बिजनेस स्टैंडर्ड - कभी रहे सिरमौर, पर अब कहां ठौर
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, July 07, 2022 04:35 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

कभी रहे सिरमौर, पर अब कहां ठौर

पवन लाल /  November 04, 2018

किसी कंपनी के एक मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) किसी कंपनी से कैसे जुड़ते या जुड़ती हैं उससे ज्यादा सुर्खियां इस बात को लेकर बनती हैं कि वे कंपनी कैसे छोड़ते हैं। कई कंपनियों का नेतृत्व करने वाले सीईओ ने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही कंपनी छोड़ दी और इसकी वजहों में वैचारिक मतभेद से लेकर उनके बोर्ड या उनके पूर्ववर्ती अधिकारियों में उनके खराब-प्रदर्शन को लेकर उनकी विश्वसनीयता पर संदेह रहना शामिल है। लेकिन कुछ मामलों में तो कोई स्पष्ट वजह नहीं थी। क्या इससे कार्यसंस्कृति में बदलाव का संकेत नहीं मिलता? टाटा संस से अरसे से जुड़े रहे आर गोपालकृष्णन कहते हैं, 'भविष्य में ज्यादा अधिकारी कंपनियों को छोड़ेंगे और सार्वजनिक स्तर पर इसको लेकर पारदर्शिता नहीं होगी।'

 
हाल का उदाहरण आदित्य घोष का है जिनको लेकर कंपनी से उनकी विदाई को लेकर कयास लगाए गए थे जिन्होंने उस वक्त सक्षम तरीके से विमानन कंपनी इंडिगो का प्रबंधन किया जब किंगफिशर एयरलाइंस और जेट एयरवेज संघर्ष कर रही थीं। घोष जिन्होंने किफायती विमानन सेवाओं को सार्वजनिक करने में अहम भूमिका निभाई थी, उन्होंने अप्रैल में सीईओ के पद से इस्तीफा दे दिया। ऐसे वक्त में जब देश की सबसे बेहतरीन विमानन कंपनी अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर अपनी सेवाएं शुरू करने के बारे में सोच रही थी ठीक उसी वक्त उन्होंने कंपनी क्यों छोड़ दी, इस सवाल पर कंपनी का कहना है कि वह अपना खुद का उद्यम शुरू करने जा रहे हैं। बाद में घोष टाटा ट्रस्ट से कैंसर संबंधित सामाजिक उद्यम के लिए एक वरिष्ठ सलाहकार के तौर पर जुड़ गए। 
 
हाल में वीडियोकॉन समूह को कर्ज देने में गड़बड़ी करने के आरोपों और विवादों के बीच दिग्गज बैंकर चंदा कोछड़ ने आईसीआईसीआई बैंक छोड़ दिया। ऐसे आरोप हैं कि वीडियोकॉन समूह ने कथित तौर पर कोछड़ के पति की कंपनी में निवेश किया था। अभी इस मामले की जांच हो रही है लेकिन उन्होंने स्वैच्छिक रूप से पद छोड़ दिया। हालांकि इससे सवाल यह उठता है कि उनके बैंकिंग क्षेत्र में फिर से सफलतापूर्वक वापसी करने की कितनी संभावना है? कानूनी सेवाओं से जुड़ी कंपनी शार्दूल अमरचंद मंगलदास में प्रबंधक साझेदार अक्षय चुड़ासमा कहते हैं कि अगर कोई सीईओ फर्जीवाड़े के मामले में फंसता है तो उसकी वापसी मुश्किल है। वह घोष की मिसाल देते हुए कहते हैं, 'ऐसे कोई मुश्किल भी नहीं है।' घोष इंडिगो चलाने वाली कंपनी इंटरग्लोब एविएशन से जुडऩे से पहले कानूनी सेवाएं देने वाली कंपनी जे सागर एसोसिएट्स में एक वकील के तौर पर काम कर रहे थे।
 
चुड़ासमा कहते हैं, 'तनावपूर्ण माहौल में कंपनियों से दो तरीके से लोग निकलते हैं, यानी जब आपको नौकरी से निकाल दिया जाता है या फिर आप पर बहुत बोझ डालकर परेशानी में डाला जाता और दूसरी स्थिति स्वैच्छिक तौर पर दूसरे विकल्प तलाशने के लिए आपको नौकरी छोडऩी पड़ती है।' हालांकि कुछ असामान्य परिस्थितियां भी होती हैं मसलन टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री का मामला जो प्रवर्तक के परिवार का हिस्सा भी थे और उनके कई कारोबार भी थे और उनके लिए नौकरी ही कोई प्रमुख चीज नहीं थी। मिस्त्री ने हाल ही में मिस्त्री वेंचर्स की शुरुआत करने की घोषणा की जो स्टार्ट अप कंपनियों की फंडिंग से जुड़ा एक उद्यम है।
 
जब वरुण बेरी ने सीईओ के तौर पर पेप्सिको इंडिया फूड्स को छोड़ा तो उस वक्त हलचल की स्थिति बन गई क्योंकि बिना किसी योजना के उन्होंने कंपनी छोड़ दी ऐसे में कंपनी का नेतृत्व करने वाला उस वक्त कोई नहीं था। लेकिन इससे उनके भविष्य की चीजें नहीं छूटीं और वह ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज से प्रबंध निदेशक के तौर पर जुड़े जहां उनकी पुनर्नियुक्ति पांच सालों से ज्यादा वक्त के लिए हुई थी।  इसी तरह गूगल में सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले अधिकारी निकेश अरोड़ा जो बाद में सॉफ्टबैंक के प्रमुख भी बने, जब उन्होंने 2016 में अपनी नियुक्ति के महज दो सालों के बाद कंपनी छोड़ी तो सबको हैरान कर दिया। कंपनी छोडऩे की अटकलों के बीच ही अरोड़ा साइबर सिक्योरिटी कंपनी पालो अल्टो नेटवक्र्स के सीईओ के तौर पर जुड़े।
 
सर्च कंपनी एगॉन जेंडर के अधिकारी और साझेदार सोनी इकबाल का कहना है कि किसी विशेष क्षेत्र में अगर किसी नेतृत्वकर्ता की विशेषज्ञता या जानकारी है तो उनके लिए नए विकल्प मिलना चुनौतीपूर्ण नहीं होगी। हालांकि इसके लिए सीईओ का ईमानदार होना और अपने पुराने और नए निदेशक मंडल के साथ मुखर होना भी जरूरी होगा। इकबाल का कहना है, 'आखिरकार सच हमेशा सामने आता है।' हालांकि वह अकेले ऐसे नहीं हैं जो इस तरह सोचते हैं। देश में केपीएमजी के पार्टनर और प्रमुख (लोगों के प्रदर्शन और संस्कृति) उन्मेश पवार का कहना है, 'अगर वित्तीय अनियमितता या यौन उत्पीडऩ निवारक जैसे मामलों की बात हो उस वक्त सीईओ दुनिया को परिस्थितियों के बारे में कैसे बताता है यह उससे संबंधित मामला भी है।'
 
गोपालकृष्णन का कहना है कि अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर सीईओ ने हमेशा वापसी की है। ऐपल के स्टीव जॉब्स, फोड्र्स के ली लाकोका, सिटी बैंक के सीईओ विक्रम पंडित (जिन्होंने इस्तीफा देकर निवेश कंपनी ओरोगन समूह की शुरुआत की) और डॉयचे बैंक के प्रमुख अंशु जैन (जिन्होंने इस्तीफा दिया और फिर वह कैंटर फिट्जगेराल्ड से अध्यक्ष के तौर पर जुड़े) कुछ ऐसे उदाहरण हैं।  प्रबंधन सलाहकारों ने यह संकेत दिया कि विभिन्न कंपनियों की एचआर नीति में अब नई बातों पर जोर दिया जाता है। पवार का कहना है कि संगठनात्मक बातचीत में भरोसा, उपयुक्त व्यवहार, भ्रष्टाचार निरोधी, आंतरिक कारोबार, सीमा पर लेन-देन और यौन उत्पीडऩ पर जोर दिया जाता है। संगठन और इसकी प्रतिष्ठा के लिहाज से अनुचित व्यवहार और उसके असर के बारे में भी जानकारी दी जाती है। वह कहते हैं, 'जोखिम एक काम के तौर पर सबसे अहम होता जा रहा है और यह कुछ या ज्यादातर हालात में सक्रिय होता है।'
 
गोपालकृष्णन का कहना है, 'विवादों के घेरे में किसी की विवाद अब असामान्य नहीं होगी बल्कि सबसे अहम बात यह है कि ज्यादातर सीईओ और बोर्ड यह महसूस करने में नाकाम रहे हैं कि प्रतिष्ठा की लड़ाई हमेशा कानूनी दायरे में नहीं लड़ी जाती बल्कि यह सार्वजनिक विचारधारा की अदालत में भी तय होती है।' फिलहाल इसमें बदलाव के कोई आसार नहीं हैं।
Keyword: ICICI, bank, CBI, Chanda Kochhar, CEO, company,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या बीमा नियामक की पहल से वाहन बीमा होगा सस्ता?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.