। लेकिन वर्ष 2015-16 में हासिल 2.3 फीसदी की वृद्धि दर की तुलना में 2017-18 का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा। विनिर्माण क्षेत्र में शामिल नए कर्मचारियों की संख्या 8,392 रहा जो 2016-17 की 4,718 नई भर्तियों से बेहतर है। हालांकि विशेषज्ञों को आशंका सता रही है कि वित्तीय सेवा क्षेत्र में नई भतियां बढऩे के बावजूद आईटी क्षेत्र में आई सुस्ती की भरपाई कर पाना मुमकिन नहीं हो पाएगा।

चोकालिंगम कहते हैं, 'भारत में आईटी सेवा क्षेत्र कर्मचारियों की सर्वाधिक सघनता वाला उद्योग है। इन कंपनियों का करीब आधा राजस्व वेतन एवं मेहनताने पर ही व्यय होता है। इसके अलावा बैंकों एवं गैर-बैकिंग कंपनियों के मुकाबले आईटी कंपनियों में औसत वेतन भी काफी अधिक होता है। इन कारणों से आईटी उद्योग भारतीय कॉर्पोरेट जगत में आर्थिक नजरिये से बेहद असरदार क्षेत्रों में शामिल है।' वित्तीय सेवा उद्योग की वृद्धि वृहद-आर्थिक बदलावों से व्यापक पैमाने पर प्रभावित होती है। ब्याज दर एवं विनिमय दर जैसे कारक इसकी वृद्धि पर असर डालते हैं। इसकी तुलना में आईटी सेवा उद्योग काफी हद तक स्थिर रहता है और निवेशक इन्हें रक्षात्मक क्षेत्र के तौर पर देखते हैं।

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