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आईएलऐंडएफस पर 16 प्रतिशत कर्ज

बीएस संवाददाता / मुंबई 10 31, 2018

वित्तीय क्षेत्र पर आईएलऐंडएफएस संकट का प्रभाव काफी अधिक होगा

आईएलऐंडएफस पर 570 अरब रुपये का कर्ज सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और संस्थानों का है

ज्यादातर पूंजी एलआईसी, एसबीआई, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे वित्तीय संस्थानों की है

बिजनेस स्टैंडर्ड आईएलऐंडएफस पर 16 प्रतिशत कर्जनए प्रबंधन के अधीन समूह की प्रगति रिपोर्ट में कहा गया है कि आईएलऐंडएफएस का दिवालिया संकट वित्तीय व्यवस्था के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा बुधवार को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है, 'वित्तीय क्षेत्र पर आईएलऐंडएफएस संकट का प्रभाव काफी अधिक होगा, जैसा कि कुछ कंपनियों के आंशिक तौर दिवालियापन और सितंबर में वित्तीय बाजारों में इसके गंभीर नतीजों से संकेत मिला है।'

रिपोर्ट में कहा गया है, 'यदि समस्या को सही ढंग से निपटाया नहीं गया तो समूह में और अधिक चूक का आगामी प्रभाव वित्तीय स्थायित्व के लिए खतरा साबित हो सकता है।'

इस संदर्भ में आईएलऐंडएफएस समूह को इतनी ज्यादा सुर्खियां मिलने की मुख्य वजह यह है कि उसके बहीखाते में दर्ज 910 अरब रुपये के कर्ज में से 570 अरब रुपये सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और संस्थानों के हैं। रिपोर्ट में कंपनी मामलों के मंत्रालय की मूल याचिका का हवाला देते हुए कहा गया है, 'आईएलऐंडएफएस में ज्यादातर पूंजी निवेश भारतीय जीवन बीमा निगम, भारतीय स्टेट बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों के अलावा यूटीआई, एएमसी आदि द्वारा किया गया।' 

आर्थिक मामलों के विभाग की 30 सितंबर, 2018 की एक गोपनीय रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि समेकित आधार पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों से आईएलऐंडएफएस की उधारी (डिबेंचर्स, ऋण, वाणिज्यिक पत्र आदि) 2017-2018 की बैलेंस शीट के अनुसार 630 अरब रुपये पर थी।  

आईएलऐंडएफएस के लिए बैंकों का निवेश 530 अरब रुपये था, जो एनबीएफसी क्षेत्र के लिए बैंकों द्वारा दिए गए 3.3 लाख करोड़ रुपये के कुल ऋणों का 16 प्रतिशत है। इससे आईएलऐंडएफएस गु्रप 'न सिर्फ महत्वीन बल्कि वित्तीय स्थायित्व के लिए खतरा' बन गया है।  

रिपोर्ट में कहा गया है, 'इसलिए, इस समूह की ऋण निपटान क्षमता और अच्छा शासन एवं प्रबंधन सुनिश्चित करना सार्वजनिक हित में है।' प्रत्यक्ष वित्तीय प्रभाव के अलावा, आईएलऐंडएफएस ग्रुप परियोजना वित्त पोषण, इक्विटी और डेट फाइनेंसिंग के जरिये कई इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से जुड़ा हुआ है।

प्रगति रिपोर्ट में कहा गया है, 'इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को समर्थन और वित्त पोषण में उसकी दक्षता में अचानक असंतुलन उसके 910 अरब रुपये के उधारी स्तर को देखते हुए पूरे इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र, वित्तीय बाजारों और अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।' रिपोर्ट में कहा गया है, 'इसलिए, केंद्र सरकार द्वारा समय पर हस्तक्षेप आईएलऐंडएफएस गु्रप को पतन से बचाने और बाजारों पर इसके कुप्रभाव को सीमित करने के लिए जरूरी था।'

Keyword: IL&FS, fund, share, LIC, SIDBI, इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंस सर्विसेज,
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