बिजनेस स्टैंडर्ड - बढ़ती सुगमता
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बढ़ती सुगमता

संपादकीय /  October 31, 2018

विश्व बैंक के कारोबारी सुगमता सूचकांक की 2019 की रैंकिंग में भारत ने 2018 की तुलना में 23 स्थानों का सुधार किया है। निश्चित तौर पर तेल कीमतों से लेकर घटती वृहद आर्थिक स्थिरता तथा सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच टकराव जैसी आर्थिक मोर्चों पर तमाम नकारात्मक खबरों से जूझ रही केंद्र सरकार को इससे राहत मिलेगी। मोदी सरकार को यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता होगी कि 190 देशों में भारत उन दो देशों में शामिल है जिन्होंने लगातार दो वर्ष इस सूची में सुधार किया है। इससे पहले की बात करें तो वर्ष 2017 में भारत ने केवल एक स्थान का सुधार किया था लेकिन अगले वर्ष 2018 में इसने 30 स्थानों का सुधार किया। अब ताजा सुधार के बाद भारत 77वें स्थान पर आ गया है। 

 
यह कोई छोटीमोटी उपलब्धि नहीं है। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के ऐन पहले वाले वर्षों के दौरान इस सूचकांक में भारत का प्रदर्शन निरंतर खराब होता जा रहा था। वर्ष 2012 में 131वें स्थान से फिसलकर हम 2014 में 142वें स्थान पर आ गए थे। तब से अब तक तेज और सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। प्रधानमंत्री मोदी तथा उनकी सरकार को इसका पूरा श्रेय भी दिया जाना चाहिए। वर्ष 2014 में जहां सभी ब्रिक्स देश हमसे आगे थे, वहीं 2019 में हम दक्षिण अफ्रीका (82), और ब्राजील (109) से आगे हैं और चीन (46) और रूस (31) के साथ अंतर तेजी से कम हो रहा है। भारत अब दक्षिण एशिया का सबसे बढिय़ा रैंकिंग वाला देश है तथा इंडोनेशिया (73) और वियतनाम (69) के लगभग बराबरी पर है। इस सुधार का काफी श्रेय श्रम नियमों में कुछ बदलाव के अलावा वस्तु एवं सेवा कर तथा ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता जैसे सुधारों को भी जाता है। यही वजह है कि छह प्रमुख क्षेत्रों कारोबार की शुरुआत, ऋण तक पहुंच, निर्माण अनुमति, बिजली की उपलब्धता, कर चुकता करने और सीमापार कारोबार, सभी में सुधार देखने को मिला है। 
 
चालू वर्ष की शुरआत में विश्व बैंक के तत्कालीन मुख्य अर्थशास्त्री पॉल रोमर  (जिन्हें हाल ही में अर्थशास्त्र का नोबेल मिला है) ने कारोबारी सुगमता रैंकिंग की विश्वसनीयता को लेकर बहस छेड़ दी थी। रैंकिंग में भारत का सतत सुधार ही देश में सुधारों की गति की विश्वसनीयता का सबसे बड़ा जवाब है। बहरहाल, इसका यह अर्थ भी नहीं कि हम जमीनी दिक्कतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दें। उदाहरण के लिए तमाम सुधारों के बावजूद कुछ अहम क्षेत्र हैं जिनमें हमारा प्रदर्शन अभी भी कमजोर है। मसलन अनुबंध प्रवर्तन। यह हमारे यहां पारंपरिक रूप से कमजोर क्षेत्र बना हुआ है और अभी भी हम इसमें कोई खास सुधार नहीं कर पाए हैं। इसके अलावा जीएसटी और आईबीसी की मदद मिलने के बावजूद कर चुकाने और दिवालिया प्रकरणों के निस्तारण में भारत का प्रदर्शन अभी भी काफी कमजोर है। इससे पता चलता है कि इन सुधारों के क्रियान्वयन को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए अभी क्या कुछ किए जाने की आवश्यकता है? इतना ही नहीं यह भी समझना होगा कि ये रैंकिंग दिल्ली और मुंबई के रूप में दो प्रमुख शहरों में हुए सुधार से आकलित की जाती है। इन दोनों को देश की राजनीतिक और वित्तीय राजधानी होने का लाभ मिलता है। अन्य प्रमुख शहरों तथा छोटे शहर-कस्बों में हालत अभी भी काफी खराब है। सुधारों का दायरा बढ़ाकर उन्हें दूरदराज इलाकों तक ले जाने के लिए राज्यों को पहल करनी होगी। ऐसा करने पर ही कारोबारी सुगमता के मामले में पूरे देश के प्रदर्शन में सुधार हो सकेगा। 
Keyword: world bank, business, GST, IBC, ranking,,
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