बिजनेस स्टैंडर्ड - रिजर्व बैंक से नाखुश सरकार
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रिजर्व बैंक से नाखुश सरकार

सोमेश झा / नई दिल्ली 10 29, 2018

सरकार-रिजर्व बैंक में मतभेद

इन मसलों पर है मतभेद

एफआरडीआई विधेयक, पीएनबी धोखाधड़ी
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भी निजी क्षेत्र की तरह मिले नियामकीय अधिकार
बैंक के बोर्डों में आरबीआई के नामित सदस्य
पीसीए नियम, एनबीएफसी में नकदी संकट

बिजनेस स्टैंडर्ड रिजर्व बैंक से नाखुश सरकारभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और वित्त मंत्रालय के बीच मतभेद को देखते हुए अधिकारियों का कहना है कि सरकार नाखुश है क्योंकि नियामक ने त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई (पीसीए) और गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के नियमों को अंतिम रूप देने से पहले उसके साथ परामर्श नहीं किया। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आरबीआई ने पीसीए और एनपीए मसले पर अपनी बोर्ड बैठक में भी चर्चा नहीं की। अधिकारी ने नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा, 'पीसीए प्रारूप को अप्रैल 2017 में संशोधित कर सख्त बनाया गया था लेकिन इस बारे में किसी बोर्ड बैठक में चर्चा नहीं की गई थी। इसमें संशोधन का तर्क क्या था और आरबीआई ने यह निर्णय किस आधार पर किया, इसके बारे में सरकार को जानकारी नहीं थी। एनपीए प्रारूप में भी संशोधन करने को लेकर बोर्ड बैठक में विचार-विमर्श नहीं किया गया था।'

पीसीए के संशोधित नियमों को लेकर सरकार और आरबीआई के बीच विवाद है। सरकार चाहती है कि पीसीए नियमों को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किए गए बेसल नियमन के अनुरूप बनाया जाए। हालांकि आरबीआई का मानना है कि पीसीए को लागू करने से बैंकों के जोखिम को कम करने में मदद मिली है और इस समय नियमों में ढील से बचना चाहिए। बीते मंगलवार को इस मसले पर आरबीआई की बोर्ड बैठक में भी चर्चा की गई थी। आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग और वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार भी बोर्ड बैठक में शामिल थे। एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'सरकार के नामितों को आरबीआई बोर्ड द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय पर मत देने का अधिकार नहीं है। ऐसे में आरबीआई बोर्ड स्वतंत्र है।' वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को नीतिगत मसलों पर नियामक के साथ विस्तृत चर्चा की जरूरत पर जोर दिया। 

जेटली ने कहा, 'मेरे विचार से किसी भी नियामकीय व्यवस्था में हितधारकों के साथ सलाह-मशविरा करने को प्राथमिकता देनी चाहिए।' हालांकि आरबीआई ने पिछले साल पीसीए नियमों को सख्त बनाने का निर्णय वित्तीय स्थायित्व एवं विकास परिषद (एफएसडीबी-एससी) द्वारा दिसंबर 2014 में की गई सिफारिशों के बाद लिया गया था। बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने की थी और उसमें वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। जेटली का उक्त बयान डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के आरबीआई को ज्यादा स्वायत्तता देने की वकालत करने के एक दिन बाद आया था। 

आचार्य ने कहा था कि केंद्रीय बैंक को सार्वजनिक क्ष्क्षेत्र के बैंकों की निगरानी करने और उनके बहीखातों को सुदृढ़ रखने के लिए ज्यादा अधिकार मिलने चाहिए। इस तरह की स्वतंत्रता व्यापक वित्तय और वृहद आर्थिक स्थिरता कायम करने के लिए जरूरी है।सरकार यह भी चाहती है कि आरबीआई 12 फरवरी के अपने परिपत्र में ढील दे। इस परिपत्र में आरबीआई ने ऋणदाताओं को निर्देश दिया है कि वे एक तय समयसीमा के अंदर डिफॉल्ट करने वाली कंपनियों की दिवालिया समाधान प्रक्रिया पूरी करें। बिजली क्षेत्र में फंसी संपत्तियों के समाधान के लिए उच्च अधिकारप्राप्त समिति की अहम बैठक में भी इसने अपने प्रतिनिधि नहीं भेजे। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आरबीआई के पास निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के नियमकन का समान अधिकार है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया बैंक बोर्ड ब्यूरो के साथ शुरू होती है, जिसमें आरबीआई के नामित भी हैं। बैंक बोर्ड ब्यूरो अपनी सिफारिशें सरकार को भेजता है। उसके बाद सरकार इस पर अंतिम निर्णय लेने से पहले आरबीआई से मंजूरी लेती है। 

अधिकारी ने कहा, 'निजी क्षेत्र के बैंकों के मामले में उनका बोर्ड संबंधित बैंक के मुख्य कार्याधिकारी का चयन करते हैं और इसकी मंजूरी आरबीआई से लेते हैं।' इसी तरी सार्वजनिक बैंकों के मुख्य कार्याधिकारियों को पद से हटाने के मामले में सरकार ने बीते समय में आरबीआई की मांग पर सहमति जताई है।अधिकारी ने पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में 144 अरब रुपये की धोखाधड़ी मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार ने इलाहाबाद बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी उषा अनंतसुब्रमण्यन को सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले बर्खास्त कर दिया था, लेेकिन यह तब किया गया जब पीएनबी मामले को लेकर आरबीआई नेे उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया था। पीएनबी के दो कार्यकारी निदेशकों के मामले में भी इसी तरह की कार्रवाई की गई। बैंक ऑफ इंडिया और पीएनबी के विलय का निर्णय भी आरबीआई की सिफारिशों के आधार पर लिया गया था।

Keyword: RBI, finance ministry, PCA, NPA,,
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