बिजनेस स्टैंडर्ड - सरकारी बैंकों का एनपीए दूसरी तिमाही में भी घटा
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, November 16, 2018 02:57 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

सरकारी बैंकों का एनपीए दूसरी तिमाही में भी घटा

अभिजित लेले / मुंबई November 08, 2018

बैंकों की परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। लगातार दूसरी तिमाही में 30 बैंकों की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां 103 अरब रुपये घटी है, जिन्होंने दूसरी तिमाही के नतीजे घोषित किए हैं। हालांकि इसमें गिरावट की मात्रा जून तिमाही के मुकाबले कम रही क्योंकि तब इन बैंकों के एनपीए में 173 अरब रुपये की कमी दर्ज हुई थी। यह जानकारी बीएस रिसर्च के विश्लेषण से मिली। बैंकरों ने कहा कि संपत्ति गुणवत्ता का चक्र बेहतर पुनर्भुगतान के असर को प्रतिबिंबित कर रहा है। इससे पहले बैंकों ने सख्ती से इस पर नजर रखना शुरू किया था और एकमुश्त भुगतान के जरिए निपटान और संपत्ति पुनर्गठन कंपनियों को कर्ज की बिक्री पर जोर देना शुरू किया था। इसके अलावा बैंकों ने वैसे एनपीए को बट्टे खाते में डाल दिया है, जिसके लिए 100 फीसदी प्रावधान किया जा चुका है।
 
साथ ही जिन कंपनियों के कर्ज को फंसा कर्ज माना गया है उनमें से कई में सुधार दिखने लगे हैं और उन्हें उन्नत कर मानक परिसंपत्तियों की श्रेणी में लाया गया है। बैंकरों ने कहा, ऐसे में यह मानने का कारण है कि परिसंपत्ति गुणवत्ता का चक्र सुधरा है। देना बैंक के कार्यकारी निदेशक रमेश सिंह ने कहा कि कुछ कॉरपोरेट खातों मसलन स्टील जैसे क्षेत्र में समाधान से फंसे कर्ज की रकम घटी है। 500 अरब रुपये से इससे ज्यादा कर्ज वाले ऐसे बड़े खातों का समाधान तीसरी व चौथी तिमाही में होने की संभावना है। इससे सकल एनपीए में और कमी आएगी।
 
भारतीय स्टेट बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता का प्रोफाइल दूसरी तिमाही में सुधरा है। बैंक का सकल एनपीए क्रमिक तौर पर घटकर दूसरी तिमाही में 9.95 फीसदी (2.05 लाख करोड़ रुपये) रह गया है, जो पहली तिमाही में 10.69 फीसदी (2.12 लाख करोड़ रुपये) रहा था। निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक का सकल एनपीए अनुपात दूसरी तिमाही में 8.54 फीसदी रहा, जो इससे पिछली तिमाही के 8.81 फीसदी के मुकाबले कम है। ऐसा ही सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ बड़ौदा के मामले में देखा गया है।
 
बैंक ऑफ बड़ौदा का सकल एनपीए दूसरी तिमाही में क्रमिक तौर पर घटकर 11.78 फीसदी रहा, जो इससे पिछली तिमाही में 12.46 फीसदी रहा था। एक सरकारी बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, एनपीए चक्र मेंं सुधार का यह मतलब नहीं है कि आगे ऐसा नहीं होगा। कुछ खाते एनपीए हो सकते हैं या कारोबार की विपरीत चाल के चलते वहां दबाव का संकेत मिल सकता है। आगामी तिमाहियों में ये चीजें हालांकि कम रह सकती हैं। एनपीए के लिए प्रावधान भी दूसरी तिमाही में पहली तिमाही के मुकाबले 30 फीसदी घटा है। दूसरी तिमाही में इन्होंने 507 अरब रुपये का प्रावधान किया, जो पहली तिमाही में 576 अरब रुपये रहा था।
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या पटरी पर लौट रहा देश का निर्यात?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.