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संपादकीय /  November 04, 2018

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत सप्ताह सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए 12 पहल वाले पैकेज की घोषणा की। इस पैकेज में वे उपाय शामिल हैं जो एमएसएमई की नए दौर में प्रवेश करने में मदद करेंगे। संक्षेप में कहा जाए तो ये उपाय न केवल इस क्षेत्र के लिए ऋण की उपलब्धता बढ़ाएंगे बल्कि उनके लिए कारोबार को और सुगम भी बनाएंगे। बीते दो वित्त वर्ष के दौरान एमएसएमई क्षेत्र को नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) क्रियान्वयन के रूप में लगातार दो झटके लगे। इनकी वजह से इस क्षेत्र की आय में काफी कमी आई। देश के गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी क्षेत्र का मौजूदा संकट जो आईएलऐंडएफएस की कमजोरी की वजह से पैदा हुआ है, उसने भी एमएसएमई को ऋण का प्रवाह बाधित किया है। इस दृष्टि से देखा जाए तो यह अच्छी बात है कि सरकार अर्थव्यवस्था के इस अहम क्षेत्र की पूरी मदद कर रही है। देश में करीब 6.5 करोड़ ऐसे उद्यम हैं जिन्होंने 12 करोड़ लोगों को रोजगार दिया है। यह रोजगार तैयार करने वाला कृषि के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। 

 
नकदी के संकट से जूझ रहे इस क्षेत्र को तत्काल और तेजी से सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री ने एक देशव्यापी वेब पोर्टल की शुरुआत करने की घोषणा की जहां एक करोड़ रुपये तक का ऋण केवल एक घंटे से भी कम समय में जारी किया जाएगा। पहले चरण में सरकार 78 एमएसएमई क्लस्टर में पांच सरकारी बैंकों में इसे अंजाम देगी। बैंक अधिकारियों को इन जगहों पर तैनात किया जाएगा ताकि ऋण आसानी से दिया जा सके। इसके बाद उन एमएसएमई को ऋण में दो प्रतिशत की छूट और नया ऋण दिया जाएगा जो जीएसटी के तहत पंजीयन करा चुके हैं। पैकेज में उन निर्यातकों को ब्याज में छूट देने की बात भी कही गई है जो माल भेजने के पहले और बाद में ऋण लेते हैं। ऋण आसान करने के अलावा पैकेज का ध्यान कारोबारी व्यवहार्यता बेहतर बनाने पर भी है। इसके लिए सभी सरकारी उपकमों से कहा जाएगा कि वे अपने कच्चे माल का 25 फीसदी एमएसएमई से खरीदें। पहले यह सीमा 20 प्रतिशत थी। इसी प्रकार 500 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने वाली सरकारी कंपनियां और कारोबारी घरानों को अनिवार्य तौर पर ट्रेड रिसीवेबल्स इलेक्ट्रॉनिक डिस्काउंटिंग सिस्टम पोर्टल पर पंजीयन कराना होगा। इस कदम से उद्यमियों को अपनी आगामी प्राप्तियों के आधार पर बैंकों से ऋण मिल सकेगा। इतना ही नहीं एमएसएमई को तकनीकी उन्नयन का समर्थन भी मिलेगा। प्रधानमंत्री ने पर्यावरण मंजूरी, निरीक्षण और रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया को और सहज बनाए जाने की बात कही। कंपनी अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश को मंजूरी दी जा चुकी है ताकि कारोबारियों को अनावश्यक दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़े।
 
निस्संदेह ये उपाय एमएसएमई क्षेत्र के लिए काफी मददगार साबित होंगे। बहरहाल, इन कदमों को लेकर अति उत्साह से भरने के बजाय सतर्क रहने की भी पर्याप्त वजह हैं। प्रधानमंत्री द्वारा इनकी घोषणा अति उत्साह की वजह बन सकती है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'मैं स्वयं इस बात की निगरानी करूंगा कि अगले 100 दिन में सरकार 100 जिलों के छोटे कारोबारों तक पहुंचे।' ऐसे में अधिकारी लंबी अवधि के नकारात्मक परिणामों का आकलन किए बगैर जल्दी से जल्दी नतीजे देने का दबाव महसूस कर सकते हैं। उदाहरण के लिए एमएसएमई को जल्दी ऋण देने के प्रयास के साथ यह तय होना चाहिए कि ऋण अनुशासन का ध्यान रखा जाए। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एन एस विश्वनाथन ने एक अलग संदर्भ में ही सही इससे जुड़ी चेतावनी दे दी है जिसकी अनदेखी नहीं होनी चाहिए। इसी प्रकार सरकारी उपक्रमों के लिए खरीद की प्राथमिकता में यह जोखिम छिपा है कि कहीं इससे अव्यवस्था न पैदा हो।
Keyword: narendra modi, MSME, diwali, GST,,
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