बिजनेस स्टैंडर्ड - मिला जुला प्रदर्शन
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मिला जुला प्रदर्शन

संपादकीय /  October 28, 2018

जुलाई-सितंबर 2018 तिमाही के नतीजे जारी करने वाली करीब 300 सूचीबद्ध कंपनियों का विश्लेषण बताता है कि बिक्री में बढ़ोतरी हुई है लेकिन मार्जिन पर दबाव भी बढ़ा है। कच्चे माल और ऋण की लागत बढ़ी है। ध्यान रहे कि जुलाई 2017 से लागू वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने अस्वाभाविक आधार प्रभाव को जन्म दिया है। वर्ष 2017-18 की समान तिमाही की तुलना में शुद्ध बिक्री 24 फीसदी बढ़कर 46 खरब रुपये हो गई। कर पश्चात समायोजित लाभ भी 18 फीसदी बढ़कर 666 अरब रुपये हो गया। परिचालन मुनाफा 14 फीसदी बढ़कर 17 खरब रुपये हो गया। ब्याज की लागत में 24 फीसदी का इजाफा हुआ जबकि कुल व्यय 26 फीसदी बढ़ा। परिचालन मार्जिन 31.5 फीसदी से घटकर 29 फीसदी रह गया। अगर रिफाइनिंग, बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को निकाल दें तो नतीजे कम आकर्षक नजर आते हैं। शुद्ध बिक्री में 15 फीसदी का इजाफा हुआ है लेकिन व्यय 18 फीसदी बढ़ा है। समायोजित मुनाफे में 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। परिचालन मार्जिन एक वर्ष पहले के 24 फीसदी से घटकर 21 फीसदी रह गया है।

 
इन नतीजों में एक बड़ा कारक कमजोर रुपया भी रहा है। औषधि उद्योग को इसका लाभ मिला है और उसकी बिक्री 28 फीसदी बढ़ चुकी है जबकि समायोजित कर पश्चात लाभ 41 फीसदी जबकि कर, ब्याज, अवमूल्यन और ऋणमुक्ति पूर्व लाभ 34 फीसदी से बढ़कर 37 फीसदी हो गया है। सॉफ्टवेयर क्षेत्र का प्रदर्शन कम प्रभावशाली रहा है।  सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की 26 कंपनियों की बिक्री में 19 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली जबकि कर पश्चात मुनाफे में 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इस क्षेत्र के लिए परिचालन मुनाफा मार्जिन 27 प्रतिशत से घटकर 26 प्रतिशत रह गया। टीसीएस और विप्रो दोनों के ऋण की लागत बढ़ी है। निर्यात आधारित एक अन्य क्षेत्र वस्त्र उद्योग को जीएसटी के बाद प्रारंभिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस क्षेत्र के मुनाफे में 42 फीसदी और बिक्री में 19 फीसदी की उछाल आई। परंतु वाहन उद्योग को उच्च ब्याज दर और कच्चे माल की बढ़ी कीमतों की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ा। मारुति, हीरो और टीवीएस के मुनाफे में कमी आई और परिचालन मुनाफा कम हुआ। दैनिक उपयोग की उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में हिंदुस्तान लीवर का प्रदर्शन अच्छा रहा। उसकी बिक्री में 13 प्रतिशत और मुनाफे में 22 प्रतिशत का इजाफा हुआ। सीमेंट उद्योग में मांग अच्छी है लेकिन मार्जिन में कमी आई है।
 
इस्पात क्षेत्र का आकलन करना आसान नहीं है। अगर घाटे में चल रही मोनेट इस्पात और उत्तम गैल्वा को छोड़ दिया जाए तो इस क्षेत्र का प्रदर्शन अच्छा रहा है। लेकिन सेल और टाटा स्टील के नतीजे अभी आने बाकी हैं। पेंट उद्योग कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों से परेशान है लेकिन हिंद ऑयल एक्सप्लोरेशन की बिक्री और मुनाफे में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। बैंकिंग क्षेत्र का प्रदर्शन मिला जुला है। कई सरकारी बैंकों के आंकड़े आने बाकी हैं। ऋण में 19 फीसदी की वृद्धि देखने को मिली है जबकि ब्याज की लागत 22 फीसदी बढ़ी है। ओरियंटल बैंक की हालत में बदलाव नजर आया है जबकि आईडीएफसी बैंक संकट में है। गैर बैंकिंग वित्तीय क्षेत्र के ऋण वितरण में 27 फीसदी इजाफा हुआ है जबकि उसके ऋण की लागत 30 फीसदी बढ़ी है। ऑप्टिक फाइबर उद्योग के आकार और मुनाफा दोनों में बढ़ोतरी हुई है। कुल मिलाकर देखें तो कोई निर्णायक मत बनाने के पहले और नमूनों की आवश्यकता है लेकिन अगर मार्जिन पर ऐसा ही दबाव बना रहा तो उद्योग जगत के लिए उत्साहित होने की कोई वजह नहीं दिखती। भले ही कारोबार के आकार में इजाफा हुआ हो।
Keyword: company, result, Q2, GST, SAIL, tata steel, bank,,
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