बिजनेस स्टैंडर्ड - ऋणदाता को बदलने में बिल्कुल न हिचकिचाएं
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Friday, November 16, 2018 02:59 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

ऋणदाता को बदलने में बिल्कुल न हिचकिचाएं

संजय कुमार सिंह /  October 28, 2018

मनीलाइफ फाउंडेशन की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से फ्लोटिंग दर वाले ऋणों में बैंकों द्वारा अपनाई जाने वाली अनुचित गतिविधियों पर जवाब तलब किया है। फाउंडेशन ने इस बारे में एक प्रस्तुति अदालत में दी थी, जिस पर केंद्रीय बैंक से छह हफ्तों में जवाब मांगा गया है। उम्मीद है कि इससे और कुछ अन्य प्रयासों से आवास ऋणों पर ब्याज दरें तय किए जाने के तरीकों में ज्यादा पारदर्शिता आएगी। इसके साथ ही ग्राहकों को भी ज्यादा सजग होने की जरूरत है ताकि वे ऋण बाजार में उपलब्ध सबसे बेहतर दरें हासिल कर सकें। इस जनहित याचिका में कई  मुद्दे उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि फ्लोटिंग ब्याज दरों के आकलन तरीका अस्पष्ट है। साथ ही, पुराने और नए ग्राहकों से वसूली जाने वाली ब्याज दरों में भी अंतर है। आम तौर पर जब आरबीआई रीपो दर में कटौती करता है तो ऋणदाता कम दरों का लाभ पुराने ग्राहकों को नहीं देते हैं, जबकि वे यह लाभ नए ग्राहकों को मुहैया कराते हैं।  वहीं आरबीआई के रीपो दर में बढ़ोतरी करने पर बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) तुरंत कर्ज की दरें बढ़ा देती हैं। अगर बैंक का पुराना ग्राहक उसी बैंक की बेहतर दर को अपनाता है तो उससे कनवर्जन शुल्क वसूला जाता है।
 
समिति की सिफारिशें लागू नहीं 
 
जनक राज समिति ने भी आधार दर और कोष की सीमांत लागत आधारित ऋण दर (एमसीएलआर) तय करने में मनमानेपन की ओर इशारा किया था। समिति की रिपोर्ट अक्टूबर, 2017 में प्रकाशित हुई थी। पैसाबाजार डॉट कॉम के सहायक निदेशक और आवास ऋण प्रमुख रतन चौधरी ने कहा, 'आरबीआई द्वारा गठित इस अध्ययन समूह ने पाया है कि एमसीएलआर दर में कमी को निजी बैंक करीब छह महीने बाद वास्तविक ऋण दरों में समाहित करते हैं। सरकारी बैंकों में यह अवधि और अधिक है।'
 
रिपोर्ट में इस ओर भी इशारा किया गया है कि आंतरिक बेंचमार्क पर वसूले जाने वाले स्प्रेड ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया की ईमानदारी को सवालों के घेरे में ला देते हैं। एमसीएलआर में बड़ी कमी की आंशिक भरपाई स्पे्रेड को बढ़ाकर की जाती है, जिससे ग्राहकों को मिलने वाला लाभ घट जाता है। समिति ने ऋण दरों को बाहरी, बाजार आधारित बेंचमार्क दर से जोडऩे की सिफारिश की थी ताकि दरें तय करने और ग्राहकों को फायदा पहुंचाने की प्रक्रिया पारदर्शी बने। हालांकि यह सिफारिश लागू नहीं की गई है, जबकि समिति ने अप्रैल, 2018 की डेडलाइन तय की थी। केवल सिटीबैंक ने इस साल मार्च में बाह्य बेंचमार्क (भारत सरकार के तीन महीने के ट्रेजरी बिल की बेंचमार्क दर) से जुड़े आवास ऋण शुरू किए हैं। 
 
एमसीएलआर को अपनाएं 
 
एमसीएलआर व्यवस्था अप्रैल, 2016 में शुरू हुई थी। हालांकि आधार दर को समाप्त करने की कोई अंतिम तिथि तय नहीं की गई। इसका मतलब है कि बैंकों के लिए अपने सभी ग्राहकों के ऋणों को एमसीएलआर पर आधारित करना अनिवार्य नहीं किया गया। ऐसे बहुत से ग्राहक जिन्होंने केवल दो साल पहले ऋण लिए थे, वे अब भी आधार दर के हिसाब से आवास ऋण चुका रहे हैं। एक डिजिटल होम लोन ब्रोकर स्विचमी के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी आदित्य मिश्रा ने कहा, 'अब भी बहुत से ग्राहकों के ऋण आधार दर पर आधारित हैं। ऐसे कर्जदारों को बहुत ऊंची ब्याज दरें चुकानी पड़ रही हैं। उन्हें जल्द से जल्द सबसे बेहतर एमसीएलआर आधारित दरों को अपनाना चाहिए।' अगर आप इस सारणी को देखते हैं तो पाते हैं कि बैंकों की आधार दरें उनकी एमसीएलआर की तुलना में काफी ऊंची हैं। 
 
एमसीएलआर बैंकों पर लागू 
 
हालांकि एमसीएलआर में भी कुछ खामियां हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह फिर भी आधार दर से बेहतर है। एमसीएलआर केवल बैंकों पर लागू होती है, न कि हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों पर। मिश्रा ने कहा, 'हाउसिंग फाइनैंस कंपनियां बाजार का बड़ा हिस्सा हैं और उनकी हिस्सेदारी बैंकों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है। लेकिन एमसीएलआर उन पर लागू नहीं होती है, इसलिए दरें तय करने का उनका तरीका बैंकों की तुलना में कम पारदर्शी है।' एमसीएलआर व्यवस्था के तहत पुराने ग्राहकों को दर में बदलाव का लाभ तेजी से मिलता है। हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों में दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों को बहुत देरी से मिलता है। 
 
कम दर का विकल्प अपनाएं 
 
आवास ऋण के सभी ग्राहकों को अपनी दरों की बाजार में उपलब्ध सबसे अच्छी दरों से तुलना करनी चाहिए और अगर लाभ हो रहा हो तो बैंक बदल लेना चाहिए। एक विकल्प यह है कि आप अपने वर्तमान बैंक से ही अपने ऋण को रिफाइनैंस कराएं और सबसे अच्छी दर का विकल्प अपनाएं। यह विकल्प प्रक्रिया के लिहाज से आसान है। चौधरी ने कहा, 'एमसीएलआर पर स्पे्रड को रिसेट करने की फीस अलग-अलग बैंकों में अलग-अलग है, जो उनके ऋण की मूल अवधि के करार पर निर्भर करती है। हालांकि यह बकाया ऋण राशि की 2 फीसदी तक हो सकती है, लेकिन ऋणदाता इसे पूरी तरह माफ भी कर सकते हैं।' 
 
अन्य किसी ऋणदाता के पास जाने से पहले ऑनलाइन होम लोन बैंलेंस ट्रांसफर कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें। इससे आप यह गणना कर पाएंगे कि बकाया ऋण को ट्रांसफर करने से आपको असल में कितना फायदा मिलेगा। यह आकलन करते समय वर्तमान ऋण की बची अवधि और लोन ट्रांसफर के बाद की प्रस्तावित अवधि का ब्योरा रखें। चौधरी ने कहा, 'ज्यादा बकाया राशि और अवधि होने पर ऋणों में ज्यादा फायदा मिलता है।' नए आवास ऋण के लिए आवेदन करने में जो आम खर्च आते हैं, वे बकाया ऋण को ट्रांसफर करने में भी आएंगे। यह प्रोसेसिंग फीस ऋण की राशि की 0.10 फीसदी से लेकर 1 फीसदी तक हो सकती है। कुछ ऋणदाता इसकी अधिकतम सीमा 20,000 रुपये से 50,000 रुपये रखते हैं। मिश्रा ने कहा कि जिन बैंकों की आवास ऋण की दरें कम हैं, वे कई बार योजनाएं चलाते हैं। वे इन योजनाओं में बकाया ऋण ट्रांसफर करने वाले ग्राहकों के लिए प्रोसेसिंग फीस में छूट देते हैं ताकि वे अच्छे ग्राहकों को जोड़ पाएं। 
 
इसके अलावा विधिक एवं मूल्यांकन शुल्क (आम तौर पर 10,000 रुपये से कम), स्टांप शुल्क (हर राज्य में अलग-अलग) जैसे कुछ अन्य शुल्क होते हैं। शुद्ध  बचत के आकलन के लिए ऐसे खर्चों को लोन ट्रांसफर से होने वाली बचत में से घटाएं। विशफिन डॉट कॉम के सीईओ ऋषि मेहरा का सुझाव है कि ग्राहकों को एक साथ अपने वर्तमान बैंक और नए बैंक के साथ सौदेबाजी करनी चाहिए और बेहतर पेशकश वाले विकल्प को अपनाना चाहिए। 
Keyword: home loan, bank, RBI, court,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या पटरी पर लौट रहा देश का निर्यात?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.