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फिलहाल डरे हुए हैं शेयर बाजार

पुनीत वाधवा और विशाल छाबडिय़ा /  November 04, 2018

संवत 2074 बाजारों के लिए उतार-चढ़ाव वाला वर्ष रहा और उन विभिन्न घटनाक्रम के साथ नए वर्ष के आकर्षक बने रहने की संभावना है जो धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के सह-संस्थापक एवं संयुक्त प्रबंध निदेशक रामदेव अग्रवाल ने पुनीत वाधवा और विशाल छाबडिय़ा के साथ बातचीत में कहा कि भारत खरीदारों का बाजार बना हुआ है, क्योंकि यहां अच्छे शेयर अब उचित मूल्य पर उपलब्ध हैं। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

 
क्या आपका मानना है कि बाजार में अभी और गिरावट आएगी?
 
मैं इस तथ्य को लेकर असहज था कि बाजार में गिरावट नहीं आ रही है। मूल्यांकन काफी बढ़ गए थे। गिरावट की रफ्तार अत्यधिक रही है और इससे मैं आश्चर्यचकित हूं। बाजार में म्युचुअल फंडों से बड़ा प्रवाह देखा गया। जहां विदेशी बिकवाली कर रहे थे, वहीं घरेलू संस्थागत और फंड हाउस खरीदारी कर रहे थे। कुछ शेयरों में अच्छी खरीदारी देखी गई। म्युचुअल फंड प्रवाह में कमी की मुख्य वजह बाजार में आई गिरावट है। पूंजी प्रवाह के अभाव में ऊंचे मूल्यांकन की रफ्तार चुनौतीपूर्ण हो गई है। इसके अलावा आईएलऐंडएफएस में संकट जैसे हालात भी सामने आए जिनसे धारणा प्रभावित हुई।
 
क्या भविष्य में अभी और गिरावट आएगी?
 
मौजूदा बाजार परिदृश्य ज्यादा अनुकूल नहीं है। जहां प्रमुख सूचकांकों में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है, वहीं बाजार-केंद्रित नुकसान काफी अधिक है। कई रिटेल पोर्टफोलियो 25-30 प्रतिशत नीचे हैं। विदेशी निवेशकों के लिए नुकसान रुपये में गिरावट की वजह से अधिक होगा। इसके अलावा बाजार राज्यों के चुनाव परिणामों को लेकर भी चिंतित है। हालांकि जहां भारत में अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रबंधन से मदद मिलती है, वहीं राजनीति से अस्थिरता पैदा होती है, पर इससे कंपनियों की सेहत प्रभावित नहीं होती। निफ्टी 50 के मौजूदा स्तरों के आसपास रहने का अनुमान है। 
 
क्या एनबीएफसी को लेकर नकदी चिंताएं दूर हो गई हैं?
 
आईएलऐंडएफएस घटनाक्रम अचानक चौंकाने वाला था। काफी हद तक कॉलेटरल नुकसान हुआ। निवेशकों में इसे लेकर डर पैदा हुआ है और अब वे हालात को ध्यान में रखकर निवेश करेंगे। यह एक ऐसा कमजोर चक्र है जिसमें निवेशक एनबीएफसी से रकम निकालेंगे और इसे बैंकों में रखना पसंद करेंगे। 
 
क्या कोई निवेश के लायक एनबीएफसी है?
 
अब हम सतर्क हैं और जरूरत पडऩे पर घाटा उठा रहे हैं। हमें इस पर ध्यान देने की जरूरत है कि हालात अब कैसे रहेंगे। अच्छी कंपनियों के लिए मूल्यांकन मौजूदा समय में उचित माना जा सकता है। मैं अच्छी एनबीएफसी पर नकारात्मक नहीं हूं। बड़े एनबीएफसी को बैंकों में तब्दील किए जाने की जरूरत है और नियामकों और सरकार को इस संभावना पर विचार करना चाहिए।
 
निवेशकों के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे?
 
तेल कीमतें चरम पर बनी हुई हैं। किसी भी दिशा में 10 प्रतिशत का उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए हालात में बड़ा बदलाव ला सकता है। एक दीर्घावधि निवेशक के लिए, खरीदारी के लिए यह अच्छा समय है। यदि बाजार में और गिरावट आती है तो निवेशक एसआईपी विकल्प चुन सकते हैं और इससे निवेश प्रभावित हो सकता है। बाजार अभी डरा हुआ है और यह समय है कि निवेशक लालची बने।
 
कॉरपोरेट आय को लेकर आपकी क्या उम्मीदें हैं?
 
घटनाक्रम से अर्थव्यवस्था में अभी तक कुल माग परिदृश्य प्रभावित नहीं हुआ है। हालांकि वाहन जैसे ईंधन-केंद्रित सेगमेंट पर भविष्य में कुछ दबाव देखा जा सकता है। 2018-19 के लिए आय वृद्घि 17 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। 
 
आपके पसंदीदा क्षेत्र कौन से हैं?
 
क्षेत्रों को लेकर हमारी पसंद पहले जैसी बनी हुई है। हम निजी क्षेत्र के बैंकों, वाहन आदि को पसंद कर रहे हैं। मौजूदा समय में बाजार में गिरावट से इन सभी क्षेत्रों में अवसर मौजूद रहेंगे। 
 
आपके ताजा 'एनुअल वेल्थ क्रिएशन स्टडी' के मुख्य निष्कर्ष क्या हैं?
 
निवेशकों को कंपनी के बुनियादी आधार और उसकी वैल्यू पर ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन बाजार में इसका कितना असर दिखता है यह कभी स्पष्टï नहीं हो पाता। पूंजी पर प्रतिफल (आरओई) और आय वृद्घि किसी कंपनी की आंतरिक वैल्यू के मुख्य वाहक हैं। महत्वपूर्ण कारक इन दोनों के बीच पारस्परिक प्रभाव है। 
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