बिजनेस स्टैंडर्ड - देश में सोने की मांग 10 फीसदी बढ़ी
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देश में सोने की मांग 10 फीसदी बढ़ी

सुशील मिश्र / मुंबई 11 01, 2018

बढ़ी सोने की चाह

बिजनेस स्टैंडर्ड देश में सोने की मांग 10 फीसदी बढ़ीदुनिया में आभूषण के सबसे ज्यादा शौकीन भारतीय होते हैं, यह बात एक बार फिर सत्य साबित हुई है। वर्ष की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के दौरान भारत में आभूषण की मांग 10 फीसदी से भी ज्यादा रही है, जो दुनियाभर के देशों में सबसे अधिक है। हालांकि सोने की कुल मांग के मामले में भारत चीन से पीछे है। देश में सोने की कुल मांग तीसरी तिमाही में सालाना आधार पर साढ़े दस फीसदी बढ़कर 183.2 टन हो गई। सोने की बढ़ती कीमतों और बाजार में नकदी की कमी के कारण इस बार धनतेरस और दीवाली पर सोने की मांग सामान्य रहने का अनुमान है जिससे 2017 की अपेक्षा 2018 में सोने की कुल मांग कम रह सकती है।

विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक तीसरी तिमाही के दौरान देश में कुल 183.2 टन सोने का आयात किया गया जबकि पिछले साल सामान अवधि में 165.8 टन सोने का आयात किया गया था। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी की वजह से मूल्य के आधार से इस दौरान सोने की मांग 14 फीसदी बढ़ी। यह 50,090 करोड़ रुपये रही जो 2017 में 43,800 करोड़ रुपये थी। रिपोर्ट के मुताबिक तीसरी तिमाही में इस साल आभूषणों की कुल मांग 10.4 फीसदी बढ़कर 148.8 टन पहुंच गई, जो पिछले साल सामान अवधि में 134.8 टन थी। मूल्य के आधार पर आभूषण की मांग में वृद्धि 14 प्रतिशत रही है। यह 40,690 करोड़ रुपये रही जो पिछले साल 35,610 करोड़ रुपये थी। इस दौरान दुनियाभर में आभूषण की मांग में चार फीसदी और चीन में 9.9 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। अर्थात पूरी दुनिया में सोने के आभूषण की सबसे ज्यादा मांग भारत में रही है।

देश में सोने में निवेश मांग 11 फीसदी बढ़कर 34.4 टन पहुंच गई जो 2017 की तीसरी तिमाही में 31 टन थी। मूल्य के आधार पर यह 15 प्रतिशत बढ़कर 9,400 करोड़ रुपये रही जो 2017 में 8,200 करोड़ रुपये थी। देश में पुन: प्रसंस्करण किए जाने वाले सोने की कुल मात्रा में 13.85 प्रतिशत की गिरावट आई है। तीसरी तिमाही में 23 टन सोने का पुन: प्रसंस्करण किया गया जबकि 2017 में 26.7 टन सोने का प्रसंस्करण किया गया था।

तीसरी तिमाही के दौरान रिजर्व बैंक ने अपना स्वर्ण भंडार 13.7 टन बढ़ाया है। इससे उसका कुल स्वर्ण भंडार 21.8 टन हो गया है। भारत का कुल स्वर्ण भंडार चार फीसदी बढ़कर 579.9 टन हो गया है जो पिछले साल 557.8 टन था। तीसरी तिमाही के शुरुआती समय में इसके भाव कम रहने से इसमें 55 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई जो कीमतें बढऩे से कमजोर पड़ने लगी है। चालू वर्ष में जनवरी से सितंबर तक 521.95 टन सोने का आयात किया गया जबकि जनवरी से सितंबर 2017 में 529.11 टन सोने का आयात हुआ था। वर्ष 2017 की चौथी तिमाही में 242.08 टन सोने का आयात किया गया था। वहीं 2017 में कुल 771.19 टन सोने का आयात हुआ था। महंगा सोना और देश के कई हिस्सों में सूखा पडऩे की वजह से चालू तिमाही में मांग कमजोर रहने की संभावना है जिससे 2018 की चालू तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के दौरान मांग कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं जो साल भार की मांग को प्रभावित करेगा।

डब्ल्यूजीसी के भारत के प्रबंध निदेशक सोमसुंदरम पी. आर. ने कहा कि तिमाही की शुरुआत में सोने के दाम में कमी देखी गई। यह कर सहित 29,000 रुपये प्रति दस ग्राम के स्तर पर आ गया जो जनवरी 2018 के बाद सोने के भाव का सबसे निचला स्तर था। इससे सोने की मांग में तेजी आई। हालांकि डॉलर के मुकाबले रुपये के कमजोर होने से सोने के स्थानीय भाव प्रभावित हुए और इनमें तेजी देखी गई। जल्द ही इसका भाव बिना किसी कर के 32,000 रुपये से 33,000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया। इसलिए तिमाही के बाद के दौरान इसकी मांग घट गई। उन्होंने कहा कि सोना खरीद के अवसर कम होने और केरल जैसे प्रमुख बाजार के बाढ़ से प्रभावित होने जैसे कई कारणों से इस तिमाही में सोने की मांग पर असर पड़ा।

इस वर्ष की चौथी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) आमतौर पर सोने की मांग के लिए अच्छी रहती है। त्योहारों और शादियों के चलते इस दौरान सोने की मांग और खरीद बढ़ जाती है। सोमसुंदरम ने कहा कि इसके बावजूद इस साल सोने की मांग इस दौरान सामान्य रह सकती है, क्योंकि बाजार में तरलता की कमी है। वहीं भारत में इसकी कीमतें भी बढ़ रही हैं। इसके अलावा कुछ राज्यों में चुनाव के कारण इसकी आवाजाही भी प्रभावित होगी। इससे सोने की मांग कम रहने का अनुमान है। यह 700 से 800 टन के दायरे में रह सकता है।

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