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आवासीय इमारतों के डेवलपरों के लिए आगे मुश्किल दौर

अद्वैत राव पलेपू / मुंबई October 30, 2018

हाल में वित्तीय क्षेत्र में पूंजी और संपत्ति-देनदारी मसलों की वजह से वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ऋण संकट का असर आवास बाजार तक पहुंच जाएगा। यह राय विशेषज्ञों की है। आंकड़े दर्शाते हैं कि कैलेंडर वर्ष 2018 के शुरुआती 9 महीनों में आवासीय मकानों की बिक्री बढ़ी है, जबकि बिना बिके मकानों की संख्या में कमी आई है। सितंबर, 2018 के अंत तक के तीन महीनों में नई आवासीय परियोजनाओं की शुरुआत घटकर 12.77 लाख मकानों पर आ गई है।   सैंग्टम वेल्थ मैनजमेंट के सह-प्रमुख (रियल एस्टेट) तेजस पाटिल ने कहा, 'ज्यादातर बिक्री किफायती और मध्य आय आवासीय क्षेत्र में हुई है, जबकि महंगी परियोजनाओं में बिक्री अनुमान के मुताबिक कमजोर है। किफायती आवासों की बिक्री पिछले छह महीनों के दौरान करीब 50 फीसदी बढ़ी है। हमारा अनुमान है कि इसमें वित्त वर्ष 2022 तक बढ़ोतरी जारी रहेगी क्योंकि सरकार ऐसी परियोजनाओं को प्रोत्साहन दे रही है।'
 
इस समय रियल एस्टेट बाजार में 55 फीसदी हिस्सा किफायती आवास (50 लाख रुपये तक) का है। जबकि मध्य आय परियोजनाओं (75 लाख रुपये तक) का बाजार में 75 फीसदी हिस्सा है। पिछले तीन से चार वर्षों के दौरान ऋण बाजार (बैंक ऋण वृद्धि) में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है, जिसकी वजह फंसे कर्जों के मामले में प्रमुख बैंकों के खातों को साफ-सुथरा बनाने के नियामकीय निर्देश और नोटबंदी जैसी सरकार की पहल रही हैं। अच्छी खासी पूंजी वाली  संस्थाएं होने से गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों (एचएफसी) सरकारी बैंकों की बाजार हिस्सेदारी विशेष रूप से आवासीय रियल एस्टेट में हड़पने में कामयाब रही हैं। रियल एस्टेट क्षेत्र में एनबीएफसी और एचएफसी खरीदारों और रियल एस्टेट डेवलपरों दोनों को अपनी सेवाएं देती हैं। 
 
आवासीय रियल एस्टेट में वृद्धि की अगुआई आगामी तिमाहियों में किफायती और मध्य आय खंड करेगा। नाइट फ्रैंक के कार्यकारी निदेशक (अनुसंधान) अरविंद नंदन ने कहा, 'बिना बिके मकानों की संख्या में थोड़ी कमी आ सकती है क्योंकि डेवलपर नई परियोजनाएं शुरू करने को लेकर ज्यादा सतर्क बन रहे हैं। आगे दो चीजें एकसमान अहम होंगी। पहली यह है कि आपूर्ति पक्ष को फंड मिल सकता है, जिस पर इस समय दबाव है। दूसरी चीज खरीदारों की मॉर्गेज भुगतान क्षमता है।'  वित्तीय उद्योग में पिछले दो महीनों से चल रहे वर्तमान संकट के कारण निश्चित रूप से डेवलपरों के लिए धन जुटाना पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है। पाटिल ने कहा, 'अगली एक-दो तिमाहियां होम लोन लेने वालों के लिए मुश्किल रहेंगी क्योंकि बहुत सी कंपनियों (एनबीएफसी/एचएफसी) ने नए ऋण देना बंद कर दिया है। यहां तक कि उन्होंने वे ऋण भी रोक दिए हैं, जिन्हें मंजूरी दी जा चुकी है। बैंक भी ऋण देने में ना-नुकुर कर रहे हैं। इसका मतलब है कि डेवलपरों के लिए ऋण की लागत बढ़ेगी क्योंकि एचएफसी, एनबीएफसी और बैंकों के लिए ऋण देने की लागत बढ़ रही है।'
Keyword: real estate, property, GST, RERA,,
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