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खत्म तकरार, बाजार को करार!

अरूप रायचौधरी, अनूप रॉय और सोमेश झा / नई दिल्ली/मुंबई 10 31, 2018

आरबीआई ने बुलाई बोर्ड बैठक

►  सरकार के उठाए मुद्दों पर होगा विचार
►  पटेल के इस्तीफे की अटकलों पर लगा विराम
►  आरबीआई की स्वायत्तता के मुद्दे पर सरकार और केंद्रीय बैंक में टकराव
►  सरकार ने कहा कि कानून के दायरे में केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता है जरूरी

बिजनेस स्टैंडर्ड खत्म तकरार, बाजार को करार!भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने 19 नवंबर को निदेशक मंडल की बैठक बुलाई है जिसमें सरकार द्वारा उठाए गए मसलों पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने यह संकेत दिया कि केंद्रीय बैंक पर उनकी मजबूत पकड़ बनी हुई है। इससे उनके इस्तीफे की अटकलों पर भी फिलहाल विराम लग गया है। दूसरी ओर वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि केंद्रीय बैंक और सरकार को जनहित और भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों के मुताबिक चलना होगा। सरकार और आरबीआई के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं। इनमें लाभांश के हस्तांतरण, पूंजी पर्याप्तता के नियम और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की नकदी जरूरत शामिल है। मंत्रालय ने आरबीआई की स्वायत्तता के महत्त्व की बात की जो सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच मतभेद का मुख्य मुद्दा है। 

अभी आरबीआई का पूरा जोर बैंकिंग प्रणाली को पर्याप्त नकदी मुहैया कराने पर है। अक्टूबर में बैंक ने शेयर बाजार से 360 अरब रुपये के बॉन्ड खरीदने घोषणा की थी। नवंबर में उसकी योजना शेयर बाजार से 400 अरब रुपये के बॉन्ड खरीदने की है। इसके तहत गुरुवार को 120 अरब रुपये के बॉन्ड खरीदे जाएंगे। बैंकिंग प्रणाली में नकदी झोंकने की आरबीआई की कोशिशों से बाजार को राहत मिली है। बुधवार को 10 साल की परिपक्वता वाला बॉन्ड मामूली सुधार के साथ 7.85 फीसदी पर बंद हुआ। रुपये डॉलर के मुकाबले 73.95 के स्तर पर बंद हुआ जबकि कारोबार के दौरान एक समय यह 74.15 पर पहुंच गया था।

वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'आरबीआई कानून की परिधि में केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता एक आवश्यक और स्वीकृत शासन जरूरत है। भारत में सरकारों ने इसका पालन और सम्मान किया है।' अक्टूबर के पहले पखवाड़े में आर्थिक मामलों के विभाग ने विभिन्न नियामकीय नीतियों पर चर्चा के लिए आरबीआई कानून की धारा 7 के तहत आरबीआई गवर्नर को तीन पत्र भेजे थे।  सरकार ने अपने सुझाव दिए और विभिन्न मुद्दों पर पटेल से राय मांगी। इनमें लाभांश हस्तांतरण, दबाव वाली बिजली परिसंपत्तियों, त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई के नियमों में ढील, सूक्ष्म, लघु एवं मझोली कंपनियों को छूट, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों और एनबीएफसी में नकदी संकट का मामला शामिल था। 

सूत्रों के मुताबिक आरबीआई ने तय समयसीमा के भीतर सरकार के पत्रों का जवाब दे दिया था। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि सरकार के पत्र में आरबीआई कानून की धारा सात का जिक्र किया गया था लेकिन उसने धारा 7 (1) का उल्लेख नहीं किया। इसके मुताबिक सरकार जनहित में बैंक के गवर्नर के साथ सलाह मशविरा करके आरबीआई को दिशानिर्देश जारी कर सकती है। 

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, 'क्या सरकार यह बताएगी कि इस तरह के पत्र लिखे गए हैं और क्या उनमें विशेष तौर पर आरबीआई कानून की धारा सात का जिक्र है।' वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि विभिन्न मुद्दों पर उसने अपनी राय रखी है और संभावित समाधान सुझाया है और सरकार आगे भी ऐसा करती रहेगी। मंत्रालय ने कहा,  'विभिन्न मुद्दों पर सरकार और आरबीआई के बीच समय-समय पर व्यापक विचार विमर्श होता रहता है। सरकार दूसरे नियामकों के साथ भी इसी तरह सलाह मशविरा करती है। भारत सरकार कभी भी इन मुद्दों को सार्वजनिक नहीं करती है। केवल अंतिम निर्णय ही बताया जाता है।' 

सरकार के आरबीआई कानून की धारा सात का इस्तेमाल करने की धमकी देने के मुद्दे को वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक के बीच चल रहे मौजूदा टकराव से अलग नहीं किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक आरबीआई के निदेशक मंडल की पिछली बैठक में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग और गवर्नर ऊर्जित पटेल के बीच तीखी बहस हुई थी। 

नकदी की आस में बाजार में उल्लास

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की स्वायत्तता के संबंध में चिंता दूर करने के सरकार के कदम का बाजार पर सकारात्मक असर पड़ा। इसके साथ ही सरकार द्वारा नकदी की किल्लत दूर करने की चर्चा से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और बैंकों के शेयरों में खासी तेजी दर्ज की गई। सकारात्मक वैश्विक संकेतों से भी निवेशकों का मनोबल बढ़ा। उतार-चढ़ाव के बीच बेंचमार्क सूचकांक 1.5 फीसदी से ज्यादा बढ़त के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 551 अंक चढ़कर 34,442 पर बंद हुआ, जो 17 अक्टूबर के बाद इसका उच्च स्तर है। निफ्टी भी 188 अंक चढ़कर 10,386.6 पर बंद हुआ। 

मॉर्गन स्टैनली इंडिया के प्रबंध निदेशक रिधम देसाई ने कहा, 'आरबीआई और सरकार द्वारा हाल में उठाए गए कदम से बाजार में 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नकदी प्रवाह होगा।' अक्टूबर में आरबीआई ने खुले बाजार परिचालन से 360 अरब रुपये के बॉन्ड खरीदने की घोषणा की थी। नवंबर में भी 400 अरब रुपये के बॉन्ड खरीदने की योजना है। पहली किस्त के तौर पर गुरुवार को 120 अरब रुपये के बॉन्ड खरीदे जा सकते हैं। 10 वर्षीय बॉन्ड का प्रतिफल मामूली बढ़कर 7.85 फीसदी रहा।
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