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आईसीआईसीआई बैंक की सहायक इकाइयों में निवेशकों की उम्मीद बढ़ी

हंसिनी कार्तिक /  November 04, 2018

संदीप बख्शी को मुखिया बनाया जाना आईसीआईसीआई बैंक के शेयर के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। साथ ही चंदा कोछड़ विवाद से जुड़ी अनिश्चितता घटने से धारणा में सुधार आया है। यह शेयर अब अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तर से ज्यादा दूर नहीं है। चूंकि बख्शी को प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी बनाए जाने से बैंक की वित्तीय स्थिति में सुधार आ रहा है। बैंक प्रबंधन द्वारा अपनाए गए विभिन्न उपायों से हालात में सुधार दिख रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि बैंक में नए मुखिया के आने और फंसे कर्ज की समस्या काफी हद तक दूर होने से अब बैंक और उसकी सहायक इकाइयों, दोनों के हालात में सुधार आएगा। 

 
सितंबर तिमाही के परिणाम ने आगे की राह का संकेत मुहैया कराया है। बैंक का वित्तीय परिणाम पिछली 12 तिमाहियों में अच्छा रहा जिनमें उसने शुद्घ ब्याज आय वृद्घि, शुद्घ ब्याज मार्जिन या ऋण वृद्घि दर्ज की। 55 प्रतिशत के खुदरा ऋण और 51 प्रतिशत चालू खाता-बचत खाता (सीएएसए) जमाएं इस उद्योग में श्रेष्ठï हैं। इसे देखते हुए मैक्वेरी कैपिटल के सुरेश गणपति का मानना है कि बैंक की वैल्यू अगले दो वर्षों में बहीखाते की दोगुना हो सकती है। लेकिन स्थिति में तेजी से सुधार तभी दिखेगा जब आईसीआईसीआई बैंक की सहायक इकाइयां कुल कारोबार में ज्यादा योगदान दें। इनका मौजूदा समय में बैंक के कुल मूल्यांकन में 38-42 फीसदी का योगदान है जो वित्त वर्ष 2016 के 25-30 प्रतिशत की तुलना में अधिक है। 
 
विश्लेषकों का कहना है कि यदि सूचीबद्घता को निवेशकों की बेहतर प्रतिक्रिया मिली तो मूल्यांकन बेहतर हो सकता है। हालांकि उसके जीवन बीमा, सामान्य बीमा और प्रतिभूति व्यवसाय या तो बाजार दिग्गज हैं या अपने संबद्घ क्षेत्रों में इनका दबदबा कायम है, पर इनकी शेयर कीमतों पर उनके मजबूत व्यवसाय की संभावना का असर नहीं दिखा है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस (आई-प्रू लाइफ) की सूचीबद्घता के दो वर्ष बाद यह अभी भी अपनी निर्गम कीमत के आसपास कारोबार कर रहा है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज (आईसेक) अपनी सूचीबद्घता के बाद से 50 प्रतिशत वैल्यू गंवा चुका है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड एकमात्र श्रेष्ठï प्रदर्शक है, हालांकि सूचीबद्घता के बाद मिलने वाला लाभ धीरे धीरे घट रहा है और सितंबर 2018 के ऊंचे स्तर से यह शेयर 15 प्रतिशत कमजोर पड़ चुका है। भले ही धारणा में सुधार आ रहा है, पर आईपीओ के समय पैदा हुई चिंताएं बरकरार हैं। आई-प्रू लाइफ के लिए, सकल प्रीमियम में सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की मजबूत वृद्घि के बावजूद बाजार जोखिम के विपरीत है, मुख्य तौर पर कंपनी के  इक्विटी बाजार केंद्रित यूनिट-लिंक्ड बीमा पॉलिसी के लिए निवेश (80 प्रतिशत से ज्यादा) के संदर्भ में। इसी तरह, मौजूदा बाजार अस्थिरता आईसेक की विकास संभावनाओं को प्रभावित कर रही है। बाजार की आशंका भी इसकी सूचीबद्घता के समय को लेकर पैदा हुई है। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के लिए, दूसरी तिमाही में 44 प्रतिशत शुद्घ लाभ वृद्घि को काफी हद तक निवेश आय में 19 प्रतिशत की तेजी से मदद मिली। हालांकि पूरा सामान्य बीमा क्षेत्र भारी मुनाफे के लिए निवेश पर निर्भर है, पर बाजार आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के मूल्यांकन को लेकर उत्साहित नहीं है।
 
जहां ये चिंताएं बनी हुई हैं, वहीं कुछ विश्लेषक बाजार में प्रवेश के आईसीआईसीआई बैंक के समय को लेकर सवाल उठा रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि बैंक को अपने व्यवसायों को सूचीबद्घ कराने के लिए उचित समय का इंतजार करना चाहिए। मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी का भी मानना है कि बैंक के पास ज्यादा विकल्प नहीं थे। मुखर्जी कहते हैं, 'बैंक द्वारा अपनी टियर-1 पूंजी पर दबाव को देखते हुए सहायक इकाइयों को सूचीबद्घ कराने में लंबा इंतजार नहीं किया जा सकता है।' वित्त वर्ष 2017 से हिस्सेदारी बिक्री से प्राप्त 113 अरब रुपये की बचत करना, अपने वित्त और अपने पूंजी पर्याप्तता अनुपात पर बड़ा बोझ डाले बगैर फंसे कर्ज के लिए पूंजी मुहैया कराना चुनौतीपूर्ण होगा। निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि किस तरह से बैंक ने कई वर्षों में पहली बार नुकसान दर्ज किया है क्योंकि उसका प्रावधान बफर जून 2018 की तिमाही में समाप्त हो गया।
Keyword: ICICI bank, profit, share,,
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