बिजनेस स्टैंडर्ड - एनबीएफसी पर तनातनी जारी
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एनबीएफसी पर तनातनी जारी

सोमेश झा, अरूप रॉयचौधरी और श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली/मुंबई 10 30, 2018

सरकार बनाम आरबीआई

जेटली ने तरलता पर चिंता जताई, आरबीआई ने कहा गंभीर नहीं नकदी की किल्लत
आईएलऐंडएफएस संकट को लेकर एनबीएफसी में नकदी की किल्लत पर चर्चा
सरकार ने कहा कि अन्य एनबीएफसी का न हो आईएलऐंडएफएस जैसा हाल
आरबीआई ने कहा कि एनबीएफ सी में नकदी संकट उतना गंभीर नहीं
भुगतान नियामक के सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा, लेकिन आरबीआई ने जताई आपत्ति
वित्तीय क्षेत्र में साइबर सुरक्षा मसले पर हुई चर्चा

बिजनेस स्टैंडर्ड एनबीएफसी पर तनातनी जारीसरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बीच मतभेदों का सिलसिला मंगलवार को हुई वित्तीय स्थिरता एवं विकास परिषद (एफएसडीसी) की बैठक में भी जारी रहा। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में तरलता की स्थिति और भुगतान प्रणाली के नियमन के लिए एक नए नियामक की जरूरत के मसले पर दोनों ही पक्षों के रुख जुदा नजर आए। एफएसडीसी बैठक में आईएलऐंडएफएस संकट और एनबीएफसी क्षेत्र पर पड़ रहे इसके असर का मुद्दा सरकार की चिंता के केंद्र में दिखा। सरकार चाह रही है कि आरबीआई तरलता पर लगाए बंधनों को थोड़ा शिथिल करे लेकिन रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने नियमों में ढील देने पर असमर्थता जताई। 

बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आरबीआई से यह सुनिश्चित करने को कहा कि एनबीएफसी क्षेत्र में समुचित तरलता बनी रहे और इस संकट का दूसरे एनबीएफसी कंपनियों और अन्य क्षेत्रों पर उत्तरोत्तर प्रभाव न पड़े। एक अधिकारी ने कहा, 'सरकार ने बैठक में यह साफ किया कि आईएलऐंडएफएस की तरह का संकट भविष्य में दूसरी एनबीएफसी कंपनियों में नहीं पैदा होना चाहिए।

सरकार ने एनबीएफसी कंपनियों के तरलता समस्या से जूझने की बात स्वीकार करते हुए आरबीआई से यह सुनिश्चित करने को कहा कि इस संक्रमण का फैलाव न हो।' हालांकि आरबीआई का मानना है कि एनबीएफसी में नकदी की कमी की समस्या व्यापक नहीं है और उसके पास उपलब्ध आंकड़े इसे कोई व्यवस्थागत मसला नहीं बता रहे हैं। इस सूत्र ने कहा, 'आरबीआई ने कहा कि मुद्रास्फीति नियंत्रण में है और उसकी तरफ से नीतिगत ब्याज पर भी सख्ती नहीं बरती जा रही है।'

रिजर्व बैंक ने महीने की शुरुआत में नीतिगत ब्याज दरों की समीक्षा के दौरान वाणिज्यिक बैंकों को अपनी तरफ से दिए जाने वाले कर की दर रीपो रेट को 6.5 फीसदी पर स्थिर बनाए रखा था जबकि अपने रुख को 'अंशशोधित सख्त' से 'तटस्थ' कर दिया था। सूत्रों ने बताया कि वित्तीय सेवा विभाग को एनबीएफसी में तरलता स्थिति के बारे में आंकड़े आरबीआई को मुहैया कराने को कहा गया है। बैठक में दूसरा अहम मुद्दा भुगतान प्रणाली नियामक के गठन को लेकर उठा। आरबीआई ने अपना रुख पूरी तरह साफ करते हुए कहा कि भुगतान नियमन के लिए अलग नियामक की कोई जरूरत नहीं है।

सरकार ने देश में सभी भुगतान प्रणालियों की निगरानी के लिए स्वतंत्र नियामक भुगतान नियमन बोर्ड (पीआरबी) के गठन का प्रस्ताव रखा है। आरबीआई ने गत सप्ताह इस पर अपनी असहमति जताते हुए कहा था कि यह नियामक उसके निगरानी दायरे में ही रहना चाहिए। बैठक से जुड़े सूत्र ने कहा, 'अधिकांश बिंदुओं पर आरबीआई को दूसरे नियामकों का साथ नहीं मिला। बाजार नियामक सेबी को छोड़कर बाकी सभी नियामकों ने सरकार के रुख का ही समर्थन किया। सेबी भी काफी हद तक तटस्थ बना रहा।'

एफएसडीसी की बैठक में सरकार के अलावा वित्तीय क्षेत्र के सभी नियामक शामिल होते हैं। सेबी, बीमा नियामक आईआरडीएआई, आरबीआई, पेंशन निधि नियमन एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) और दिवालिया बोर्ड के प्रमुख सरकारी प्रतिनिधियों संग हुई बैठक में शामिल हुए। इस बैठक की खास बात यह रही कि रिजर्व बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल के अलावा चारों डिप्टी गवर्नर- एन एस विश्वनाथन, विरल आचार्य, बी पी कानूनगो और एम के जैन भी इसमें मौजूद रहे। आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की गत सप्ताह हुई बैठक में सरकार की तरफ से एनबीएफसी को विशेष पुनर्वित्त सुविधा देने का प्रस्ताव रखा गया था लेकिन केंद्रीय बैंक ने उसे नकार दिया था।

आरबीआई का कहना था कि देश भर में सक्रिय 11,000 एनबीएफसी में से महज 200 ही जमा लेने वाली कंपनियां हैं लिहाजा नकदी की कोई समस्या नहीं है। सूत्रों के मुताबिक बैंकिंग नियामक एनबीएफसी में तरलता के मसले पर कोई व्यापक हस्तक्षेप नहीं करना चाहता है। इसके अलावा गत शुक्रवार को डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य की कड़ी टिप्पणी ने भी तनातनी को बढ़ाने का काम किया है। 

Keyword: RBI, NBFC, arun jaitley, FSDC,,
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