बिजनेस स्टैंडर्ड - खाद के बढ़े बोझ से किसानों को राहत की आस
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, November 12, 2019 07:42 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

खाद के बढ़े बोझ से किसानों को राहत की आस

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली October 26, 2018

अगर सरकार पोषण आधारित सब्सिडी (एनबीएस) के तहत आवंटित सब्सिडी बढ़ाती है तो गैर यूरिया खादों के बढ़े खुदरा दाम की मार झेल रहे किसानों को राहत मिल सकती है। इस समय डाई अमोनिया फॉस्फे ट (डीएपी), मुरिएट आफ पोटाश (एमओपी) और एनपीके और इसके विभिन्न कंबिनेशन जैसे गैर यूरिया उर्वरकों के दाम तेजी से बढ़े हैं। हालांकि गैर यूरिया उर्वरकों पर सब्सिडी की मात्रा बढ़ाने और गैस की बढ़ी कीमतों की भरपाई यूरिया फर्मों को करने से केंद्र सरकार की राजकोषीय गणित बिगड़ सकती है। लेकिन रबी सत्र में उर्वरकों की कीमतों में तेजी को देखते हुए सरकार द्वारा त्वरित कार्रवाई की जरूरत महसूस की जा रही है।
 
अगर नवंबर के आखिर के पहले इस पर फैसला हो जाता है तो कीमतों में तेजी से कुछ राहत मिल सकती है क्योंकि उसके बाद खाद की खपत बहुत मामली होती है।  कंपनियों ने कहा कि सरकार ने 2018-19 के लिए गैर यूरिया खादों की नियत सब्सिडी में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि इनपुट लागत बढ़ी है। इसकी वजह से किसानों पर लागत का बोझ बढ़ा है। डीएपी के मामले में मोटे अनुमान से पता चलता है कि 2017 के खरीफ सत्र और 2018 के खरीफ सत्र के बीच खुदरा दाम में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं एमओपी और एनपीए के दाम इस दौरान 15 से 60 प्रतिशत बढ़े हैं, जिसमें कंबिनेशन के मुताबिक अलग अलग बढ़ोतरी हुई है।
 
मौजूदा रबी सत्र की बुआई में किसानों को उर्वरक क्षेत्र से कोई राहत नहीं मिली, क्योंकि कीमतों में तेजी जारी रही है।  रेटिंग एजेंसी इक्रा के एक आकलन के मुताबिक इस साल खरीफ सत्र से रबी के बुआई सत्र के बीच डीएपी के दाम 12-13 प्रतिशत बढ़े हैं, जबकि एमओपी की कीमतों में इस दौरान 25-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।  उद्योग जगत के दिग्गजों और बाजार पर नजर रखने वालों का कहना है कि गैर यूरिया खाद के दाम में बढ़ोतरी की बड़ी वजह डीएपी और एनपीए की इनपुट लागत है, क्योंकि पिछले एक साल में फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया और पोटाश की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 
 
एमओपी की स्थिति देखें तो पिछले एक साल में इसकी कॉन्ट्रैक्ट दरों में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।  डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज गिरावट का असर भी कच्चे माल के आयात पर बड़ा है, जो महंगा होने की वजह से खुदरा दाम बढ़े हैं। डीएपी, एनपीके के ज्यादातर घटकोंं का आयात होता है और इनके अंतरराष्ट्रीय दाम बढऩे पर कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। 
Keyword: NBS, DAP, MOP, urea,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आईआईपी में गिरावट आर्थिक सुस्ती गहराने का संकेत है?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.