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विद्युतीकरण व उद्योगों ने बढ़ाई बिजली की मांग

श्रेया जय और शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली November 06, 2018

उद्योग की ओर से सुस्त पड़ी मांग बहाल होने और विद्युतीकरण अभियान के कारण बिजली की मांग बढ़ रही है। चालू साल के अप्रैल-सितंबर के दौरान बिजली की मांग में 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह 5 साल की सबसे तेज बढ़ोतरी है।  पिछले 5 साल के अप्रैल सितंबर के दौरान सबसे ज्यादा बिजली की मांग की धारणा पर नजर डालें तो दिलचस्प परिणाम आते हैं। पिछले 5 साल में बिहार में 71 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो सभी राज्यों में सबसे ज्यादा है। विद्युतीकरण के मामले में बिहार सबसे नीचे था, लेकिन पिछले महीने राज्य ने सभी घरों के विद्युतीकरण की घोषणा की। तेलंगाना और ओडिशा में 40 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में 30 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई है। 
 
नाम न दिए जाने की शर्त पर एनटीपीसी के एक अधिकारी ने कहा, 'कुछ नकारात्मक वजहोंं से औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र में बिजली की मांग कम या स्थिर हो गई ती, जो अब फिर से सामान्य की ओर है। नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने का उद्योगोंं पर असर पहले रहा होगा, जो अब सामान्य हो रहा है।' उन्होंने कहा कि चालू साल में गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बिजली की मांग बढ़ी है और ज्यादातर दक्षिण भारतीय दाय्तों में औद्योगिक मांग गति पकड़ रही है।
 
विशेषज्ञों का कहना है कि नरेंद्र मोदी सरकार के पिछले साढ़े 4 साल के कार्यकाल में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार मामूली बढ़ी है, जो अब हर महीने सकारात्मक हो रही है। अगस्त 2018 में औद्योगिक उत्पादन में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अगर पिछले 3 साल के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि कुल मिलाकर औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। बहरहाल अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इसमें सुस्ती रही है। मोदी सरकार के सत्त्ता में आने के बाद 52 महीनों में 7 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि दर सिर्फ 9 बार रही है, जबकि 22 महीनों में वृद्धि दर 4 प्रतिशत से कम रही है। 
 
इंडिया एनर्जी एक्सचेंज (आईईएक्स) के निदेशक (बिजनेस डेवलपमेंट) आरके मेदीरत्ता ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में बिजली के हाजिर दाम में तेज बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा, 'औद्योगिक मांग बढऩे की वजह से इस साल मांग बढ़ी है। दूसरे विद्युतीकरण का असर रहा है, जिसकी वजह से आवासीय मांग तेज हुई है। इसके साथ ही हम देख रहे हैं कि कुछ बड़े राज्यों मेंं चुनाव होने वाले हैं, जिसकी वजह से उन राज्यों में बिजली कटौती बंद है।' हालांकि कुल बिजली बाजार में हाजिर बाजार की हिस्सेदारी महज 3 प्रतिशत है, लेकिन यह मांग आपूर्ति की धारणा का एक संकेतक है। 
 
बाजार के विशेषज्ञ भी सरकार की कुछ बिजली योजनाओं खासकर सौभाग्य और बिजली वितरण में बदलाव करने वाली उदय योजना का जिक्र करते हैं, जिससे बिजली की मांग बढऩे में मदद मिली है।  पिछले साल केंद्र सरकार ने सहज बिजली हर घर योजना (सौभाग्य) नाम से नई योजना की घोषणा की थी, जिससे 3.5 करोड़ शहरी और ग्रामीण परिवारोंं के विद्युतीकरण में तेजी लाई जा सके। केंद्र सरकार ने इस साल अगस्त में घोषणा की कि उसने 1 करोड़ परिवारों को बिजली देने का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया हैऔर शेष लक्ष्य तय समय सीमा के 4 महीने पहले दिसंबर 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा। इस समय 5 प्रतिशत लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है।
 
उदय या उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना सरकारी बिजली वितरण कंपनियोंं के वित्तीय और परिचालन संबंधी उत्थान के लिए पेश की गई थी। परिचालन संबंधी सुधार पर संदेह है, लेकिन वित्तीय सुधार से राज्यों की वितरण कंपनियों की बिजली खरीद क्षमता बढ़ी है। पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर (पावर एवं युटिलिटी) संबितोष महापात्र ने कहा, 'सौभाग्य की वजह से ग्रामीण इलाकों में असर पड़ा है और घरेलू और औद्योगिक मांग बढ़ी है। साथ ही उदय की वजह से वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है। इसके अलावा देश की जीडीपी से भी औद्योगिक मांग जुड़ी हुई है।' 
 
बिजली की मांग बढऩे से जहां बिजली क्षेत्र में खुशी लौटी है, वहीं कोयला आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। उद्योग के एक सूत्र के मुताबिक कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों के पास कोयले की मात्रा ऐतिहासिक रूप से कम स्तर पर पहुंच गई है और इस समय यह महज 3 करोड़ टन है। मांग बढ़ गई है, जबकि आयात कम हुआ है। 
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