बिजनेस स्टैंडर्ड - हीरे को और 'तराशने' का प्रस्ताव
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हीरे को और 'तराशने' का प्रस्ताव

राजेश भयानी / मुंबई 10 31, 2018

हीरा उद्योग

भारत ने की हीरों को आतंकवाद, भ्रष्टाचार और धन-शोधन रहित प्रमाण-पत्र दिए जाने की पेशकश
किम्बर्ली प्रक्रिया और वारंटी प्रणाली का दायरा बढ़ाए जाने की उम्मीद
रत्नाभूषण क्षेत्र में धोखाधड़ी और घोटालों का पता चलने के बाद उठाया जा रहा कदम
अब तक वैश्विक रूप से हीरों के 'विवादास्पद' पहलू पर ही दिया जाता रहा है ध्यान
विवादास्पद हीरे वे कच्चे हीरे होते हैं जिनका इस्तेमाल वैध सरकारों को कमजोर करने के उद्देश्य से विरोधी आंदोलनों या उनमें सहयोग करने वालों द्वारा धन जुटाने केलिए किया जाता है

बिजनेस स्टैंडर्ड हीरे को और भारत ने वैश्विक हीरा उद्योग को आतंकवाद, भ्रष्टाचार और धन-शोधन से मुक्त रहने वाले हीरों को प्रमाणित करने का प्रस्ताव पेश किया है। भारत की इस मांग के बाद वैश्विक उद्योग के भागीदारों ने हीरों के लिए अनिवार्य किम्बर्ली प्रक्रिया प्रमाणीकरण योजना (केपीसीएस) और वारंटी प्रणाली का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। हाल में रत्न और आभूषण क्षेत्र में धोखाधड़ी और घोटालों का पता चलने के बाद यह कदम उठाया जा रहा है। अब तक किम्बर्ली प्रक्रिया में उन हीरों को प्रमाणित किया जाता रहा है जो विवादास्पद नहीं होते। 81 देश (यूरोपीय संघ के 23 राष्ट्र समेत) इस किम्बर्ली प्रक्रिया के सदस्य हैं और इन देशों को यह प्रमाणित करना होता है कि उनके माध्यम से जाने वाले हीरे विवादास्पद नहीं हैं और उन्हें दूसरे देश में मंजूरी दी जा सकती है। संयुक्त राष्ट्र के नियमों के अंतर्गत विवादास्पद हीरों के व्यापार को मंजूरी नहीं दी जाती है।

विवादास्पद हीरे ऐसे कच्चे हीरे होते हैं जिनका इस्तेमाल वैध सरकारों को कमजोर करने के उद्देश्य से विरोधी आंदोलनों या उनमें सहयोग करने वालों द्वारा धन जुटाने केलिए किया जाता है। किम्बर्ली प्रक्रिया सरकारों द्वारा की जाने वालीवह प्रक्रिया होती है जो इस बात की गारंटी देती है कि केवल विवाद रहित हीरों को ही प्रमाण-पत्र जारी किया गया है न कि विवादित हीरों को। खदानों से लेकर खुदरा विक्रेताओं तक हीरा उद्योग शृंखला के सभी भागीदारों को इस वारंटी व्यवस्था का पालन करना पड़ता है। इसके तहत उन्हें व्यक्तिगत रूप से अपने द्वारा जारी किए गए बिलों में यह घोषणा करनी पड़ती है कि जिन हीरों को उन्होंने बेचा है वे विवादित हीरे नहीं हैं।

पिछले सप्ताह के आखिर में न्यूयॉर्क स्थित विश्व हीरा परिषद की मुंबई में वार्षिक आमसभा का आयोजन हुआ था। 2019 में भारत किम्बर्ली प्रक्रिया के अध्यक्ष की भूमिका निभाएगा। सूत्रों ने कहा कि पिछले सप्ताहांत हुई बैठक में विवादित हीरों की परिभाषा का दायरा बढ़ाने का फैसला किया गया है। इसे औपचारिक रूप मिलने के बाद सदस्य देशों को यह भी प्रमाणित करना होगा कि किम्बर्ली प्रक्रिया में प्रमाणित किए गए हीरे का उपयोग आतंकवाद के वित्त पोषण में नहीं किया गया है।

वारंटी प्रणाली में भी संशोधन किया जा रहा है जिसमें हरेक स्तर पर विक्रेताओं को यह घोषणा करनी पड़ेगी कि जिन हीरों की बिक्री के लिए वे लोग बिल जारी कर रहे हैं, वे हीरे उनकी जानकारी के अनुसार धन-शोधन या भ्रष्टाचार से रहित हैं। किम्बर्ली प्रक्रिया से प्रमाणित हीरे स्वच्छ हीरों के रूप में जाने जाते हैं।

इस बैठक में रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (जीजेईपीसी) ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। यह केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के तहत अर्ध-सरकारी संगठन है। परिषद के चेयरमैन प्रमोद कुमार ने कहा कि धन-शोधन और आतंकवाद के वित्त पोषण के खिलाफ खुद  आत्म-विनियमन को शामिल करने का प्रस्ताव है। किम्बर्ली प्रक्रिया के तहत आतंकवाद और वारंटी प्रणाली केतहत धन-शोधन तथा श्रम मानकों को शामिल करने के भारत के प्रस्ताव पर सभी प्रतिभागियों द्वारा सहमति जताई गई है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने पूरे हीरा उद्योग के लिए सतत विकास को अपनाने का भी प्रस्ताव रखा है। 

खदानों, हीरे तराशने-चमकाने वाली इकइयों/श्रमिकों और खुदरा विक्रेताओं तथा इनके कर्मचारियों समेत वैश्विक रूप से हीरा उद्योग की बड़ी शृंखला है। भारत ने वैश्विक हीरा उद्योग को यह सुनिश्चित करने का प्रस्ताव पेश किया कि इस शृंखला में सभी को, चाहे वह खदान में काम करने वाला छोटा-सा कर्मचारी हो या खदान का मालिक अथवा खुदरा विक्रेता, हीरा उत्पादन से पर्याप्त लाभ मिलना चाहिए। इसमें परिष्कृत और बेचे जाने वाले हीरे भी शामिल हैं। विश्व हीरा परिषद के प्रवक्ता ने कहा कि वारंटी प्रणाली में यह बात भी शामिल करने का प्रस्ताव दिया गया है कि सभी भागीादार वैश्विक रूप से स्वीकृत श्रम-मानवाधिकारों, भ्रष्टाचार रोधी और धन-शोधन रोधी सिद्धांतों का पालन करें ताकि अनिवार्य किम्बर्ली प्रक्रिया प्रमाणीकरण योजना लागू करने में मदद मिल सके। ये परिवर्तन जारी रहेंगे और इन्हें आगामी विश्व हीरा परिषद की 2021-2025 की  रणनीति योजना में शामिल किया जाएगा। अगले महीने ब्रसेल्स में किम्बर्ली प्रक्रिया की बड़ी बैठक होने वाली है जिसमें भारत के प्रस्ताव समेत इस साल के कई प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की संभावना है।
Keyword: diamond, gold, jewellers, डी बीयर्स हीरा उद्योग,
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