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इस्तेमाल का तरीका दिलाता है टॉप-अप लोन में कर छूट

तिनेश भसीन /  October 28, 2018

त्योहारी मौसम में कई लोग पहले से चले आ रहे अपने आवास ऋण पर टॉप-अप लोन लेने का फैसला करते दिखते हैं। उस लोन से मिली रकम का इस्तेमाल आम तौर पर घरों की मरम्मत कराने अथवा अतिरिक्त कमरा बनवाने आदि पर किया जाता है। आवास ऋण के बदले ग्राहकों को आयकर में छूट की सुविधा मिलती है। यह छूट मूलधन पर भी मिलती है और ब्याज पर भी मिलती है। लेकिन टॉप-अप लोन लेने पर कर संबंधी लाभ इस बात पर निर्भर करते हैं कि कर्ज का इस्तेमाल किस तरह किया गया है। 

 
जब भी कोई व्यक्ति बड़ी रकम हासिल करना चाहता है तो उसके लिए टॉप-अप लोन सबसे सस्ता कर्ज होता है। इसके लिए उसे कागजी झंझटों में भी कम से कम पडऩा पड़ता है। पैसाबाजार डॉट कॉम से मिली जानकारी के मुताबिक निजी ऋणदाता बैंकों में ऐक्सिस बैंक टॉप-अप लोन के लिए 8.45 फीसदी से 12.10 फीसदी तक की दर से ब्याज वसूल रहा है और एचडीएफसी बैंक 8.50 से 9.20 फीसदी की ब्याज दर पर टॉप-अप लोन दे रहा है। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जैसे सरकारी बैंकों में टॉप-अप लोन के लिए ब्याज दर 9.60 फीसदी से 9.85 फीसदी है और यूको बैंक 9.95 फीसदी ब्याज दर पर टॉप-अप लोन दे रहा है।
 
कर्ज की रकम का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा, यह कर्ज देने वाले तय नहीं कर सकते। वे ग्राहक से हलफनामा लेते हैं कि टॉप-अप लोन किस काम के लिए लिया जा रहा है। इसीलिए कई लोग मकान की मरम्मत कराने के लिए, मकान में कमरे बढ़ाने के लिए, बच्चों की शिक्षा के लिए या उनके विवाह के लिए टॉप-अप लोन लेते हैं। कई बार तो पहले से चल रहे कर्ज को निपटाने के लिए भी टॉप-अप लोन लिया जाता है। व्यापारी टॉप-अप लोन से मिली रकम का इस्तेमाल नकदी की अपनी जरूरत पूरी करने के लिए भी कर सकते हैं। चूंकि टॉप-अप लोन का इस्तेमाल अलग-अलग मकसद के लिए होता है, इसीलिए कर संबंधी फायदे भी अलग-अलग होते हैं। 
 
इसमें भी कर संबंधी फायदों के लिए बुनियादी नियम वही होता है, जो सामान्य आवास ऋण के लिए होता है। नांगिया एडवाइजर्स की कार्यकारी निदेशक नेहा मल्होत्रा बताती हैं, 'अगर कोई व्यक्ति टॉप-अप लोन का इस्तेमाल आवासीय संपत्ति की खरीद, निर्माण, मरम्मत या जीर्णोद्घार में करता है तो उसके ब्याज पर वह कर में छूट हासिल कर सकता है। अगर संपत्ति खरीदी गई है या बनाई गई है तो उसके मूलधन वाले हिस्से पर धारा 80सी के तहत आयकर छूट मिल सकती है।' अगर आप टॉप-अप लोन लेकर नया मकान बना रहे हैं या तैयार जायदाद खरीद रहे हैं तो आपको ब्याज के साथ मूलधन पर भी कर कटौती का फायदा मिल सकता है। अगर आप अपने मकान में नया कमरा बना रहे हैं तो भी आपको मूलधन और ब्याज पर कर छूट मिल जाएगी। लेकिन अगर आप निर्माणाधीन संपत्ति खरीद रहे हैं तो सामान्य आवास ऋण के नियम लागू होंगे। इसमें मूलधन पर 1.50 लाख रुपये तक की रकम पर आयकर में छूट हासिल होती है। क्लियरटैक्स में चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रीति खुराना कहती हैं, 'ऋण लेने वाला निर्माण से पूर्व की अवधि में यानी कर्ज लेने की तारीख से लेकर निर्माण पूरा होने की तारीख के बीच की अवधि में अदा की गई मासिक किस्तों के ब्याज वाले हिस्से पर आयकर में छूट का दावा कर सकता है। लेकिन यह छूट पांच बराबर सालाना किस्तों में मिलेगी और उस साल से शुरू होगी, जिस साल निर्माण कार्य पूरा हुआ है।' 
 
लेकिन इसमें भी एक पेच है। निर्माण पूर्व अदा किए गए ब्याज पर अगर नियमित ब्याज के साथ आयकर छूट मांग रहे हैं तो किसी भी वित्त वर्ष में कुल मिलाकर 2 लाख रुपये से अधिक पर छूट नहीं मांगी जा सकती है। कटौती इस बात पर भी निर्भर करती है कि टॉप-अप लोन जिस मकान के लिए लिया गया है, उसमें आप खुद रहते हैं या नहीं। जिस मकान में खुद रहते हैं, उसमें धारा 24 के तहत किसी भी वित्त वर्ष में अधिकतम 2 लाख रुपये ब्याज पर छूट मांगी जा सकती है। खुराना बताती हैं, 'अगर मकान किराये पर दे दिया गया है तो आवास ऋण पर चुकाए गए समूचे ब्याज पर धारा 24 के तहत आयकर छूट का दावा किया जा सकता है। 'हाउस प्रॉपर्टी' के मद में करदाता अधिकतम 2 लाख रुपये तक के कुल घाटे का दावा कर सकता है। आवासीय संपत्ति से होने वाला कुछ भी घाटा अगर इस सीमा के बाद बचा रह जाता है तो उसे आगे के वर्षों में आवासीय संपत्ति से होने वाली आय में से घटाया जा सकता है।' लेकिन कर विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर ऋण मकान के पुनरुद्घार के लिए लिया गया है तो उस पर अदा किए गए ब्याज पर किसी भी वित्त वर्ष में अधिकतम 30,000 रुपये तक छूट मिल सकती है। टॉप-अप लोन का मकसद बच्चों की शिक्षा, उनका विवाह या कारोबार होता है तो किसी तरह की आयकर छूट हासिल नहीं होती। अलबत्ता कारोबार का मालिक ब्याज के हिस्से को खर्च के मद में दिखा सकता है, जिससे उसका कर योग्य मुनाफा कम हो जाता है।
Keyword: home loan, bank, RBI, top up plan,,
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