बिजनेस स्टैंडर्ड - निवेशकों को 14.1 अरब लौटाए सहारा
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निवेशकों को 14.1 अरब लौटाए सहारा

श्रीमी चौधरी / मुंबई 11 01, 2018

सेबी का निर्देश

निवेशकों के 14,100 करोड़ रुपये 15 फीसदी ब्याज सहित वापस करने को कहा
सहारा कंपनियों, सुब्रत रॉय, अन्य निदेशकों का 4 वर्षों तक प्रतिभूति बाजारों में कारोबार प्रतिबंधित

बिजनेस स्टैंडर्ड निवेशकों को 14.1 अरब लौटाए सहाराभारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सहारा समूह की कंपनियों और उसके निदेशकों (सुब्रत रॉय शामिल) को निवेशकों के 14,100 करोड़ रुपये 15 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया है। सेबी के आदेश के अनुसार वर्ष 1998 और 2009 के बीच, सहारा इंडिया कॉमशिर्यल कॉरपोरेशन (एसआईसीसीएल) ने 1.984 करोड़ निवेशकों से वैकल्पिक रूप से पूरी तरह परिवर्तनीय डिबेंचर्स (ओएफसीडी) के जरिये 14,100 करोड़ रुपये जुटाए थे। यह रकम उगाही योजना लगभग एक दशक के लिए लागू थी और इसमें सेबी और कंपनी कानून के तहत निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया था। 

54 पृष्ठ के आदेश में पूंजी बाजार नियामक ने रॉय और 14 इकाइयों को चार वर्षों तक प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया है। इसके अलावा, इन कंपनियों को किसी भी उस सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी या सेबी के साथ पंजीकृत किसी बिचौलिए से जुडऩे से भी रोका गया है जिसका मकसद जनता से पैसा जुटाना हो।

वर्ष 2011 में सेबी ने सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन (एसआईआरईसीएल) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (एसएचआईसीएल) के खिलाफ इसी तरह के रिफंड ऑर्डर जारी किए थे। इस आदेश में 2.21 करोड़ निवेशकों से एकत्रित किए गए 244 अरब रुपये उन्हें लौटाने को कहा गया था। वर्ष 2012 में सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस आदेश का समर्थन किया था।

सेबी के आदेश में कहा गया है कि एसआईसीसीएल द्वारा कोष उगाही का पता एसआईआरईसीएल और एसएचआईसीएल मामले की जांच के दौरान चला था।  सेबी ने पाया था कि एसआईसीसीएल ने ओएफसीडी निर्गम के जरिये 172 अरब रुपये जुटाने के लिए कंपनी पंजीयक-पश्चिम बंगाल के समक्ष प्रस्ताव सौंपा था। इसके बाद सेबी ने यह सुनिश्चित करने के लिए जांच शुरू की थी कि क्या एसआईसीसीएल ने प्रतिभूतियों का कोई सार्वजनिक निर्गम पेश किया है।

फरवरी 2015 में सेबी ने कंपनी एवं सेबी अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के कथित उल्लंघन से जुड़ी इकाइयों को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। सभी संलिप्त पक्षों को अपने जवाब देने और व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित होने का अवसर दिया गया था। नोटिस प्राप्त करने वाली इकाइयों ने मई 2015 और अगस्त 2018 के बीच लगभग 6 जवाब सौंपे। 

सेबी को सौंपे अपने जवाब में सहारा समूह की इकाइयों ने कहा, 'सेबी द्वारा वर्ष 2015 में नियामकीय अधिकार का इस्तेमाल 1998 में एसआईसीसीएल द्वारा निर्गम पेश किए जाने के 17 साल बाद किया गया है, जो कानूनी रूप से अनुचित है।' इन जवाब में यह भी कहा गया कि ओएफसीडी श्रमिकों, कर्मचारियों और समूह के साथ जमाओं से जुड़े लोगों को निजी नियोजन आधार पर जारी किया गया था। बाजार नियामक ने यह भी कहा है कि यदि सहारा समूह से जुड़ी इकाइयां पैसा लौटाने में विफल रहती हैं तो तीन महीने के बाद सेबी स्वयं इस रकम की वसूली कर सकता है। 
Keyword: sahara, subrat roy, sebi, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी),
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