बिजनेस स्टैंडर्ड - 'आकाश' में आशंका
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'आकाश' में आशंका

संपादकीय /  October 30, 2018

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में हवाई यात्रा क्षेत्र की तेज प्रगति के बावजूद नागरिक विमानन क्षेत्र वाणिज्यिक रूप से गड़बडिय़ों का शिकार है। ताजा खबर देश की सबसे पुरानी निजी विमानन कंपनी जेट एयरवेज से जुड़ी है, जो देश की पूर्ण सेवा देने वाली बड़ी कंपनी भी है। खबरों के मुताबिक जेट एयरवेज उस कंपनी को भुगतान करने में चूक कर गई है जिससे वह विमान पट्टे पर लेती है। कंपनी के पास 108 विमान पट्टे पर हैं। वह भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का भुगतान करने में भी विलंब से चल रही है। कंपनी का कहना है कि वह अपना सारा बकाया चुकता कर देगी लेकिन निश्चित तौर पर कंपनी की वित्तीय स्थिति को लेकर कुछ न कुछ अनिश्चितता तो चल रही है। जेट कई संभावित निवेशकों से संपर्क कर रही है जिनमें टाटा भी शामिल है। टाटा समूह विस्तारा के साथ पहले ही इस कारोबार में कदम रख चुका है। विस्तारा सिंगापुर एयरलाइंस और एयर एशिया के साथ सहयोग से चलती है। फिलहाल अबू धाबी की कंपनी एतिहाद एयरवेज जेट में बड़ी निवेशक है और इसमें संदेह ही है कि वह कंपनी में अधिक पैसा डाल पाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि वह स्वयं घाटे की शिकार है। अटकलें तो यह भी हैं कि उसे बचाने के लिए दुबई की एमिरेट्स एयरलाइंस के साथ उसका विलय हो सकता है। 

 
जब भी कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है तो भारतीय विमानन उद्योग संकट में नजर आता है। यह भी सच है कि विमानन कारोबार जटिल है और इस क्षेत्र की नामीगिरामी कंपनियों पर भी दिवालिया होने का जोखिम मंडराता रहता है। फिर भी यात्रियों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी को देखें तो भारतीय विमानन क्षेत्र की दिक्कतें जरूरत से ज्यादा गंभीर हैं। हकीकत में देखा जाए तो निजी क्षेत्र और सरकार की ओर से बीते एक दशक से अधिक समय में सिलसिलेवार गलतियां हुई हैं। इस क्षेत्र में बाजार को पूरी तरह कारोबार का संचालन नहीं करने दिया गया। गैर जरूरी ढंग से लॉबीइंग की अनुमति दी गई और कई अवसरों पर उद्योग जगत के अनुरोध ठुकराए गए। जेट एयरवेज को खुद भी अतीत में सरकार के कदमों का खूब लाभ मिला। अतीत में सरकार ने भारत और अबू धाबी और दुबई के बीच उड़ान में सीटें बढ़ाने की अनुमति दी। 
 
इसका फायदा न केवल खाड़ी देशों की बड़ी विमानन कंपनियों को मिला बल्कि जेट को भी इसका लाभ मिला क्योंकि वह एतिहाद के जरिये अबू धाबी हब का अभिन्न अंग बन चुकी थी। इस बीच सरकार ने अब बंद हो चुकी किंगफिशर को खाड़ी के हवाई अड्डों पर उतरकर ईंधन लेने तक की सुविधा देने से इनकार कर दिया। जबकि यह अनुमति मिलती तो उसका ईंधन बिल कम होता। सरकार ने ऐसा सरकारी तेल विपणन कंपनियों को बचाने के लिए किया। अगर सरकार विमानन क्षेत्र को स्थायित्व और मुनाफे भरा बनाना चाहती है तो उसे कई अहम कदम उठाने चाहिए। पहला, एयर इंडिया को सब्सिडी देनी बंद करनी चाहिए और करदाताओं के पैसे से उसे घाटे में चलाने के बजाय उसके निजीकरण के प्रयास नए सिरे से किए जाने चाहिए। सरकारी विमानन कंपनी न केवल यात्रियों की संख्या के मामले में पिछड़ चुकी है बल्कि वह बाजार में विसंगति पैदा कर रही है क्योंकि वह सरकारी बजट से चलती है जबकि शेष प्रतिस्पर्धी कंपनियों को खुले बाजार से पैसा जुटाना होता है। सबसे अहम बात, समय आ चुका है कि नागरिक विमानन महानिदेशालय यानी डीजीसीए के स्थान पर कहीं अधिक स्वतंत्र नियामक स्थापित किया जाए। इस दिशा में भारतीय विमानपत्तन आर्थिक नियामकीय प्राधिकार एक अच्छा उदाहरण हो सकता है।
Keyword: aviation, flight, airport, jet airways,,
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