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मदरसन सूमी: कारोबार की धीमी रफ्तार से बढ़ा दबाव

राम प्रसाद साहू /  October 28, 2018

वाहन कलपुर्जा निर्माता मदरसन सूमी के शेयर में गिरावट का रुझान बना हुआ है और वर्ष के शुरू से इसका बाजार पूंजीकरण एक-तिहाई तक घट गया है। उद्योग में घटनाक्रम को देखते हुए विश्लेषकों का कहना है कि रुझान कमजोर बने रहने के आसार हैं। एचएसबीसी के पुनीत गुलाटी का मानना है कि इस शेयर में भारी बिकवाली वैश्विक ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मंदी और मार्जिन वृद्घि में निवेशकों का विश्वास घटने आदि की वजह से आई है। मांग से जुड़ी चिंताएं कंपनी के वैश्विक ग्राहकों और भारतीय यात्री वाहन निर्माताओं दोनों के लिए एक साथ सामने आई हैं। 

 
वैश्विक चिंताएं
 
मदरसन सूमी अपना 85 प्रतिशत से कुछ अधिक राजस्व अंतरराष्ट्रीय सहायक इकाइयों एसएमआर, एसएमपी और पीकेसी से प्राप्त करती है। वहीं एसएमआर एक्सटीरियर मिरर्स और एसएमपी बम्पर, डोर पैनल आदि का निर्माण करती हैं और कई वैश्विक कार निर्माता उसके प्रमुख ग्राहक हैं। वैश्विक कार सेगमेंट में मंदी की आशंका निवेशकों के लिए चिंता की मुख्य वजह है। विश्लेषकों ने बीएमडब्ल्यू से सुस्त मुनाफा वृद्घि को मंदी का पहला संकेत करार दिया है। जर्मन लक्जरी कार निर्माता ने संकेत दिया है कि 2018 के लिए उसका मार्जिन दशक में पहली बार 8-10 फीसदी के दायरे से नीचे रहेगा। अंतरराष्ट्रीय व्यापार चिंताओं और नए एवं सख्त वाहन उत्सर्जन नियमों की वजह से मार्जिन पर दबाव बढऩे की आशंका है। 
 
शुरू में डेमलर (मर्सिडीज) गहराते व्यापार युद्घ की वजह से अपने बिक्री लक्ष्य को घटा दिया था। फोर्ड और होंडा ने बढ़ती जिंस लागत और ऊंची दरों के प्रभाव को लेकर चेतावनियां जारी कीं। जिंस लागत से जुडुी अनिश्चितता और चीन से प्रतिशोध से खरीदारी को टालने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला जिससे वैश्विक रूप से कार निर्माताओं पर दबाव पड़ा। बिक्री में गिरावट और ऊंची लागत की अवधि में कार निर्माताओं को बिक्री/बाजर भागीदारी प्रभावित किए बगैर बढ़ती कीमतों के बीच संतुलन बिठाने के लिए बाध्य होना पड़ा। मदरसन सूमी ने अपने परिचालन पर इन सभी चुनौतियों के प्रभाव पर प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इससे उसके ऑर्डरों में कमी आ सकती है।
 
भारतीय परिचालन पर भी दबाव
 
मदरसन के लिए अन्य गतिरोध उसका भारतीय परिचालन है। सितंबर में यात्री वाहन (पीवी) वृद्घि सालाना आधार पर 5.6 प्रतिशत घट गई जो लगातार तीसरे में गिरावट थी। स्वामित्व की बढ़ती लागत और नियामकीय बदलावों की वजह से ऊंची उत्पाद कीमतों (जैसा कि बीमा में देखा गया) के साथ साथ जिंस कीमतों में वृद्घि से वाहन निर्माताओं (मारुति समेत प्रमुख ग्राहक) के लिए बिक्री वृद्घि और मार्जिन पर दबाव पड़ रहा है। हालांकि त्योहारी सत्र को देखते हुए कुछ सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है, पर कई ब्रोकरेज फर्मों ने 2018-19 के लिए अपने पीवी वृद्घि के अनुमान को 9-10 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि मदरसन सूमी के कुल राजस्व में भारत का योगदान महज 13 प्रतिशत है, लेकिन उसके परिचालन लाभ में इसका 26 प्रतिशत योगदान है। वायरिंग हार्नेस बनाने वाली उसकी भारतीय इकाई में मार्जिन उसकी विदेशी इकाइयों की तुलना में दो-तीन गुना पर है। 
 
आगे की राह
 
वैश्विक परिचालन के मार्जिन में सुधार आया है, जो कि पहले कभी 12 प्रतिशत से ज्यादा नहीं रहा था। एसएमआर और एसएमपी को उपयोगिता स्तर में सुधार से मदद मिलेगी, क्योंकि वित्त वर्ष 2019 में ती संयंत्र शुरू हो रहे हैं। हंगरी में स्थित संयंत्र ने जून तिमाही में उत्पादन शुरू कर दिया है, वहीं अलमाबा और जर्मन स्थित संयंत्रों में चालू तिमाही में उत्पादन शुरू हो जाने का अनुमान है। अपने परिचालन पर दबाव दूर करने के के प्रयास में मदरसन ने उत्पादों, क्षेत्रों और सेगमेंट के संदर्भ में अपने जोखिम को कम करने के कई कई कदम उठाए हैं। कंपनी वाहन निर्माताओं से राजस्व और बाजार भागीदारी सुधारने के लिए प्रति वाहन कंटेंट में इजाफा कर रही है।
 
इस साल के शुरू में नीदरलैंड सिथत रेडेल के अधिग्रहण से मदरसन को वैश्विक उत्पाद पेशकश का दायरा बढ़ाने में मदद मिलेगी, चाहे यह टेक्नोलॉजी, बाजार भागीदारी या भौगोलिक उपस्थिति से संबंधित हो। पिछले साल फिनलैंड की पीकेसी के अधिग्रहण के बाद कंपनी उत्तरी अमेरिका और यूरोप में वाणिज्यिक वाहनों के लिए वायरिंग हार्नेस व्यवसाय में बाजार दिग्गज बन गई।  हालांकि कंपनी की रणनीतियां मजबूत हैं, लेकिन निवेशकों को वैश्विक कार बाजार में अनिश्चितता, नियामकीय बदलावों (उत्सर्जन मानकों) आदि को देखते हुए इस शेयर पर सतर्कता बरतनी चाहिए। 
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