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संवत 2074 में निकला चने का दम

सुशील मिश्र / मुंबई November 06, 2018

त्योहारी मांग में तेजी और रबी सीजन में कम उत्पादन के अनुमान के कारण चने के दाम चालू महीने में भले ही 11 फीसदी बढ़ गए हैं लेकिन दीवाली से दीवाली तक के संवत वर्ष में इसके भाव सबसे ज्यादा करीब 20 फीसदी गिरे हैं। संवत 2074 में चने पर दांव लगाने वाले कारोबारियों को सबसे ज्यादा घाटा हुआ है। हालांकि नए संवत 2075 में चना मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है जिसके आसार दिखाई देने लगे हैं। संवत 2074 में चीनी करीब 16 फीसदी, काली मिर्च 13 फीसदी, गुड़ लगभग 10 फीसदी और हल्दी करीब 6 फीसदी टूट कर किसानों और कारोबारियों के लिए घाटे का सौदा साबित हुए। मटर में दांव लगाने वाले कारोबारियों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ। चना एक बार फिर दमदार होने लगा है। चने की कीमतों की उछाल अपर सर्किट के फंदे में भी फंस रही है। वायदा बाजार में महज एक सप्ताह में चने के दाम करीब 11 फीसदी बढ़कर 4,373 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गए। हाजिर बाजार में भी चना 4,248 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। हालांकि अभी भी सरकार द्वारा तय किए गए दाम (एमएसपी) से कीमतें कम है। इस वर्ष सरकार ने चने का एमएसपी 4,400 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। 
 
इस समय घरेलू बाजार में चना 4,248 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि पिछले साल दीवाली के समय चना 5,300 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था। चने के दाम गिरने की वजह दलहन फसलों का अधिक उत्पादन और कमजोर मांग को बताया जा रहा है।  देश में करीब 250 लाख टन दलहन फसलों का उत्पादन हुआ और देश में खपत भी लगभग इतनी ही है। इसके अलावा पिछले साल का स्टॉक और आयात की गई दालों ने चने सहित सभी दलहन फसलों को बाजार में कमजोर बना दिया। चने का उत्पादन करीब 110 लाख टन हुआ, विदेशी मांग भी खास नहीं थी जिसके चलते साल भर कीमतें कमजोर बनी रही है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले इसके लिए सरकार जो एमएसपी घोषित की उसका किसानों को पूरा फायदा नहीं मिल सका। सरकारी खरीद केंद्रों की कमी और सरकारी गोदाम पूरी तरह भर जाने के कारण किसानों को मजबूरी में खुले बाजार में अपनी उपज को बेचना पड़ा। चने के दाम साल भर 4,000 रुपये प्रति क्विंटल के नीचे ही बने रहे।    
 
कीमतें कम होने के कारण किसानों का चने से थोड़ा मोह भी भंग हुआ है जिसका असर रबी सीजन की बुआई में देखने को मिल रहा है। कृषि मंत्रालय के बुआई आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर तक देशभर में 22 लाख हेक्टेयर में चने की बुआई हुई है जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15.2 फीसदी कम है। कर्नाटक में 4.28 लाख हेक्टेयर और महाराष्ट्र में 8.85 लाख हेक्टेयर में चने की बुआई हुई है जो पिछले साल की तुलना में 50 फीसदी कम है।  चना उत्पादक प्रमुख राज्य राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी बुआई बहुत अच्छी नहीं हो रही है। कृषि मामलों के जानकार कहते हैं कि रबी सीजन की अभी शुरुआत हुई है इसलिए शुरुआती आंकड़ों के आधार पर कम ज्यादा का आकलन करना सही नहीं होगा। देश के करीब पांच राज्यों में सूखे की स्थिति है जो चने की फसल के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकता है। भारतीय दलहन कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों का कहना है कि सूखे की स्थिति में दूसरी फसलों की अपेक्षा चने की बुआई ज्यादा हो सकती है क्योंकि चने की खेती में ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती है। 
 
संवत 2075 में चना दमदार हो सकता है। चना कारोबारी मेहुल भाई कहते हैं कि चने की बुआई अभी शुरू हुई है और शुरुआती दौर पर ही कमजोर बुआई के संकेत आ रहे हैं। सरकार अपने गोदामों से माल खाली करने में लगी हुई है, सूखा अकाल में बदल गया तो कीमतों को मजबूती मिलेगी।  राजस्थान के संदीप राणावत कहते हैं कि बाजार में मांग जोर पकड़ रही है जिसे देखते हुए कहा जा सकता है कि अगले एक दो महीने में ही चना 5,000 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच सकता है। 
Keyword: agri, farmer, crop, chana,
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